Thursday , 22 October 2026

शिवा शर्मा हत्याकांड: नागपुर से लखनऊ लाई गई मॉडल श्रद्धा दुबे, मकोका वाले बदमाशों के संरक्षण का शक; आज कोर्ट में पेशी

राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में मुख्य आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे को यूपी एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम नागपुर से लखनऊ लेकर पहुंच गई है। ट्रांजिट रिमांड पर लाई गई श्रद्धा के साथ उसकी बहन रश्मि और निजी चालक दानिश को भी कड़ी सुरक्षा के बीच राजधानी लाया गया है। तीनों आरोपियों को फिलहाल हजरतगंज कोतवाली में रखा गया है, जहां महिला पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। आधिकारिक मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीनों को आज ही सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस आगे की गहन पूछताछ के लिए लंबी कस्टडी रिमांड की मांग करेगी।

नागपुर में मकोका आरोपियों का मिला संरक्षण, रंगदारी और तस्करी सिंडिकेट की जांच

जांच एजेंसियों के सूत्रों से मिले इनपुट के मुताबिक, नागपुर में फरारी काट रही श्रद्धा और उसके साथियों को स्थानीय रसूखदार बदमाशों जुल्फिकार बेहलिम और मोहसिन का संरक्षण मिला हुआ था। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले इन दोनों संदिग्धों के गिरोह पर कारोबारियों से मोटी रंगदारी वसूलने, अपहरण और जानलेवा धमकियां देने के कई संगीन मामले दर्ज हैं। इतना ही नहीं, बीते अगस्त माह में ही प्रशासन ने इनके खिलाफ संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत सख्त कार्रवाई की थी। पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या श्रद्धा का यह नेटवर्क मादक पदार्थों और सोने की अवैध तस्करी से जुड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट के साथ भी सांठगांठ में था।

केजीएमयू से सीधे नेपाल फरार: बुटवल के लॉज से लगातार बदलती रही ठिकाने

पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, 9 अक्तूबर की रात बालू अड्डा स्थित अपार्टमेंट में शिवा शर्मा की मौत के तुरंत बाद श्रद्धा अपनी बहन रश्मि और चालक दानिश के साथ गंभीर हालत में शिवा को केजीएमयू अस्पताल लेकर पहुंची थी। वहां डॉक्टर द्वारा कारोबारी को मृत घोषित करते ही तीनों मौके से रफूचक्कर हो गए। गिरफ्तारी से बचने के लिए वे सीतापुर, महमूदाबाद और बहराइच के रास्ते आगे बढ़े और सुबह तड़के रुपईडीहा बॉर्डर पार कर नेपाल में दाखिल हो गए। नेपाल के बुटवल में बिना पहचान पत्र (आईडी) लिए एक सस्ते होटल में पनाह ली। जब तक यूपी पुलिस का सुराग वहां तक पहुंचा, तब तक आरोपी चेकआउट कर निकल चुके थे। करीब 16 अक्तूबर तक आरोपी नेपाल के सुदूर इलाकों में ठिकाने बदलते रहे।

सिम फेंककर ड्राइवरों के हॉटस्पॉट से खेलती रही लुकाछिपी

जांच से बचने के लिए आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से अपने मोबाइलों से मुख्य सिम कार्ड निकालकर फेंक दिए थे, जिससे सेलुलर टावर ट्रैकिंग बेअसर हो गई। हालांकि, फरारी के दौरान कुछ घंटों के अंतराल पर उनके हैंडसेट पर संक्षिप्त समय के लिए इंटरनेट डेटा सक्रिय होता और तुरंत बंद हो जाता था। लखनऊ साइबर सेल ने जब आईपी एड्रेस को ट्रैक करना शुरू किया, तो हर बार टीम को गच्चा खाना पड़ा; क्योंकि जिस स्थान की लोकेशन आती, वहां किसी रिक्शा चालक, ई-रिक्शा या टैक्सी ड्राइवर का मोबाइल मिलता था। पूछताछ में सामने आया कि श्रद्धा राहगीरों या चालकों से वाई-फाई हॉटस्पॉट मांगकर केवल व्हाट्सएप और इंटरनेट कॉलिंग के जरिए अपने संपर्कों से बात करती थी।

बुर्का पहनकर सीमा पार, झोले में भरा सामान और आगरा का सफर

भारत में दोबारा दाखिल होने के दौरान श्रद्धा ने पहचान छिपाने के लिए कड़ा पहरा तैयार किया था। 16 अक्तूबर को महराजगंज जिले के भगवानपुर सीमा से प्रवेश करते वक्त उसने बुर्का ओढ़ रखा था। शक से बचने के लिए उसने अपने महंगे ट्रॉली बैग एक स्थानीय ड्राइवर को सौंप दिए और कपड़ों को आम झोलों में पैक कर लिया। इसके बाद नौतनवा से किराए की गाड़ी लेकर वह रायबरेली पहुंची। रायबरेली में कुछ घंटे ठहरने के बाद उसने टैक्सी बदली और आगरा पहुंच गई। पुलिस की टीमें लगातार उसके पीछे दबिश देती रहीं, लेकिन हर ठिकाने से आरोपी महज कुछ घंटे पहले ही फरार होने में कामयाब हो जाते थे।

फतेहपुर की लोकेशन और नागपुर कैब चालक ने कराई गिरफ्तारी

10 दिनों की लुकाछिपी के बाद श्रद्धा की गिरफ्तारी में नागपुर जाने वाली कैब के चालक का मोबाइल हॉटस्पॉट सबसे बड़ा सुराग साबित हुआ। जब फतेहपुर के समीप उस कनेक्शन का डिजिटल फुटप्रिंट मिला, तो प्रयागराज एसटीएफ की यूनिट भी अलर्ट हो गई। तकनीकी सुरागों को जोड़ते हुए पुलिस टीम ने मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र की सीमा तक रूट ट्रेस किया। 20 अक्तूबर को जैसे ही कैब चालक आरोपियों को उनके फ्लैट पर छोड़कर वापस निकला, नागपुर पुलिस ने उसे धर दबोचा। चालक की निशानदेही पर पुलिस सीधे उस ठिकाने पर पहुंची और श्रद्धा, रश्मि और दानिश को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।

 

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