Sunday , 4 October 2026

UP Rajya Sabha Election: भाजपा के 9वें पर्चे ने बढ़ाई सपा की धड़कनें, क्या फिर होगी क्रॉस वोटिंग? समझें 10 सीटों का सियासी खेल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी हलचल चरम पर पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक रणनीतिक दांव ने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है। विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर भाजपा के आठ और समाजवादी पार्टी (सपा) के दो प्रत्याशियों की जीत बिल्कुल तय मानी जा रही थी, लेकिन भाजपा द्वारा नौवां नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद पूरे समीकरण उलझ गए हैं। अब सूबे के सियासी गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या भाजपा अतिरिक्त प्रत्याशी उतारकर चुनाव को कांटे की टक्कर में बदलने जा रही है?

9वें पर्चे से सेंधमारी और शक्ति परीक्षण की सुगबुगाहट

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे इस राज्यसभा चुनाव को सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के लिए बड़े ‘शक्ति परीक्षण’ के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा की ओर से नौवां पर्चा खरीदे जाने के बाद विपक्षी खेमे में सेंधमारी की आशंकाएं गहराने लगी हैं। दोनों ही प्रमुख दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और किसी भी संभावित बगावत को रोकने के लिए किलेबंदी में जुट गए हैं। भाजपा और सपा दोनों के पास अपने कोटे के बाद कुछ अतिरिक्त वोट बचते हैं, जिसके चलते क्रॉस वोटिंग और विधायकों के पाला बदलने को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।

भाजपा का पुराना फॉर्मूला और प्रत्याशियों पर सस्पेंस

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इससे पहले भी राज्यसभा चुनावों में अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर सियासी बाजी पलट चुकी है। नौवां नामांकन पत्र लिए जाने के बाद यह अटकलें जोरों पर हैं कि क्या पार्टी फिर वही दांव आजमाने की तैयारी में है। हालांकि, भाजपा ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान नहीं किया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब तक भाजपा के सभी प्रत्याशियों के नाम पूरी तरह साफ नहीं होते, तब तक असली तस्वीर सामने नहीं आएगी।

सपा के दो उम्मीदवार मैदान में, तीसरे पर अखिलेश का दांव

दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते खोलते हुए प्रो. रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनराज नथवानी को मैदान में उतारा है, जो अपना नामांकन पत्र भी दाखिल कर चुके हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि यदि जरूरी संख्याबल का इंतजाम हुआ तो पार्टी तीसरा प्रत्याशी भी उतार सकती है। अगर सपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है या भाजपा नौवें प्रत्याशी को औपचारिक रूप से मैदान में बनाए रखती है, तो निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाएगा। ऐसे में 10वीं सीट के लिए होने वाले मतदान में दोनों दलों के सामने अपने विधायकों को टूटने से बचाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

 

Check Also

यूपी कांग्रेस में बड़े फेरबदल पर भड़के ओपी राजभर: बोले- ‘मोना और इमरान से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, दम है तो मुस्लिम को बनाएं सीएम उम्मीदवार’

लखनऊ ब्यूरो: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच कांग्रेस आलाकमान द्वारा किए …