Sunday , 12 July 2026

तीसरे विश्व युद्ध की आहट? मिडल ईस्ट में महाविनाशक जंग शुरू, अमेरिका ने 3 रातों में दागीं मिसाइलें तो ईरान ने ब्लॉक किया दुनिया का लाइफलाइन रूट

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (Middle East Crisis) सुलग उठा है और एक बार फिर दुनिया पर भीषण युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। सीजफायर पूरी तरह से खत्म हो चुका है और पिछले तीन दिनों के भीतर दोनों महाशक्तियों ने एक-दूसरे पर विनाशकारी हमले किए हैं। जहां ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित 6 अमेरिकी सैन्य ठिकानों (US Military Bases) को निशाना बनाया, वहीं पलटवार करते हुए अमेरिकी सेना ने महज तीन रातों के भीतर ईरान के 300 से ज्यादा ठिकानों को बमबारी कर नेस्तनाबूद कर दिया है।

इस भयंकर सैन्य टकराव के बीच ईरान ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल सप्लाई लाइन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से बंद करने का एलान कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं।

समझौते की उड़ीं धज्जियां, मालवाहक जहाज पर हमला कर भड़काया युद्ध

फरवरी 2026 में शुरू हुए इस ईरान युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार शांति और युद्धविराम की कोशिशें हुईं, लेकिन वे सभी नाकाम रहीं। हाल ही में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसके तहत ईरान को कुछ पाबंदियों में छूट दी गई थी। हालांकि, ईरान ने इस शांति का फायदा उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना सैन्य नियंत्रण मजबूत करना शुरू कर दिया।

विवाद तब और बढ़ गया जब ईरान की इस नाकेबंदी के बीच कुछ जहाजों ने तेहरान की चेतावनी को नजरअंदाज किया और तय समुद्री रूट से हट गए। इसके जवाब में ईरानी क्रांतिकारी गार्ड्स (IRGC) ने उन पर सीधा हमला बोल दिया। इस हमले में साइप्रस के झंडे वाले एक बड़े कंटेनर जहाज ‘M/V GFS Galaxy’ को भारी नुकसान पहुंचा और उसमें भीषण आग लग गई। जहाज का एक क्रू मेंबर अभी भी लापता है। ईरान इसे महज एक ‘चेतावनी का गोला’ बता रहा है, जबकि वाशिंगटन ने इसे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक सीधा और बर्बर हमला करार दिया है।

राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर CENTCOM का एक्शन, 3 रातों में 300 ठिकानों पर भीषण बमबारी

इस दुस्साहस के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) को जवाबी कार्रवाई के खुली छूट दे दी। इसके बाद अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान पर काल बनकर हमला किया। लगातार तीन रातों तक चले इस ऑपरेशन में अमेरिका ने ईरान के 300 से अधिक रणनीतिक ठिकानों को टारगेट किया।

अमेरिकी मिसाइलों ने ईरान की मिसाइल साइट्स, सीक्रेट ड्रोन बेस, नौसैनिक अड्डों, गोला-बारूद के बड़े गोदामों और उनके मिलिट्री कम्युनिकेशन नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। ईरानी मीडिया ने भी इस भारी तबाही की पुष्टि की है। रिपोर्ट के मुताबिक बंदर अब्बास, सिरिक, क़ेश्म द्वीप, बुशहर और जास्क जैसे तटीय इलाकों में पूरी रात भीषण विस्फोटों की आवाजें गूंजती रहीं।

ईरान का खौफनाक पलटवार: F-35 एयरबेस समेत 6 अमेरिकी ठिकानों पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें

