
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआईआर) के बाद जारी मसौदा (ड्राफ्ट) मतदाता सूची ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इस पुनरीक्षण के बाद राजधानी की मतदाता सूची से लगभग 47.5 लाख यानी करीब एक-तिहाई मतदाताओं के नाम बाहर हो गए हैं। इस बड़े पैमाने पर हुई कटौती से सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चिंताएं बढ़ गई हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले विधानसभा क्षेत्रों में तुगलकाबाद, बुराड़ी, ओखला, बदरपुर, महरौली, देवली और रिठाला शामिल हैं, जहां अनधिकृत कॉलोनियां, कच्ची बस्तियां और किराएदारों की तादाद बहुत अधिक है। इस कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी ने तीखा विरोध जताते हुए आरोप लगाया है कि गरीब और प्रवासी कामगारों को साजिश के तहत मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
इन विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज हुई मतदाताओं की सबसे बड़ी कटौती
आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि कटौती का सबसे गंभीर असर घनी आबादी और कामगार बस्तियों वाले क्षेत्रों में देखने को मिला है। बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 1,67,885 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं। वहीं, ओखला में 1,63,829, बदरपुर में 1,46,673 और रिठाला में 1,06,512 मतदाताओं के नाम कट गए हैं। इसके अतिरिक्त तुगलकाबाद में 92,033, देवली में 94,726 और महरौली में 85,156 वोटरों के नाम बाहर किए गए हैं। इन सभी इलाकों का सामाजिक ताना-बाना ऐसा है जहां किराए के मकानों में रहने वाले लोग, पूर्वांचली और अन्य राज्यों से आए प्रवासी मजदूर, औद्योगिक श्रमिक और ओखला जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं।
किराएदार आबादी और पते का बार-बार बदलना बनी मुख्य बाधा
एसआईआईआर से पहले कराई गई मैपिंग के दौरान ही यह आशंका जताई जा रही थी कि प्रवासियों की बड़ी आबादी सत्यापन से छूट सकती है। आंकड़ों के अनुसार, किराए पर रहने वाले मतदाताओं के बार-बार घर बदलने के कारण कुल 50 फीसदी से भी कम लोगों की सही मैपिंग संभव हो पाई थी। साल 2011 की जनगणना के रिकॉर्ड बताते हैं कि दिल्ली में 9.41 लाख से अधिक परिवार किराए के घरों में रहते हैं, जो कुल परिवारों का लगभग 28.2 प्रतिशत है। आजीविका, रोजगार, कारखानों में काम और बेहतर रिहायश की तलाश में यह वर्ग समय-समय पर पते बदलता रहता है। इसके चलते निर्वाचन तंत्र के लिए इनका नाम मतदाता सूची में स्थायी रूप से बनाए रखना और भौतिक सत्यापन करना हमेशा एक जटिल चुनौती रहा है।
‘प्रवासियों के मताधिकार छीने जा रहे’: आप विधायक संजीव झा का कड़ा ऐतराज
वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि केवल बुराड़ी विधानसभा में ही 39.4 प्रतिशत वोटरों को ‘शिफ्टेड’ (अन्यत्र स्थानांतरित) दिखाकर सूची से बाहर कर दिया गया है। संजीव झा ने स्पष्ट किया कि बुराड़ी में कुल मतदाताओं की संख्या 4,26,451 थी, जो अब सिमटकर मात्र 2,52,189 रह गई है। उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि क्या मेहनत-मजदूरी करने वाले प्रवासी नागरिकों के बुनियादी लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों पर इस तरह बुलडोजर चलाया जाएगा? उन्होंने चुनाव आयोग से इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की है।
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