Saturday , 25 July 2026

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला: भारत समेत 17 देशों पर नया ‘टैरिफ बम’, जानिए आपकी जेब और व्यापार पर क्या पड़ेगा असर

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर एक बार फिर बड़ा फैसला लेते हुए भारत समेत दुनिया के 17 देशों को बड़ा झटका दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात पर नकेल कसने के लिए विभिन्न देशों से आने वाले सामानों पर 10% से लेकर 12.5% तक का अतिरिक्त आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) थमा दिया है। इस नए आदेश के तहत भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामान को 10 फीसदी वाली दर की श्रेणी में रखा गया है।

USTR ने धारा 301 के तहत की बड़ी कार्रवाई

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का इस्तेमाल करते हुए कुल 60 वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ इस कड़ी कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा की है। यह नया टैरिफ ढांचा 24 जुलाई 2026 से पूरे अमेरिका में प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है।

आखिर अमेरिका ने क्यों उठाया यह कड़ा कदम?

अमेरिकी प्रशासन का सीधा आरोप है कि जिन देशों पर यह टैरिफ लगाया गया है, वहां सामानों के निर्माण में जबरन मजदूरी कराई जाती है। USTR जैमीसन ग्रीर ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि अमेरिका लगभग 100 सालों से बंधुआ या जबरन श्रम से तैयार वस्तुओं के आयात पर सख्त पाबंदी लगाता आया है। अब वक्त आ गया है कि अमेरिका के सभी वैश्विक व्यापारिक साझेदार भी इस दिशा में ठोस रुख अपनाएं और मानव अधिकारों से जुड़े इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

भारत पर लगना था 12.5% टैरिफ, यूं मिली 2.5% की राहत

शुरुआती योजना के मुताबिक अमेरिका भारत को बेहद ‘उच्च जोखिम’ वाली सूची में डालकर 12.5% का भारी-भरकम टैरिफ लगाने की तैयारी में था। हालांकि, भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 14 जून को अपनी ‘विदेश व्यापार नीति’ (Foreign Trade Policy) में बड़ा बदलाव किया और जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात-निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी। श्रम मानकों पर दोनों देशों के बीच हुई सकारात्मक बातचीत और भारत के इस त्वरित कदम के बाद वॉशिंगटन ने भारत का शुल्क घटाकर 10% कर दिया। इस 10 प्रतिशत वाले स्लैब में भारत के साथ ब्रिटेन, कनाडा, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे 17 प्रमुख देश शामिल हैं।

कानूनी अड़चनों के बाद ट्रंप प्रशासन का नया दांव

यह नया फरमान ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाया गया 10% का अस्थायी वैश्विक टैरिफ अपनी 150 दिनों की तय सीमा पूरी कर रहा था। दरअसल, इसी साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के ‘पारस्परिक शुल्क’ (Reciprocal Tariffs) को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने आपातकालीन प्रावधानों का सहारा लेकर 10% का अंतरिम शुल्क बरकरार रखा और USTR के माध्यम से धारा 301 के तहत नई जांच प्रक्रिया शुरू कर दी, जो अब इस नए आदेश के रूप में सामने आई है।

भारत ने जताई कड़ी आपत्ति, व्यापार पर मंडराया संकट

भारत ने अमेरिका के इस एकतरफा फैसले और USTR की जांच प्रक्रिया पर कड़ा आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है। भारतीय पक्ष का स्पष्ट कहना है कि श्रम और व्यापार से जुड़े ऐसे संवेदनशील मुद्दों का समाधान एकतरफा फैसलों से निकालने के बजाय जारी द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार (Export Market) और दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर का कुल व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का अकेले निर्यात 87.3 अरब डॉलर का था। ऐसे में 10% के इस नए आयात शुल्क का सीधा और प्रतिकूल असर भारतीय निर्यातकों और गारमेंट, टेक्सटाइल व अन्य विनिर्माण उद्योगों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

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