Saturday , 12 September 2026

BRICS Summit 2026: ब्रिक्स में शामिल होने को छटपटा रहा पाकिस्तान, चीन-रूस के समर्थन के बाद भी भारत की ‘ना’ बनी सबसे बड़ी दीवार

नई दिल्ली भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के बीच समूह में शामिल होने की पाकिस्तानी हसरतों को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा है। आर्थिक तंगहाली से जूझ रहा पाकिस्तान साल 2023 से ही इस प्रभावशाली वैश्विक मंच का हिस्सा बनने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। बीजिंग और मॉस्को से हरी झंडी मिलने के बावजूद नई दिल्ली के कड़े रुख के कारण इस्लामाबाद का ब्रिक्स में प्रवेश का सपना अब तक अधूरा ही बना हुआ है।

कंगाली से उबरने के लिए ब्रिक्स का सहारा ढूंढ रहा इस्लामाबाद ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुए इस मंच में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई के जुड़ने के बाद इसका भू-राजनीतिक कद काफी बढ़ा है। मौजूदा समय में लगभग 29 देश इस समूह में एंट्री पाने की कतार में खड़े हैं, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है। 3.70 प्रतिशत की सुस्त जीडीपी विकास दर और गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की कड़ी शर्तों से बचने के लिए ब्रिक्स को एक मुफीद विकल्प मान रही है।

न्यू डेवलपमेंट बैंक में 580 मिलियन डॉलर का दांव ग्लोबल साउथ के देशों के बीच ब्रिक्स की बढ़ती साख को भुनाने के लिए पाकिस्तान ने रणनीतिक दांव चलते हुए ब्रिक्स के ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ (NDB) में करीब 580 मिलियन डॉलर की हिस्सेदारी खरीदी है। निक्केई एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का मुख्य मकसद फंडिंग के नए और लचीले रास्ते तैयार करना है ताकि वह पश्चिमी वित्तीय संस्थानों पर अपनी निर्भरता घटा सके। वर्तमान में विस्तारित ब्रिक्स दुनिया की 49 फीसदी आबादी और क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर करीब 40 फीसदी वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है, जहां भारत का निर्यात भी बढ़कर 95.7 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है।

चीन और रूस की पैरवी के बाद भी ‘सर्वसम्मति’ का नियम बना ढाल पाकिस्तान ने नवंबर 2023 में आधिकारिक तौर पर सदस्यता का औपचारिक आवेदन दिया था। रूस में पाकिस्तान के राजदूत मुहम्मद खालिद जमाली ने रूसी समाचार एजेंसी तास (TASS) को दिए बयान में पुष्टि की थी कि वे सदस्य देशों से अपने पक्ष में लॉबिंग कर रहे हैं। बीजिंग और मॉस्को का समर्थन जुटाने के बाद भी इस्लामाबाद की राह आसान नहीं हो सकी। दरअसल, ब्रिक्स के नियमों के तहत किसी भी नए देश को शामिल करने के लिए सभी पुराने सदस्यों की पूर्ण सर्वसम्मति (Consensus) अनिवार्य होती है। आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को लगातार घेरने वाले भारत ने इस नियम के तहत अपनी स्पष्ट असहमति दर्ज कराई है, जिससे पाकिस्तान के लिए ब्रिक्स के दरवाजे मजबूती से बंद हैं।

 

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