
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को दहलाने और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की एक बड़ी और खौफनाक अंतरराष्ट्रीय साजिश को उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (UP ATS) ने समय रहते बेनकाब कर दिया है। यूपी एटीएस ने शुक्रवार को लखनऊ में त्वरित घेराबंदी करते हुए पंजाब के रहने वाले तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपियों पर पाकिस्तान स्थित हैंडलर के सीधे निर्देश पर लखनऊ में पुलिस या सेना के किसी जवान की दिनदहाड़े हत्या करने और सनसनी फैलाने की साजिश रचने का गंभीर आरोप है। सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों के पास से विदेशी पिस्टल और 20 जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं।
‘राणा भाई’ ने दी थी सुपारी, 3 लाख रुपये और हमले के वीडियो का था सौदा
एडीजी (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यूपी एटीएस को सटीक खुफिया इनपुट मिला था कि पंजाब के कुछ संदिग्ध युवक पाकिस्तान में बैठे ‘राणा भाई’ नामक हैंडलर के संपर्क में हैं। जांच में सामने आया कि यह हैंडलर कुख्यात प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि हैंडलर ने इन आरोपियों को लखनऊ में किसी पुलिसकर्मी या सेना के जवान को निशाना बनाने का टारगेट दिया था। वारदात को अंजाम देने के बदले उन्हें 3 लाख रुपये नकद देने का वादा किया गया था। यही नहीं, आरोपियों को आदेश दिया गया था कि वे हमले का पूरा वीडियो रिकॉर्ड कर तुरंत पाकिस्तान भेजें और वारदात के फौरन बाद नेपाल सीमा के रास्ते फरार हो जाएं।
विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद, मोबाइल में मिली संवेदनशील ठिकानों की रेकी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंजाब निवासी गगनदीप सिंह, रजत कुमार और कृष्ण के रूप में हुई है, जबकि चौथे नाबालिग साथी को बाल सुधार गृह भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। आरोपियों के कब्जे से एक उच्च क्षमता वाली विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए गए हैं। मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक पड़ताल में कई संदिग्ध वॉट्सऐप व इंस्टाग्राम चैट, वीडियो और राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों की रेकी से जुड़े इनपुट मिले हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने लखनऊ के कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और लोकेशन की तस्वीरें व जीपीएस डेटा सीमा पार हैंडलर को भेजा था।
पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार सप्लाई का शक, स्थानीय नेटवर्क की तलाश
शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि लखनऊ पहुंचने के बाद आरोपियों को हथियार और गोला-बारूद एक अन्य अज्ञात सहयोगी के जरिए मुहैया कराए गए थे। आशंका जताई जा रही है कि विदेशी हथियारों की यह खेप सीमा पार पाकिस्तान से तस्करी या ड्रोन के जरिए पंजाब मंगवाई गई थी और फिर लखनऊ पहुंचाई गई। मुख्य आरोपी गगनदीप सिंह पर पंजाब में पहले से ही आर्म्स एक्ट का आपराधिक मुकदमा दर्ज है। एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि लखनऊ में इन शूटरों को ठहरने, लॉजिस्टिक सपोर्ट और फाइनेंस किसने उपलब्ध कराया।
कस्टडी रिमांड पर लेगी ATS, सीमा पार फंडिंग की जड़ें खंगालने में जुटी टीम
एडीजी अमिताभ यश के मुताबिक, यूपी एटीएस अब आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी रिमांड हासिल करेगी। रिमांड के दौरान पाकिस्तान में बैठे ‘राणा भाई’ के असली नेटवर्क, स्थानीय स्लीपर सेल, हथियारों के सप्लायर, हवाला या बैंक खातों के जरिए हुई फंडिंग और नेपाल भागने के रूट को लेकर विस्तृत पूछताछ की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि समय रहते हुई इस त्वरित कार्रवाई से राजधानी लखनऊ में एक बड़ी आतंकी वारदात टल गई है।
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