Saturday , 31 October 2026

यूपी विधानसभा चुनाव 2027: ‘मतभेद गोमती में बहाएं…’, लखनऊ में अमित शाह के पांच बड़े सियासी संदेश, तय हुआ बीजेपी का चुनावी रोडमैप

लखनऊ उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अपनी रणनीति की बिसात बिछा दी है। राजधानी लखनऊ में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को चुनावी विजय का संकल्प दिलाया। अमित शाह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वे आगामी चुनाव में लगातार उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे और चुनावी तैयारियों का पूरा हिसाब भी लेंगे। भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने भी ऐलान कर दिया कि उत्तर प्रदेश का चुनावी रण अमित शाह के मार्गदर्शन में लड़ा जाएगा। शाह के इस महत्वपूर्ण दौरे ने प्रदेश की सियासत में कई कड़े और स्पष्ट संदेश दिए हैं।

1. गुटबाजी पर सीधी चोट: मतभेद गोमती में विसर्जित करने की दो टूक नसीहत गृह मंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों को आंतरिक एकजुटता बनाए रखने का कड़ा निर्देश दिया। हालिया लोकसभा नतीजों और विधान परिषद चुनाव के बाद संगठन के भीतर सामने आ रही खींचतान को खारिज करते हुए शाह ने कहा कि चुनावी तैयारी के बीच आपसी मतभेदों की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से साफ कहा कि सभी मनमुटाव गोमती नदी में विसर्जित कर दें और इस चुनाव को अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर परिश्रम की पराकाष्ठा करें। शीर्ष नेतृत्व का यह स्पष्ट संकेत है कि पार्टी हित के आगे किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

2. राम मंदिर और यूसीसी के सहारे प्रखर हिंदुत्व के एजेंडे को धार अमित शाह ने 30 अक्टूबर 1990 की अयोध्या घटना को याद करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला और कहा कि निहत्थे कारसेवकों पर गोलियां चलाने वाले आज सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रहे हैं। उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण और कल्याण सिंह सरकार के योगदान का उल्लेख करते हुए इसे पार्टी की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि पांच सदियों के लंबे इंतजार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सपना साकार हुआ। विकास और सुशासन के दावों के साथ भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे को पूरी मजबूती से सामने रखेगी। शाह ने यह घोषणा भी की कि उत्तर प्रदेश में तीसरी बार सरकार बनते ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी।

3. दिल्ली और लखनऊ के बीच अटूट तालमेल, योगी के नेतृत्व पर मुहर केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन के बीच दूरी की तमाम अटकलों पर अमित शाह के दौरे ने विराम लगा दिया। कार्यकर्ताओं को यह आश्वस्त किया गया कि आगामी विधानसभा चुनाव में दिल्ली का नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय और सहयोगी की भूमिका निभाएगा। भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े ने साफ किया कि चुनाव अमित शाह के सीधे मार्गदर्शन में होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका पर उन्होंने दो टूक कहा कि गृह मंत्री ने मंच से योगी के कार्यों की खुलकर सराहना की है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संगठन और सरकार पूरी तरह एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेंगे।

4. 2014 और 2017 की याद दिलाकर बूथ स्तर की मजबूती पर जोर राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अपने पुराने कार्यकाल का ब्योरा देते हुए अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को पार्टी का स्वर्णिम इतिहास याद दिलाया। उन्होंने बताया कि 2014 के दौर में महज 44 विधायकों के साथ संघर्ष कर रही भाजपा ने तहसील और बूथ स्तर तक संगठन को खड़ा करके लोकसभा चुनाव में 73 सीटें जीती थीं। इसके बाद 2017 में ऐतिहासिक 312 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। शाह ने स्पष्ट किया कि विजय का मार्ग केवल जमीनी स्तर पर बूथ और तहसील इकाइयों को सक्रिय करने से ही खुलता है, और पार्टी में बड़ा से बड़ा नेता भी मूल रूप से एक सामान्य कार्यकर्ता ही है।

5. ‘अंगद का पैर है बीजेपी’: विपक्ष पर प्रहार और कार्यकर्ताओं में नया जोश हालिया राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा अंगद का पैर है, जिसे डिगाना नामुमकिन है। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बयानों को खारिज करते हुए कार्यकर्ताओं से अर्जुन की तरह केवल अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। शाह ने बार-बार प्रदेश आकर मोर्चा संभालने और प्रगति रिपोर्ट लेने की बात कहकर जमीनी कार्यकर्ताओं में नए सिरे से चुनावी ऊर्जा और आत्मविश्वास भरने का काम किया।

 

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