Wednesday , 23 September 2026

भूत भगाने के तांत्रिक अनुष्ठान में सिरफिरे ने बरसाईं गोलियां; 5 मौतों का वो रहस्य, जिसके चलते आजमगढ़ में हुआ नरसंहार

आजमगढ़। अंधविश्वास, झाड़-फूंक और सनक के गठजोड़ ने जिले के अहरौला इलाके में ऐसा रक्तरंजित मंजर खड़ा किया, जिसकी गूंज से पूरा इलाका दहल उठा है। शंभूपुर गहजी गांव में मृतक बड़े भाई की ‘आत्मा’ शांत कराने और कथित प्रेतबाधा से छुटकारा पाने के लिए चल रहे तांत्रिक अनुष्ठान के बीच एक सिरफिरे ने खूनी खेल रच डाला। पत्नी और पूजा करा रहे दो ब्राह्मणों को भूनने के बाद बच्चों को बंधक बनाने वाले आरोपी अरविंद सिंह का पुलिस मुठभेड़ में अंत हो गया। वहीं, पिता की गोली से छलनी 4 साल के मासूम बेटे ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस रूह कंपा देने वाले घटनाक्रम में अब तक कुल 5 जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं।

आत्मा भगाने के लिए 4 दिन से चल रहा था अनुष्ठान

पुलिस की तफ्तीश और परिजनों से सामने आए तथ्यों के अनुसार, आरोपी अरविंद सिंह गंभीर मानसिक विकार से जूझ रहा था और उसका इलाज वाराणसी के मनोरोग विशेषज्ञ से चल रहा था। इसके बावजूद परिवार अंधविश्वास के चंगुल में फंसा रहा। परिजनों को शक था कि अरविंद पर उसके दिवंगत बड़े भाई सुनील सिंह का साया मंडरा रहा है। इसी प्रेतबाधा को काटने की खातिर उसकी वृद्ध मां समला देवी (70) और पत्नी बबीता सिंह (40) ने घर में चार दिवसीय विशेष तांत्रिक अनुष्ठान का आयोजन कराया था, जिसकी पूर्णाहुति बुधवार को निर्धारित थी।

आंगन में हवन देखते ही खोया आपा, पत्नी और दो पुजारियों को भूना

मंगलवार की शाम करीब 6 बजे जब अरविंद बाजार से वापस लौटा, तो आंगन में जलती वेदी और मंत्रोच्चार देख उसका पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वह जोर-जोर से चीखने लगा कि ‘तेरे ही फरेब के कारण मेरे भाई की जान गई है’। आव देखा न ताव, उसने अपनी लाइसेंसी बंदूक निकाली और सबसे पहले पत्नी बबीता पर फायर झोंक दिया। इसके बाद उसने पूजा की वेदी पर बैठे दोनों पुरोहितों—महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा—को गोलियों से छलनी कर दिया। तीनों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

तीन बच्चों को कमरे में खींचकर बनाया बंधक, 4 साल के बेटे को मारी गोली

इस तिहरे हत्याकांड के बाद अरविंद अपने तीन अबोध बच्चों को घसीटते हुए एक कमरे में ले गया और अंदर से सिटकनी बंद कर ली। सूचना की गंभीरता को भांपते हुए 6 थानों का पुलिस बल, पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार और एसपी ग्रामीण चिराग जैन भारी जाब्ते के साथ मौके पर पहुंच गए। करीब 7 घंटे तक अधिकारी लाउडस्पीकर और खिड़की के जरिए मान-मनौव्वल कर बच्चों की रिहाई व आत्मसमर्पण का प्रयास करते रहे, लेकिन वह पागलों जैसी हरकतें करते हुए लगातार धमकियां देता रहा। इसी बीच सनकी पिता ने कमरे के भीतर ही अपने 4 वर्षीय मासूम बेटे को भी गोली मार दी।

आधी रात ADG की मौजूदगी में कमांडो ऑपरेशन, क्रॉस-फायरिंग में आरोपी का अंत

कमरे के भीतर बच्चे को गोली लगने की भनक लगते ही हालात बेहद नाजुक हो गए। देर रात करीब 11:30 बजे वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा मौके पर पहुंचे और बच्चों की जान बचाने के लिए विशेष कमांडो दस्ते को मैदान में उतारा गया। रात करीब 12:30 बजे कमांडो टीम ने जब कमरे की घेराबंदी कर आखिरी चेतावनी दी, तो अरविंद ने अंदर से अंधाधुंध 6 राउंड गोलियां दाग दीं। जवाबी आत्मरक्षा में सुरक्षाबलों ने भी गोलियां चलाईं, जिसमें अरविंद बुरी तरह जख्मी होकर गिर पड़ा।

दो मासूमों को सुरक्षित निकाला, अस्पताल में बेटे और आरोपी पिता की मौत

फायरिंग रुकते ही कमांडो टीम ने तत्काल दरवाजा तोड़कर भीतर फंसे दो अन्य बच्चों को बाल-बाल बचाते हुए सुरक्षित बाहर निकाला। खून से लथपथ आरोपी अरविंद और गोली से गंभीर रूप से घायल उसके 4 साल के बेटे को तत्काल एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों के भरसक प्रयास के बावजूद दोनों ने दम तोड़ दिया। सुरक्षित निकाले गए दोनों मासूम बच्चे गहरे सदमे में हैं और उन्हें परिजनों की सुपुर्दगी में दिया गया है।

सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में ढेर हुआ आरोपी: एसएसपी

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. अनिल कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी ने अपनी पत्नी और दो पुरोहितों की नृशंस हत्या के बाद अपने ही बच्चों को बंधक बना लिया था। समझाइश के बावजूद उसने अंदर एक बच्चे को गोली मारकर लहूलुहान कर दिया था। मासूमों की जान की हिफाजत को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुलिस व कमांडो दस्ते को त्वरित जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी, जिसमें आरोपी घायल हुआ। अस्पताल में उपचार के दौरान आरोपी अरविंद और उसके बच्चे दोनों की मौत हो गई। दो बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया है। घटनास्थल पर फॉरेंसिक और एसओजी की टीमें साक्ष्य जुटाने में जुटी हैं और इलाके में शांति व्यवस्था कायम है।

 

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