Thursday , 23 July 2026

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ की भारी मार! राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से फार्मा सेक्टर में मची खलबली, भारत पर भी पड़ेगा सीधा असर

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय फार्मा मार्केट में हलचल मचाने वाला एक बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप ने अमेरिका में विदेशों से आयात की जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी-भरकम टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इस सख्त कदम का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के निर्माण को अमेरिका में वापस लाना (रीशोरिंग) है ताकि देश को दवाओं के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

दो साल तक राहत, फिर लगेगा 200 प्रतिशत तक भारी टैक्स

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर इस फैसले की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए नियम 1 अगस्त 2026 से लागू हो जाएंगे। शुरुआती रणनीति के तहत पहली दो साल की अवधि तक आयातित जेनेरिक दवाओं पर 0% टैरिफ रहेगा, जिससे बाजार को संभलने का मौका मिलेगा। हालांकि, इसके बाद तीसरे साल टैरिफ की दर को बढ़ाकर 100% कर दिया जाएगा और चौथे साल से इसे 200% की उच्चतम सीमा तक पहुंचा दिया जाएगा। ट्रंप ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि जो विदेशी कंपनियां दी गई समय-सीमा के भीतर अमेरिका में अपने प्लांट और इक्विपमेंट स्थापित नहीं करेंगी, उन पर भारी जुर्माना भी ठोका जाएगा।

पेटेंटेड दवाओं के नियमों में बदलाव नहीं, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि यह नया फैसला केवल जेनेरिक दवाओं तक ही सीमित रहेगा। पहले से चल रही पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं से जुड़ी सफल नीतियों में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि उनका एकमात्र मकसद अमेरिकी नागरिकों के स्वास्थ्य और दवा सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। उन्होंने दावा किया कि इस नीति की वजह से अब पूरे अमेरिका में ऐतिहासिक स्तर पर नई फार्मास्युटिकल फैसिलिटीज और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का निर्माण शुरू हो चुका है।

भारत पर क्या होगा इसका असर? भारतीय कंपनियों के पास रणनीति बदलने का मौका

अमेरिका का यह फैसला भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली कुल जेनेरिक दवाओं का लगभग 40 से 50 फीसदी हिस्सा भारतीय फार्मा कंपनियां ही सप्लाई करती हैं। राहत की बात यह है कि शुरुआत के दो सालों तक 0% टैरिफ रहने से भारतीय निर्यातकों पर तुरंत कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और उन्हें अमेरिका में अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने या नए विकल्प तलाशने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।

अमेरिकी ग्राहकों की जेब पर भी पड़ेगा डाका, महंगी हो सकती हैं जीवनरक्षक दवाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय और अन्य विदेशी कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट स्थापित करने में असमर्थ रहती हैं, तो तीसरे साल से 100% और फिर 200% टैरिफ लागू होने पर भारत से अमेरिका दवाएं निर्यात करना घाटे का सौदा बन जाएगा। इसके अलावा, इस अतिरिक्त टैक्स का सीधा बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। जेनेरिक दवाएं सस्ती होने के कारण लोकप्रिय हैं, लेकिन 200% टैरिफ लगने से अमेरिकी बाजार में भारतीय जीवनरक्षक दवाएं काफी महंगी हो जाएंगी, जिससे आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर भी भारी असर पड़ेगा।

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