अमेरिकी बमबारी से तिलमिलाए ईरान ने भी अपने मिसाइल तरकश से एक के बाद एक कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर क्षेत्र को दहला दिया। ईरान का सबसे घातक हमला जॉर्डन में स्थित अमेरिका के ‘मुवाफक सल्ती एयर बेस’ पर हुआ। यह वही रणनीतिक बेस है जहां अमेरिका के सबसे आधुनिक F-35 लड़ाकू विमान तैनात हैं। पूरे युद्ध के दौरान यह बेस ईरानी मिसाइलों की पहुंच से दूर था, लेकिन इस बार ईरान ने सुरक्षा घेरे को भेदते हुए मिसाइलें लक्ष्य के बेहद करीब पहुंचा दीं, जिससे बेस पर हड़कंप मच गया।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने प्रिंस हसन एयर बेस पर बने अमेरिकी कमांड सेंटर और घातक MQ-9 रीपर ड्रोन के हैंगरों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। इसके अलावा ईरान ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना की 5वीं फ्लीट के मुख्यालय, कुवैत, कतर, यूएई (UAE) और ओमान में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले किए। बहरीन में अमेरिकी बेस से उठते काले धुएं के गुबार ने ईरानी हमलों की पुष्टि कर दी है। ओमान में बने पेंटागन के रिफ्यूलिंग स्टेशन पर भी ईरान ने सरप्राइज अटैक किया है। इस समय तेहरान के आसमान में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह एक्टिव हैं और उसकी वायुसेना अलर्ट पर है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का कब्जा, वैश्विक अर्थव्यवस्था का घुटने लगा दम

इस पूरे महायुद्ध का सबसे खतरनाक असर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर पड़ा है, जो पूरी दुनिया के तेल और गैस व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। ईरान ने इसे पूरी तरह ब्लॉक करते हुए दो टूक कहा है कि जब तक यहां ‘ईरानी व्यवस्था’ लागू नहीं होगी, तब तक यह रास्ता दुनिया के लिए नहीं खुलेगा। ईरान अब इस रूट से गुजरने वाले हर जहाज से टैक्स वसूलना चाहता है, जबकि अमेरिका इसके विकल्प के रूप में ओमान के समुद्री क्षेत्र वाले दक्षिणी रूट को बढ़ावा दे रहा है।

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी और संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सख्त लहजे में कहा है कि हॉर्मुज केवल ईरान की शर्तों पर ही खुलेगा। ईरान का मानना है कि इस युद्ध के जरिए वह मिडिल ईस्ट में एक सुपरपावर के रूप में उभरा है और अमेरिका-इजरायल अपने मंसूबों में नाकाम रहे हैं। इस नाकेबंदी से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है और आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है, जिससे भारत और चीन जैसे बड़े आयातक देशों में महंगाई का बड़ा झटका लगेगा।

अमेरिका की दो टूक- ‘गलत चुनाव किया, अब ईरान को चुकानी होगी बड़ी कीमत’

इधर वॉशिंगटन भी झुकने को तैयार नहीं है। अमेरिकी रक्षा सचिव (Defense Secretary) पीट हेगसेथ ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान ने गलत रास्ता चुना है और अब उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को तेल बिक्री पर दी गई सभी तरह की रियायतें तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी हैं और राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान पर और अधिक विनाशकारी हमलों की धमकी दी है।

दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर ही युद्धविराम समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया है। हालांकि इस बीच ओमान ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश करते हुए सुरक्षित जहाज आवागमन पर एक बैठक भी की थी, लेकिन अमेरिका ने इसे नाकाफी माना है।

सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की कसम से खाड़ी देशों में दहशत, क्या छिड़ेगा फुल-स्केल वॉर?

इस भीषण टकराव से खाड़ी के अन्य राजशाही देश जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन बुरी तरह सहमे हुए हैं। ईरान इस इलाके में अपना पूर्ण वर्चस्व यानी ‘पैक्स इरानिका’ स्थापित करना चाहता है। भले ही अमेरिकी हमलों ने ईरान की सैन्य कमर तोड़ी हो, लेकिन ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है, जिससे तनाव चरम पर है। जॉर्डन जैसे देश इस लड़ाई के बीच में पिस रहे हैं, जिसने कई ईरानी मिसाइलों को हवा में मार गिराया है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान दोनों ही सीधे तौर पर एक पूर्ण युद्ध (Full-Scale War) नहीं चाहते, लेकिन दोनों तरफ से हो रही लगातार हिंसक कार्रवाई और गलतफहमी किसी बड़े वैश्विक विनाश का कारण बन सकती है। फिलहाल पूरे मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के साथ-साथ दुनिया की अर्थव्यवस्था का भविष्य भी पूरी तरह अधर में लटका हुआ है।

 

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