पश्चिम एशिया एक बार फिर विनाशकारी युद्ध के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के तुरंत बाद अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के खिलाफ एक नए और बेहद घातक सैन्य अभियान की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक ताजा खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों देशों की संयुक्त रणनीति में ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकाने, मिसाइल व ड्रोन डिपो और ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को सीधे तौर पर निशाना बनाने की योजना बनाई गई है। हालांकि, कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर इस जंगी मसौदे को अभी अंतिम आधिकारिक मंजूरी मिलना बाकी है।
3 दिन का ‘शॉर्ट एंड इंटेंस’ अटैक: घुटनों पर लाने की रणनीति
खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, यह सैन्य अभियान भले ही छोटा हो लेकिन इसका असर बेहद भीषण और तीव्र रखने की योजना है। अमेरिका और इजरायल का मुख्य उद्देश्य मात्र 72 घंटे यानी तीन दिनों के भीतर ईरान की अर्थव्यवस्था और रक्षा तंत्र को ऐसी गहरी चोट पहुंचाना है, जिससे तेहरान झुकने पर मजबूर हो जाए और परमाणु कार्यक्रम पर उनकी शर्तों के तहत समझौता कर ले। इस सुनियोजित हमले की हिटलिस्ट में ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकाने, लंबी दूरी की मिसाइलों व ड्रोनों के जखीरे, महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के मुख्य कमांड सेंटर्स को सबसे ऊपर रखा गया है।
क्या ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर गिरेगा महाविनाशक MOAB?
ईरान के सबसे सुरक्षित और जमीन के नीचे गहरे दबे परमाणु केंद्र ‘पिकैक्स माउंटेन’ को ध्वस्त करने के लिए भी गंभीर मंथन चल रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि इस भूमिगत बंकर को तबाह करने के लिए 22,000 पाउंड वजनी महाविनाशक GBU-43/B बम का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे दुनिया ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ (MOAB) के नाम से जानती है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा गलियारों में इस बात को लेकर भारी असमंजस है कि ईरानी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर प्रहार किया जाए या नहीं। अधिकारियों को डर है कि ईरानी तेल आपूर्ति बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल और अमेरिका में घरेलू पेट्रोल की कीमतें बेकाबू हो सकती हैं।
ईरान की खुली धमकी: ‘इंटरनेट केबल और सऊदी तेल ठिकानों को बना देंगे निशाना’
हमले की आहट पाते ही तेहरान ने बेहद सख्त लहजे में जवाबी चेतावनी जारी कर दी है। ईरान ने साफ शब्दों में कह दिया है कि यदि उसकी संप्रभुता पर चोट की गई तो इस बार पलटवार कतई सीमित नहीं रहेगा। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि वे सऊदी अरब के प्रमुख तेल संयंत्रों, रणनीतिक डेटा सेंटरों और समुद्र के भीतर बिछी वैश्विक इंटरनेट केबलों तक को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेंगे। तेहरान का दो टूक कहना है कि यदि यह जंग भड़की तो न तो यह जल्दी थमेगी और न ही इसकी सीमाएं तय होंगी।
सीमा तक पहुंचे 800 मील दूर उड़ान भरने वाले इजरायली लड़ाकू जेट
तनाव के बीच इजरायल ने सोमवार को शक्ति प्रदर्शन करते हुए ईरान सीमा के करीब एक बड़ा सैन्य युद्धाभ्यास पूरा किया। इजरायली वायुसेना के दर्जनों अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों और हवा में ईंधन भरने वाले टैंकरों ने सीरिया और इराक के हवाई क्षेत्रों से गुजरते हुए करीब 800 मील से अधिक की दूरी तय की और ईरान की सीमा तक जाकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। अधिकारियों का मानना है कि यह ठीक वही हवाई गलियारा है जिसका उपयोग संभावित वास्तविक हमले के दौरान किया जाएगा। इजरायल ने इसे केवल नियमित अभ्यास और तेहरान को सख्त संदेश देना बताया, लेकिन अमेरिकी रणनीतिकारों को अंदेशा था कि ईरान के जवाबी ऐक्शन से चुनाव पूर्व ही भयंकर युद्ध न भड़क जाए।
ट्रंप के सामने तीन बड़ी चुनौतियां, कूटनीति या बारूद?
रणनीतिक योजनाएं टेबल पर तैयार होने के बावजूद ट्रंप प्रशासन तुरंत सैन्य कार्रवाई की हरी झंडी देने से हिचकिचा रहा है। इस संभावित जंग के रास्ते में वाशिंगटन के सामने तीन बड़े रोड़े हैं—वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल, पूरे मध्य पूर्व में युद्ध की लपटों का अनियंत्रित फैलाव और अमेरिकी सेना के पास मिसाइल-इंटरसेप्टर हथियारों की घटती संख्या। जब तक ईरान कूटनीतिक बातचीत की मेज पर नहीं लौटता, तब तक युद्ध के बादल गहराए रहेंगे, लेकिन ट्रंप अब भी विनाशकारी जंग की जगह सख्त कूटनीतिक दबाव के रास्ते को तौल रहे हैं।
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