Monday , 2 November 2026

जम्मू-कश्मीर में सियासी भूचाल: उमर अब्दुल्ला सरकार पर संकट के बादल! 25 NC विधायकों ने दिया 14 दिन का अल्टीमेटम, सांसद मेहदी के इस्तीफे के ऐलान से मची खलबली

जम्मू-कश्मीर की सियासत में इन दिनों बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान के साथ अपने निजी जीवन की चर्चाओं को लेकर सुर्खियों में हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी सरकार के सामने अपनी ही पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के भीतर से बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के करीब 25 विधायकों ने नेतृत्व की कार्यशैली और हालिया फैसलों के खिलाफ असंतोष का बिगुल फूंक दिया है। असंतुष्ट खेमे ने सरकार और पार्टी हाईकमान को 14 दिनों का अल्टीमेटम थमाते हुए मांगें न मानने पर सीधे राजभवन जाकर समर्थन वापसी की दो-टूक चेतावनी दे डाली है।

सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा, पार्टी पर वादों से मुकरने का आरोप

सरकार के भीतर इस कलह के बीच श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर को संसद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान कर सियासी माहौल और गरमा दिया है। सांसद मेहदी ने खुले तौर पर पार्टी नेतृत्व पर जनता के विश्वास और चुनावी वादों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक बंदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के विशेषाधिकारों की लड़ाई का वादा कर सत्ता हासिल की, लेकिन कुर्सी मिलते ही पार्टी अपनी मूल विचारधारा से पीछे हट गई। मेहदी ने तंज कसते हुए कहा कि जब जनता के वादों पर अमल की बात उठती है तो मजबूरी का बहाना बना दिया जाता है। वे बडगाम के बहिश्त-ए-जहरा पार्क में जनसभा को संबोधित करने वाले हैं, जिसे उनके आगामी सियासी कदम की शुरुआत माना जा रहा है।

विधानसभा का गणित: क्या गिर सकती है उमर अब्दुल्ला सरकार?

जम्मू-कश्मीर विधानसभा की 90 सीटों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास कुल 41 विधायक हैं। ऐसे में यदि असंतुष्ट 25 विधायक एकजुट होकर बगावत की राह पकड़ते हैं और राजभवन का दरवाजा खटखटाते हैं, तो सरकार का विधायी बहुमत सीधे तौर पर खतरे में पड़ जाएगा। हालांकि, अभी तक असंतुष्ट गुट के किसी भी विधायक ने सार्वजनिक मंच पर औपचारिक रूप से समर्थन वापसी का पत्र नहीं सौंपा है। वहीं पार्टी के विधायक हिलाल अकबर लोन ने बगावत की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि एक साथी के घर हुई सामान्य बैठक को जानबूझकर सियासी रंग दिया गया। लोन ने स्पष्ट किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने उन्हें पहचान दी है और उनकी निष्ठा किसी पद की मोहताज नहीं है।

मंत्रिमंडल विस्तार से भड़की बगावत, बागी विधायकों ने रखीं 5 शर्तें

पार्टी के भीतर असंतोष की सबसे बड़ी चिंगारी 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सुलगी। उमर अब्दुल्ला ने जब अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को मंत्री पद की शपथ दिलाई, तो कई वरिष्ठ नेता हाशिए पर चले गए। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गुलाम अहमद गुल और अब्दुल मजीद लारमी जैसे कद्दावर नेताओं ने अपनी उपेक्षा पर खुला गुस्सा जाहिर किया था। सूत्रों के अनुसार, नाराज विधायकों ने नेतृत्व के सामने 5 प्रमुख शर्तें रखी हैं:

  1. मौजूदा मंत्रिपरिषद के सभी मंत्रियों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किया जाए।

  2. मुख्यमंत्री के सलाहकार को फौरन पद से हटाया जाए।

  3. नए मंत्रिमंडल का गठन केवल निष्पक्षता और योग्यता के आधार पर हो।

  4. मंत्री चयन में चंद नेताओं की मर्जी के बजाय पूरे विधायक दल की राय ली जाए।

  5. केंद्र सरकार के सामने अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली का मुद्दा पूरी आक्रामकता से उठाया जाए।

14 दिन की समयसीमा मिलने के बाद अब गेंद उमर अब्दुल्ला और एनसी हाईकमान के पाले में है। यदि तय समय में विधायकों की नाराजगी दूर नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर की सत्ता में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।

Check Also

Ayodhya Deepotsav: ‘आस्था के साथ आर्थिकी को भी मिली नई ऊर्जा’, दीपोत्सव की तैयारियों के बीच बोले सीएम योगी- हर दीप में बसता है कुम्हार का श्रम

लखनऊ रामनगरी अयोध्या में भव्य और ऐतिहासिक दीपोत्सव की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। इस …