Monday , 3 August 2026

संसद में गूंजा ‘राम मंदिर दान चोरी’ का मुद्दा: सपा सांसदों ने बनाई सांकेतिक दान पेटी, डिंपल यादव का सरकार पर तीखा हमला- ‘पूछा आखिर कहां गया चंदे का पैसा?’

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति से लेकर दिल्ली के संसद परिसर तक राम मंदिर दान चोरी और कथित भूमि घोटाले का मुद्दा गरमाया हुआ है। सोमवार को संसद परिसर में समाजवादी पार्टी (सपा) समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने इस मुद्दे पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सपा सांसद जया बच्चन ने सांकेतिक ‘दान पेटी’ में पैसे डालकर अपना विरोध जताया। इस दान पेटी पर ‘चंदा चोरी’ के पोस्टर लगे हुए थे।

“जनता निराश है, आखिरकार कहाँ गया रामलला के चरणों में अर्पित चंदा?”

विरोध प्रदर्शन के दौरान सपा की वरिष्ठ सांसद डिंपल यादव ने सरकार और मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन पर तीखे सवाल दागे। डिंपल यादव ने कहा कि देश की जनता ने बड़ी निष्ठा और श्रद्धा भाव से प्रभु श्री राम के चरणों में जो धातुएं और चंदे का पैसा अर्पित किया था, वह आखिरकार कहाँ गया?

डिंपल यादव का बड़ा बयान:

“लोग सरकार से पूरी तरह निराश और दुखी हैं। जिस प्रकार से चंदा चोरी की गई और जमीनों में घोटाले किए गए, उसकी सीधी जिम्मेदारी सरकार की है। आज तक इस मामले में किसी बड़े नाम पर एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं हुई? सरकार में निराशा की भावना साफ दिख रही है।”

FIR दर्ज कराकर मुद्दे से भटका रही है सरकार: डिंपल यादव

सपा सांसद ने केंद्र और राज्य सरकार पर मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव और फैजाबाद (अयोध्या) से सपा सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ ‘सनातन धर्म के अपमान’ के नाम पर दर्ज कराई गई एफआईआर केवल विपक्ष की आवाज दबाने और ध्यान भटकाने की साजिश है।

डिंपल यादव ने दावा किया कि सरकार जनता के बढ़ते जनाक्रोश और असंतोष का सामना करने में असमर्थ है। इसलिए ‘राम जन्मभूमि भूमि घोटाले’ और ‘दान चोरी विवाद’ से मीडिया और जनता का ध्यान हटाने के लिए विपक्ष के नेताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं।

अयोध्या से लेकर दिल्ली तक गरमाई सियासत

संसद परिसर से लेकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र तक, विपक्ष ‘राम मंदिर दान चोरी’ और ‘जमीन घोटाले’ के दावों को लेकर सरकार को चौतरफा घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। सपा नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे को तब तक उठाते रहेंगे जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती।

 

 

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