Monday , 7 September 2026

बसपा में बड़ा फेरबदल: आकाश आनंद किनारे, छोटे भाई ईशान को 15 राज्यों की कमान; ‘समर्थक’ लिखकर आकाश ने बढ़ाई सियासी हलचल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर बड़ा सियासी बदलाव सामने आया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने संगठन में नई बिसात बिछाते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद (ईशू) को बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं दूसरी ओर, संगठन से बाहर चल रहे आकाश आनंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना बायो एक बार फिर बदलकर सियासी गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी है। उन्होंने अब अपने परिचय में खुद को सिर्फ ‘BSP समर्थक’ बताया है।

ईशान आनंद बने मुख्य सेक्टर प्रभारी, 15 राज्यों के कामकाज की करेंगे समीक्षा

बसपा के नए संगठनात्मक ढांचे में ईशान आनंद की मजबूत एंट्री हुई है। पार्टी ने उन्हें मुख्य सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी दी है। इसके तहत ईशान करीब 15 राज्यों में पार्टी संगठन, कामकाज और जमीनी गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। इन राज्यों की समीक्षा पूरी करने के बाद वह अपनी रिपोर्ट सीधे अपने पिता और बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को सौंपेंगे। लंदन से कानून की पढ़ाई पूरी कर चुके ईशान की इस नई भूमिका को 2027 के चुनाव से पहले संगठन में उनकी बढ़ती सक्रियता और नए युवा चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।

आकाश आनंद का बायो फिर बदला, पहले ‘कार्यकर्ता’ अब बने ‘समर्थक’

पार्टी के संगठनात्मक फेरबदल में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जारी नई जिम्मेदारियों में आकाश आनंद का नाम शामिल नहीं है। पद से हटाए जाने के बाद आकाश ने सोशल मीडिया पर ‘नेशनल कोऑर्डिनेटर’ हटाकर खुद को ‘BSP कार्यकर्ता’ लिखा था। अब उन्होंने इसे भी बदलते हुए केवल ‘BSP समर्थक’ कर दिया है। पद से कार्यकर्ता और अब केवल समर्थक बनने के इस सफर को राजनीतिक विश्लेषक पार्टी में उनकी घटती भूमिका और अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं।

सियासी भविष्य पर उठ रहे सवाल, क्या पार्टी से बढ़ रही दूरी?

भले ही आकाश आनंद ने पार्टी से औपचारिक इस्तीफा नहीं दिया है और न ही संगठन छोड़ने का कोई आधिकारिक ऐलान किया है, लेकिन सोशल मीडिया प्रोफाइल में लगातार हो रहे बदलाव और छोटे भाई को अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके सियासी भविष्य को लेकर कयास तेज हो गए हैं। पार्टी की हालिया बैठकों और संगठनात्मक निर्णयों से यह साफ संदेश जा रहा है कि मायावती फिलहाल संगठन के संचालन में ईशान आनंद पर अधिक भरोसा जता रही हैं।

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