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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन योगी आदित्यनाथ सरकार ने सदन में 59,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट (सप्लीमेंट्री बजट) पेश किया। आगामी चुनावों और राज्य के विकास कार्यों को ध्यान में रखते हुए इस बजट के जरिए प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को गति देने का खाका खींचा गया है। साथ ही, मानदेय वृद्धि की आस लगाए बैठे आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, रसोइयों और ग्राम चौकीदारों के लिए भी बजट में विशेष वित्तीय प्रावधान किए जाने की तैयारी है।
विकास और गरीब कल्याण को मिलेगी रफ्तार
बजट पेश होने से पहले उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह अनुपूरक बजट प्रदेश के चौमुखी विकास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा, “हम अनुदान मांगों पर चर्चा करेंगे और इसके माध्यम से गरीब कल्याण योजनाओं को और अधिक मजबूत किया जाएगा। उत्तर प्रदेश को देश का नंबर एक राज्य बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।”
वहीं, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि सप्लीमेंट्री बजट का मुख्य उद्देश्य वर्तमान में चल रही जनहित की योजनाओं को समय पर पूरा करना और आवश्यकतानुसार नए बुनियादी कार्यों को धनराशि उपलब्ध कराना है। मंत्री जयवीर सिंह और जेपीएस राठौर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। वह हताश और निराश होकर रचनात्मक चर्चा से भाग रहा है।
“चंदा चोर, चढ़ावा चोर और बजट चोर है सरकार”: समाजवादी पार्टी का तीखा हमला
दूसरी ओर, अनुपूरक बजट पेश होने से पहले ही समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने सरकार की नियत पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह सरकार हर बार अनुपूरक बजट लाती है, लेकिन बजट का 30 फीसदी हिस्सा भी खर्च नहीं कर पाती। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार बजट लाया जाता है।”
पेपर लीक और राम मंदिर मुद्दे पर सदन में हंगामा
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने आक्रामक रुख अपना लिया। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए पेपर लीक मामलों और राम मंदिर के संदर्भ में लगाए गए चंदा गबन के आरोपों पर तुरंत चर्चा कराने की मांग की। विपक्षी सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन में काफी देर तक गहमागहमी बनी रही।
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