Tuesday , 25 August 2026

नेपाल से भारत में सोने की तस्करी का महाजाल: 3 महीने में खपाया 100 किलो गोल्ड, कन्नौज में पकड़े गए तस्करों ने खोले बड़े राज

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में 10 किलोग्राम अवैध सोने के साथ दबोचे गए दो अंतरराष्ट्रीय तस्करों से पूछताछ में सीमा पार से चल रहे तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह पिछले महज तीन महीनों के भीतर नेपाल के रास्ते भारत में करीब 100 किलो सोना पहुंचा चुका था। इस सोने को छह अलग-अलग खेपों में सड़क मार्ग के जरिए देश के भीतर लाया गया और उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों के सराफा बाजारों में सप्लाई किया गया। गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिराना थी, जिसमें नई तकनीक, फर्जी सिम कार्ड, सुरक्षित डिलीवरी प्वाइंट और लाखों रुपये के कमीशन का इस्तेमाल किया जा रहा था।

हर खेप के लिए नया सिम कार्ड और केवल WhatsApp कॉलिंग का इस्तेमाल कन्नौज में गिरफ्तार महराजगंज निवासी संदीप जायसवाल और नेपाल के सरोज पंथ ने पूछताछ में नेटवर्क के तौर-तरीकों का खुलासा किया है। गिरोह के हैंडलर सुरक्षा एजेंसियों की रडार से बचने के लिए हर नई डिलीवरी पर कैरियर को एक नया और पहले से एक्टिवेटेड फर्जी सिम कार्ड देते थे। इन नंबरों का उपयोग केवल उसी डिलीवरी से जुड़ी बातचीत के लिए होता था। बातचीत के लिए सामान्य फोन कॉल के बजाय केवल इंटरनेट आधारित WhatsApp कॉल का इस्तेमाल किया जाता था। दिल्ली और यूपी में बैठे रिसीवर्स को तय किए गए कोड और लोकेशन पर डिलीवरी दी जाती थी।

कैरियर को हर चक्कर का 2 लाख तक कमीशन, खाड़ी देशों से नेपाल पहुंचता था सोना शुरुआती जांच में सामने आया है कि खाड़ी देशों (गल्फ देशों) से सोने की खेप पहले वैध-अवैध तरीकों से नेपाल मंगवाई जाती थी। इसके बाद नेपाल से सड़क मार्ग के जरिए भारतीय सीमा में इसे दाखिल कराया जाता था। तस्करी में ‘कैरियर’ (माल ढोने वाले) को नेपाल से भारत की एक सफल यात्रा के बदले 1 से 2 लाख रुपये तक का मोटा कमीशन दिया जाता था। भारत में डिलीवरी पूरी होने के बाद सोने की बिक्री से प्राप्त हवाला या नकदी रकम को सुरक्षित चैनलों के जरिए वापस नेपाल स्थित सप्लायर्स तक पहुंचा दिया जाता था।

4 घंटे के पास पर गई कार 9 घंटे बाद लौटी, ऐसे एजेंसियों के रडार पर आया वाहन तस्करी के इस पूरे ऑपरेशन में एक ब्रेजा कार की संदिग्ध आवाजाही ने कस्टम और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। यह वाहन 21 अगस्त को सुबह करीब 9:36 बजे महेशपुर सीमा चौकी से नेपाल में दाखिल हुआ था। गाड़ी के लिए केवल चार घंटे की अवधि का बॉर्डर पास जारी कराया गया था, लेकिन वाहन तय समय से काफी देर बाद यानी करीब साढ़े नौ घंटे बाद शाम सात बजे भारतीय सीमा में लौटा। इसी संदिग्ध देरी के आधार पर निगरानी बढ़ाई गई और आगे चलकर कन्नौज में 10 किलो सोने के साथ दोनों को दबोच लिया गया।

बड़े सर्राफा कारोबारियों से जुड़े तार, कस्टम विभाग की जांच तेज कस्टम और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) अब दोनों आरोपियों के मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड्स और वित्तीय लेन-देन की गहनता से पड़ताल कर रहे हैं। जांच अधिकारियों को अंदेशा है कि इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के तार दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई बड़े सर्राफा व्यापारियों से जुड़े हुए हैं। फिलहाल एजेंसियां नेपाल में बैठे मुख्य सप्लायर और भारत में सोने के अंतिम रिसीवर्स की पहचान कर पूरे गिरोह को बेनकाब करने में जुटी हैं।

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