Sunday , 26 July 2026

मैनपुरी के जातीय संघर्ष में 24 लोगों की सामूहिक हत्या में दो की मौत की सजा उम्रकैद में तब्दील, जानिए पूरा मामला

–पुख्ता सबूत न होने पर एक आरोपित बरी

प्रयागराज । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मैनपुरी में नवम्बर 1981 में जातीय संघर्ष में 24 लोगों की सामूहिक हत्या के मामले में जीवित बचे आरोपितों राम सेवक व कप्तान सिंह को सत्र न्यायालय से मिली सजा को सही करार दिया है। लेकिन उसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। साथ ही आरोपित रामपाल सिंह की मौत की सजा सबूतों के अभाव के कारण रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया है। मामले के कई आरोपितों की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो चुकी है और एक फरार है।

कोर्ट ने कहा कि 44 साल तक चले लम्बे मुकदमे के बाद मौत की सजा से न्याय का उद्देश्य पूरा नहीं होगा इसलिए दोनों आरोपितों की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील की जाती है। हालांकि एक लाख रुपये जुर्माने की सजा बरकरार रखी गई है। कोर्ट ने आरोपियों को बची सजा भुगतने का आदेश दिया है।

यह निर्णय न्यायमूर्ति एसडी सिंह एवं न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की खंडपीठ ने सजा के खिलाफ रामपाल सिंह की अपील मंजूर करते हुए दिया है। साथ ही अन्य दो आरोपियों राम सेवक व कप्तान सिंह की सजा के खिलाफ अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली है।

मैनपुरी की अपर सत्र अदालत/विशेष अदालत डकैती प्रभावित क्षेत्र ने तीनों अपीलार्थियों को विभिन्न धाराओं में मौत की सजा व जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जातीय हिंसा की इस घटना में 24 लोगों की मौत व कई घायल हुए थे। मरने वालों में एक ही परिवार के छह लोग शामिल थे। आपराधिक षड्यंत्र साबित न कर पाने तथा मारते समय किसी द्वारा न देखें जाने का लाभ एक आरोपी को मिला और बरी कर दिया गया। लेकिन अन्य दोनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले, जिससे कोर्ट ने सजा बरकरार रखी लेकिन मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दी।

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