उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा अभी से चढ़ने लगा है। समाजवादी पार्टी (सपा) के कुनबा बढ़ाने के दावों के बीच सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर जोरदार जुबानी हमला बोला है। बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री प्रोफेसर रामाश्रय कुशवाहा के सपा का दामन थामने के तुरंत बाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक तीखी पोस्ट साझा की। उन्होंने अखिलेश यादव को साल 2022 के विधानसभा चुनावों की याद दिलाते हुए दावा किया कि विपक्ष चाहे जितने भी सामाजिक और राजनीतिक जोड़-तोड़ कर ले, प्रदेश में इस बार भी भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक हैट्रिक जीत तय है।
2022 के चुनावी नतीजों की दिलाई याद, साधा तीखा निशाना
उपमुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में 2022 के विधानसभा चुनाव के सियासी परिदृश्य का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव की रणनीतियों पर चुटकी ली। उन्होंने लिखा कि उस समय भी सपा ने राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) जैसे प्रमुख दलों के साथ गठबंधन किया था। साथ ही कई कद्दावर और वजूद वाले नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कराया था। इसके बावजूद सपा जनता का विश्वास जीतने और बीजेपी को सत्ता से बाहर करने में पूरी तरह नाकाम रही थी। मौर्य के अनुसार, जनता ने उस समय भी विपक्ष के सभी तथाकथित मजबूत समीकरणों को सिरे से खारिज कर दिया था।
‘सपा के पास न विजन है और न ही विश्वसनीय नेतृत्व’
सपा की कार्यशैली पर सीधा प्रहार करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पार्टी के पास भविष्य के लिए न तो कोई स्पष्ट दृष्टिकोण (विजन) है और न ही कोई विश्वसनीय नेतृत्व। आम जनता का भरोसा समाजवादी पार्टी पूरी तरह खो चुकी है, जिसके चलते आगामी चुनावों में भी उनके जातिगत समीकरण और खोखले नारे धरे के धरे रह जाएंगे। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव चाहे जो भी राजनीतिक पैंतरेबाजी आजमा लें, वह बीजेपी के विजय रथ को रोकने में सफल नहीं होंगे और राज्य में तीसरी बार भी पूर्ण बहुमत के साथ ‘कमल’ ही खिलेगा।
कुशवाहा समेत कई नेताओं के सपा प्रवेश के बाद गरमाई सियासत
डिप्टी सीएम का यह तीखा बयान उस समय सामने आया है जब छह बार मंत्री रह चुके बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर रामाश्रय कुशवाहा ने आधिकारिक रूप से समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली। उल्लेखनीय है कि कुशवाहा ने वर्ष 2013 में सपा छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। इसके अतिरिक्त रालोद, बसपा, निषाद पार्टी, अपना दल, एआईएमआईएम और लेखपाल संघ से जुड़े कई क्षेत्रीय व स्थानीय नेताओं ने भी सपा का झंडा थाम लिया है। नेताओं के इस दल-बदल और केशव प्रसाद मौर्य के पलटवार ने राज्य के चुनावी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।
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