ऑस्ट्रेलिया सरकार ने अपने अस्थायी वीजा नियमों में व्यापक और सख्त बदलावों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इन नए प्रावधानों का सबसे सीधा और बड़ा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर पड़ने वाला है। नए नियमों के अनुसार, अब अधिकांश विदेशी छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान अपने पति/पत्नी (पार्टनर) अथवा बच्चों को डिपेंडेंट वीजा पर अपने साथ ऑस्ट्रेलिया नहीं ला सकेंगे। इस कड़े फैसले से ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई का सपना देख रहे लाखों भारतीय छात्रों को तगड़ा झटका लगने की संभावना है। अमेरिका के बाद भारतीय युवाओं के लिए ऑस्ट्रेलिया उच्च शिक्षा का दूसरा सबसे बड़ा और पसंदीदा केंद्र माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में बिजनेस, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), इंजीनियरिंग तथा हॉस्पिटैलिटी जैसे प्रमुख पाठ्यक्रमों में 1.38 लाख से अधिक भारतीय छात्र अध्ययनरत हैं, जो वहां के कुल अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा हैं।
प्रवासन को नियंत्रित करने और माइग्रेशन संख्या घटाने की बड़ी कवायद
ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क द्वारा घोषित इन कड़े कदमों का केंद्रीय उद्देश्य देश में बेतहाशा बढ़ते अस्थायी प्रवासन (माइग्रेशन) पर प्रभावी अंकुश लगाना है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 तक नेट ओवरसीज माइग्रेशन को घटाकर 2,25,000 के वार्षिक लक्ष्य तक सीमित करने की योजना बनाई है। ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन ने यह सख्त रुख अंतरराष्ट्रीय छात्रों, वर्किंग-हॉलिडे वीजा धारकों और वीजा की निर्धारित अवधि पूरी होने के बावजूद देश में अवैध रूप से टिके रहने वाले प्रवासियों पर शिकंजा कसने के लिए अपनाया है।
पीएचडी शोधार्थियों को राहत, क्षेत्रीय छूट सूची से भारत बाहर
यद्यपि सरकार ने नियमों को बेहद कड़ा किया है, लेकिन इस नीति में कुछ विशेष श्रेणियों को छूट भी प्रदान की गई है। नई व्यवस्था के तहत उच्च स्तरीय शोध कार्यक्रमों (पीएचडी) में पंजीकृत छात्रों को अपने परिवार को साथ रखने की अनुमति पूर्ववत जारी रहेगी। इसके अलावा पैसिफिक और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के छात्रों को भी पारिवारिक वीजा की विशेष सुविधा मिलती रहेगी। चूंकि भारत को इन क्षेत्रीय छूटों के दायरे में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा हासिल करने की योजना बना रहे सामान्य स्नातक या परास्नातक भारतीय छात्रों को अब बिना परिवार के ही वहां रहने का कठिन निर्णय लेना होगा।
कोर्स बदलकर देश में टिके रहने की रणनीति पर भी चलेगा डंडा
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने वीजा नियमों के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि उन अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी जो देश में लंबे समय तक बने रहने के लिए एक ही स्तर के या उससे कम योग्यता वाले पाठ्यक्रमों में बार-बार दाखिला बदलते रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया सरकार के इन नए कड़े दिशानिर्देशों ने वैश्विक शिक्षा जगत और छात्र परामर्श एजेंसियों के बीच हलचल तेज कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में विदेशी शिक्षा के समीकरण काफी हद तक बदल सकते हैं।
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