Monday , 24 August 2026

यूपीएसएसएससी परीक्षा में सेंधमारी: ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल कराने वाले हाईटेक सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, 10 लाख में तय हुआ था सौदा

उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता पर सेंध लगाने वाले नकल माफियाओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (STF) ने एक और बड़ा एक्शन लिया है। लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की स्नातक स्तरीय मुख्य परीक्षा के दौरान एसटीएफ ने एक हाईटेक नकलची को रंगे हाथों दबोचा है जो बेहद शातिर तरीके से ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए परीक्षा हॉल के अंदर नकल कर रहा था। इस पूरे मामले में प्रारंभिक जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस परीक्षा को पास कराने और नकल मुहैया कराने के लिए अभ्यर्थी के साथ पूरे 10 लाख रुपये का सौदा तय हुआ था।

महानगर के परीक्षा केंद्र पर एसटीएफ का ताबड़तोड़ एक्शन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की इस महत्वपूर्ण परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष, नकलविहीन और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए एसटीएफ की विभिन्न टीमों को पहले से ही मैदान में सक्रिय किया गया था। इसी सतर्कता के तहत एसटीएफ को पुख्ता खुफिया जानकारी मिली कि राजधानी लखनऊ के महानगर क्षेत्र स्थित दयानंद कन्या इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर परीक्षा प्रणाली में धांधली करने की फिराक में है। सूचना मिलते ही एसटीएफ की टीम ने स्थानीय पुलिस और परीक्षा केंद्र के प्रशासन के साथ मिलकर त्वरित कार्रवाई की और परीक्षा कक्ष से ही संदिग्ध अभ्यर्थी को धर दबोचा।

खास बनियान और ब्लूटूथ डिवाइस का हाईटेक इस्तेमाल

जांच एजेंसियों द्वारा की गई पूछताछ में जो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने नकल माफियाओं के शातिर तौर-तरीकों की पोल खोल दी है। एसटीएफ के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी अभ्यर्थी की पहचान प्रयागराज जिले के रहने वाले बृजेश कुमार यादव के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उसके पास से एक अत्याधुनिक ब्लूटूथ डिवाइस, एक मोबाइल फोन, प्रवेश पत्र, आधार कार्ड, ओएमआर शीट और प्रश्नपत्र बरामद किया गया है। आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया कि प्रयागराज के ही एक अन्य व्यक्ति ने उसे यह ब्लूटूथ डिवाइस उपलब्ध कराई थी और इसे छिपाने के लिए एक विशेष जेब वाली खास बनियान दी गई थी ताकि किसी भी परीक्षा निरीक्षक या अधिकारी को उस पर शक न हो सके। योजना के तहत परीक्षा हॉल के बाहर बैठे अन्य शातिर लोग ब्लूटूथ के माध्यम से प्रश्नों के सही उत्तर बोलकर उसे बता रहे थे।

10 लाख रुपये में तय हुआ था सौदा और दर्ज हुआ मुकदमा

एसटीएफ की शुरुआती जांच में यह बात भी पुख्ता तौर पर सामने आई है कि इस कथित नकल नेटवर्क के संचालन के लिए अभ्यर्थी और गिरोह के बीच लगभग 10 लाख रुपये में पैसों का लेनदेन तय हुआ था। एसटीएफ को इस बात की गहरी आशंका है कि यह गिरोह केवल इसी परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में आयोजित होने वाली अन्य विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सक्रिय रूप से सेंधमारी करता रहा है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी अभ्यर्थी बृजेश कुमार यादव के खिलाफ राजधानी के महानगर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 के तहत सख्त मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल, एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें इस हाईटेक नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों और मास्टरमाइंडों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं।

 

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