Friday , 23 October 2026

दिल्ली कार ब्लास्ट: लाल मंदिर था पहला निशाना, भारी भीड़ देखकर लाल किले की ओर मोड़ी थी गाड़ी; चार्जशीट में NIA के कई सनसनीखेज खुलासे

नई दिल्ली ब्यूरो। देश की राजधानी में लाल किले के पास हुए भीषण वाहन बम धमाके की जांच में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। अदालत में दाखिल आरोपपत्र के अनुसार, आत्मघाती हमलावर उमर-उन-नबी का पहला लक्ष्य लाल किला नहीं, बल्कि चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक लाल मंदिर था। वहां भारी ट्रैफिक और सुरक्षा बलों की सख्त मुस्तैदी को देखकर वह घबरा गया और अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए गाड़ी को लाल किले के गेट नंबर चार की तरफ मोड़ दिया।

सीसीटीवी में कैद हुई 13 मिनट की खौफनाक साजिश एनआईए की तफ्तीश में सामने आए सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, 10 नवंबर की शाम ठीक 6:37 बजे उमर विस्फोटक लदी कार को लाल मंदिर के पास खड़ा करने की फिराक में था। जब उसे वहां अनुकूल परिस्थितियां नहीं मिलीं, तो उसने फौरन यू-टर्न लिया। इसके ठीक 13 मिनट बाद यानी शाम 6:50 बजे उसने लाल किले के गेट नंबर चार के समीप जोरदार धमाका कर दिया। एजेंसी ने इसे राष्ट्रीय राजधानी में हुआ पहला व्हीकल-बॉर्न आईईडी (कार आधारित आईईडी) हमला करार दिया है।

जूते की एड़ी में छिपा रखा था डेटोनेटर का रिमोट जांच एजेंसी के आरोपपत्र के मुताबिक, विस्फोटक को उड़ाने के लिए उमर ने बेहद शातिराना तकनीक अपनाई थी। उसने आईईडी के रिमोट कमांड सिस्टम को अपने जूते के भीतर छिपा रखा था। धमाके के बाद घटनास्थल से मिले एक जूते की एड़ी से धातु का टुकड़ा जुड़ा पाया गया। फोरेंसिक जांच में इसमें खतरनाक टीएटीपी, पोटैशियम और अमोनियम नाइट्रेट के अंश मिले। वहीं, क्षतिग्रस्त कार से बरामद मानव अवशेषों के डीएनए का मिलान उमर के माता-पिता से कराकर उसकी पहचान की पुष्टि की गई।

विस्फोटक स्थिर रखने को कमरे को रखता था चिल्ड जांच में खुलासा हुआ है कि टीएटीपी जैसे बेहद संवेदनशील और अस्थिर रासायनिक विस्फोटक को फटने से बचाने के लिए उमर अपने कमरे के तापमान को असामान्य रूप से ठंडा रखता था। विस्फोटक को सुरक्षित और स्थिर रखने के लिए उसने खास तरह के वॉटर बैग भी खरीदे थे। चश्मदीदों व गवाहों ने बताया कि वह इस विस्फोटक मिश्रण को सुरक्षित रखने के लिए उसमें लगातार पानी डालता रहता था, जिसके चलते कमरे से अजीबोगरीब दुर्गंध भी उठती थी।

पॉलीथिन में मूत्र इकट्ठा कर यूरिया निकालने का था शक वारदात से पहले फरार रहने के दौरान उमर ने हरियाणा के नूंह स्थित एक मकान में पनाह ली थी। वहां उसके संदिग्ध आचरण से लोग हैरान थे। मकान मालिक की एक महिला सदस्य के बयान के मुताबिक, उमर कभी शौचालय का इस्तेमाल करने बाहर नहीं निकलता था, बल्कि कमरे के भीतर ही पॉलीथिन में अपना मूत्र जमा करता था। कमरे में तेज सड़ांध फैलने की यही वजह थी। जांच में मिले कुछ दस्तावेजों से यह आशंका भी मजबूत हुई कि वह यूरिया नाइट्रेट विस्फोटक तैयार करने के लिए मूत्र से यूरिया निकालने की आतंकी तकनीक पर काम कर रहा था।

11 निर्दोषों की जान गई, 29 घायल और भारी तबाही इस खौफनाक धमाके में 11 मासूमों की जान चली गई, जबकि 29 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अधिकांश मौतें ‘हाई-इंटेंसिटी ब्लास्ट वेव इफेक्ट’ यानी भीषण दबाव तरंगों के कारण हुईं। इसके अतिरिक्त आसपास के भवनों और ढांचों को 17.7 लाख रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचा।

अलकायदा के ‘लोन मुजाहिद’ साहित्य से था प्रेरित एनआईए को छानबीन के दौरान उमर और उसके नेटवर्क से भारी मात्रा में जिहादी सामग्री मिली है। इसमें ‘अलकायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला’ की पत्रिका ‘इंस्पायर’ से जुड़ी ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक’ भी बरामद की गई। इस किताब में रिमोट आईईडी बनाने, घातक हथियारों के इस्तेमाल, आगजनी और गाड़ियों से हमला करने के तरीके दर्ज थे। वहीं, साजिश को अंजाम देने से ठीक तीन दिन पहले 7 नवंबर को उमर ने नूंह की एक स्थानीय दुकान से नकदी देकर एक नई टी-शर्ट, वाइन कलर की शर्ट और हरे रंग की कार्गो पैंट खरीदी थी।

 

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