Monday , 7 September 2026

15 साल में चौथा बड़ा हादसा! सत्य निकेतन PG की दरारों से लेकर अवैध निर्माण तक, कौन जिम्मेदार?

सत्य निकेतन में 5 मंजिला PG इमारत ढही: मलबे में दबकर 6 छात्रों की मौत, 11 बचाए गए 

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के साउथ कैंपस से सटे रिहायशी इलाके सत्य निकेतन में एक दर्दनाक हादसा पेश आया है। यहां छात्रों से भरी एक 5 मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस भयावह हादसे में अब तक 6 छात्रों की मलबे में दबने से मौत हो चुकी है, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। महज 55 वर्ग गज के छोटे से प्लॉट पर खड़ी यह इमारत 1990 के दशक के अंत में बनी थी, जिसे बाद में बहुमंजिला पीजी हॉस्टल में तब्दील कर दिया गया था। सत्य निकेतन इलाके में पिछले 15 वर्षों में इमारत ढहने की यह चौथी घटना है, जिसने राजधानी में चल रहे अनधिकृत पीजी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है।

एनडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, स्निफर डॉग्स की मदद से जिंदगी की तलाश हादसे के बाद से ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और दमकल विभाग की टीमें युद्धस्तर पर बचाव कार्य में जुटी हैं। मलबे के भारी ढेर में फंसे लोगों का पता लगाने के लिए एनडीआरएफ के विशेष रूप से प्रशिक्षित खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग्स) की मदद ली जा रही है। राहतकर्मी आधुनिक कटर, हाइड्रोलिक जैक और सेंसर उपकरणों के जरिए मलबे को हटाकर फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

हादसे के बाद सिस्टम से पूछे जा रहे हैं ये 5 बड़े सवाल:

  • 1. बिना परमिशन कैसे खड़े हो गए अतिरिक्त फ्लोर? स्थानीय नागरिकों के अनुसार, नगर निगम (MCD) के रिकॉर्ड में यह संपत्ति P-14 के तौर पर चिह्नित थी, जो बेसमेंट और भूतल के अलावा 4 मंजिला तक सीमित थी। आरोप है कि करीब दो साल पहले बिना किसी कानूनी मंजूरी और एनओसी के इसके ऊपर दो अतिरिक्त मंजिलें और तान दी गईं। इतने घनी आबादी वाले इलाके में बिना मंजूरी दो फ्लोर का निर्माण होता रहा, लेकिन निगम के निगरानी तंत्र ने आंखें क्यों मूंदे रखीं?

  • 2. बिना स्ट्रक्चरल असेसमेंट बेसमेंट में क्यों हो रही थी तोड़फोड़? हादसे से करीब एक सप्ताह पहले से बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर बड़े स्तर पर मरम्मत और तोड़फोड़ का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इमारत की दीवारों में पहले से सीलन, जलभराव और गहरी दरारें दिख रही थीं। इसके बावजूद क्या काम शुरू कराने से पहले किसी अधिकृत स्ट्रक्चरल इंजीनियर से जांच कराई गई थी? नींव और पिलर से छेड़छाड़ करना जानलेवा साबित हुआ।

  • 3. सुरक्षा मानकों और इमरजेंसी एग्जिट की अनदेखी क्यों? बिल्डिंग में सुरक्षा जांच (Fire & Safety Audit) का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। साथ ही किसी आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई इमरजेंसी एग्जिट या दूसरा रास्ता नहीं बनाया गया था। ‘हॉस्टल डेज’ नामक कंपनी द्वारा लीज पर संचालित इस पीजी में छात्रों से प्रति बेड 14,000 से 18,000 रुपये तक भारी भरकम किराया वसूला जा रहा था, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नदारद थे।

  • 4. 15 सालों में 4 हादसे, फिर भी सबक क्यों नहीं? 299 मकानों वाली इस पुरानी पुनर्वास कॉलोनी में 15 सालों के भीतर चौथी बार इमारत गिरने की घटना सामने आई है। वर्ष 2022 में भी यहां हुए एक हादसे में 2 लोगों की जान गई थी। बार-बार जानलेवा हादसे होने के बावजूद दिल्ली भर में छात्रों के ऐसे रिहायशी क्लस्टर्स का नियमित सेफ्टी ऑडिट कराने में प्रशासन क्यों नाकाम रहा?

  • 5. साफ दिखती दरारों पर भी सोता क्यों रहा नगर निगम? स्थानीय निवासियों का कहना है कि इमारत की हालत काफी समय से खस्ता थी और दरारें बाहर से साफ नजर आ रही थीं। इसके विपरीत एमसीडी का दावा है कि उसके पास कोई लिखित शिकायत नहीं पहुंची थी। सवाल उठता है कि क्या निगम और प्रवर्तन एजेंसियों का काम केवल लिखित शिकायतों के इंतजार तक सीमित है, या वे हादसों के बाद ही नींद से जागते हैं?

मालिकों और लीज धारक कंपनी के खिलाफ गहन जांच शुरू पुलिस जांच के अनुसार, यह विवादित प्रॉपर्टी गुरुग्राम के निवासी तीन भाइयों—हरि राम बंसल, आनंद बंसल और आजाद बंसल की है। इन्होंने पिछले साल ही यह इमारत एक निजी पीजी ऑपरेटर कंपनी को लीज पर दी थी। पुलिस अब लीज एग्रीमेंट, व्यावसायिक उपयोग की परमिशन, लोड-बेयरिंग पिलर्स के साथ की गई छेड़छाड़ और स्ट्रक्चरल मानकों के उल्लंघन की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई कर रही है।

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