नई दिल्ली / वाराणसी। वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर से जुड़े बहुचर्चित विवाद में एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत में अहम सुनवाई होने जा रही है। पवित्र सावन महीने की शुरुआत के बीच हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख कर सीलबंद क्षेत्र में मौजूद कथित ‘शिवलिंग’ की पूजा, दर्शन और जलाभिषेक की विशेष अनुमति मांगी है। शीर्ष अदालत गुरुवार को इस संवेदनशील याचिका पर सुनवाई करेगी। हिंदू पक्ष ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि अनुमति मिलने पर वे अदालत द्वारा तय की गई सभी शर्तों और सुरक्षा दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करेंगे।
याचिका में क्या है हिंदू पक्ष की मुख्य मांग?
हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन द्वारा यह नई याचिका दाखिल की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि सनातन धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक के लिए अत्यधिक पवित्र माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए सीलबंद क्षेत्र में मौजूद शिवलिंग के सीमित दर्शन और पूजा की अनुमति दी जाए। याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह पूजा पूरी तरह नियंत्रित और शांतिपूर्ण माहौल में होगी तथा कानून-व्यवस्था या अदालत के पूर्व आदेशों का कोई उल्लंघन नहीं किया जाएगा।
मई 2022 के सर्वे से शुरू हुआ था ‘शिवलिंग बनाम फव्वारा’ विवाद
गौरतलब है कि 15 मई 2022 को अदालत द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर की देखरेख में ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया गया था। इस दौरान वजूखाने के बीचों-बीच एक विशेष संरचना मिली थी, जिसे हिंदू पक्ष ने आदि विश्वेश्वर का प्राचीन शिवलिंग करार दिया। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष (अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी) का दावा है कि वह कोई शिवलिंग नहीं बल्कि वजूखाने में लगा एक पुराना फव्वारा है।
तनाव बढ़ता देख सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई 2022 को अंतरिम आदेश जारी करते हुए वजूखाना क्षेत्र को पूरी तरह से सील करने और उसे सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। तब से वह हिस्सा सील है और वहां किसी के भी जाने पर पाबंदी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में टली सुनवाई, अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकीं निगाहें
ज्ञानवापी से जुड़े मामलों की कानूनी लड़ाई कई मोर्चों पर जारी है। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट में वजूखाना क्षेत्र के ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) से सर्वे कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई थी। हालांकि, अदालत को अवगत कराया गया कि समान विषय पर सुप्रीम कोर्ट में भी विचार चल रहा है, जिसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त तय कर दी। ऐसे में अब सभी पक्षों की नजरें सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले पर टिकी हुई हैं।
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