Sunday , 5 July 2026

राम मंदिर दान चोरी कांड में बड़ा खुलासा: आरोपियों की ‘व्हाट्सएप चैट’ से खुले राज, पार्टी करते और नोटों की गड्डियों के साथ मिले वीडियो

अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में हुई करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में अयोध्या पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) के हाथ बेहद चौंकाने वाले और पुख्ता तकनीकी साक्ष्य लगे हैं। गिरफ्तार और संदिग्ध आरोपियों के मोबाइल फोन की शुरुआती जांच में कई ऐसी ‘व्हाट्सएप चैट’ (WhatsApp Chats) बरामद हुई हैं, जो सीधे तौर पर मंदिर के दान संग्रह से रकम पार करने और फिर उसे आपस में बांटने के संगठित खेल को बेनकाब करती हैं। पुलिस ने इन डिजिटल सबूतों को अपनी केस डायरी और विवेचना में सबसे मजबूत साक्ष्य के तौर पर शामिल कर लिया है।

दान की गिनती के समय कोडवर्ड में चलती थी चैट, डिलीट करने के भी मिले सबूत

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जब मंदिर परिसर के भीतर दान पेटियों से चढ़ावे की गणना (गिनती) की जाती थी, उस समय कड़ी सुरक्षा के कारण आरोपी आपस में ज्यादा बातचीत नहीं कर पाते थे। इस दौरान वे बेहद शातिर तरीके से एक-दूसरे को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर कोडवर्ड में बात करते थे। चैट के जरिए ही यह तय किया जाता था कि किस समय, किस काउंटर से और कैसे रकम को बाहर पार करना है। इसके बाद सभी आरोपी एक गुप्त ठिकाने पर मिलकर उस काली कमाई का आपस में बंटवारा करते थे। पुलिस को इस बंटवारे के हिसाब-किताब की चैट भी मिली है। हालांकि, पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने कई चैट डिलीट भी कर दी थीं, लेकिन पुलिस फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से उस डेटा को रिकवर करने में जुटी है।

नोटों की गड्डियों संग जश्न मनाने के वीडियो आए सामने, फॉरेंसिक लैब भेजे गए मोबाइल

पुलिस ने जब आरोपियों के मोबाइल फोन को खंगाला, तो उसमें से कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो क्लिप मिली हैं जो इस पूरे घालमेल की गवाही दे रही हैं। इनमें आरोपी मोटी रकम और नोटों की गड्डियों के साथ बैठकर महंगी पार्टियां और जश्न मनाते हुए साफ नजर आ रहे हैं। पुलिस का पुख्ता अनुमान है कि यह वही पैसा है जिसे राम मंदिर के चढ़ावे से चोरी कर ये आरोपी ऐश कर रहे थे। साक्ष्यों को और मजबूत करने के लिए पुलिस इन सभी मोबाइल फोनों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच भी करवा रही है।

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से फिर 4 घंटे पूछताछ; गोलमोल जवाबों से बढ़ा शक

इस बीच, एसआईटी की टीम एक बार फिर अयोध्या पहुंची और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों— महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव से करीब चार घंटे तक बंद कमरे में कड़ी पूछताछ की। इस दौरान टीम ने मंदिर के चढ़ावे के ऑडिट और बैंक ट्रांजेक्शंस से जुड़े कई अहम दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए।

सूत्रों के मुताबिक, मंदिर के पूरे प्रबंधन, सुरक्षा और दान पेटियों की निगरानी में इन्हीं तीनों पदाधिकारियों का सीधा दखल रहता था। अन्य ट्रस्टियों की भूमिका न के बराबर थी। हालांकि, पूछताछ के दौरान तीनों पदाधिकारियों ने इस गबन में अपनी किसी भी तरह की भूमिका या लापरवाही से स्पष्ट इनकार किया है।

टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव पर फोड़ा ठीकरा, अब चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) खंगालेंगे खाते

अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव सीधे तौर पर इस पूरे कांड का ठीकरा पहले से नामजद आरोपी टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव पर फोड़ रहे हैं। तीनों एक सुर में इन्हीं दोनों का नाम ले रहे हैं, लेकिन एसआईटी और पुलिस इनके इन गोलमोल जवाबों से संतुष्ट नहीं हैं। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी निगरानी में चूक बिना किसी आंतरिक ढिलाई के संभव नहीं है। अब इस वित्तीय धोखाधड़ी की बारीकी को समझने के लिए पुलिस चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की भी मदद ले रही है।

पुलिस अब तक मंदिर प्रबंधन से जुड़े ज्यादातर सेवादारों, कर्मचारियों, गणनाकर्मियों और निजी सुरक्षाकर्मियों के बयान दर्ज कर चुकी है। इनमें से तीन से चार नए लोगों को आधिकारिक तौर पर आरोपी बनाया गया है, जबकि कुछ बैंक कर्मचारियों को भी नामजद करने की प्रक्रिया चल रही है। सूत्रों का दावा है कि पुख्ता सबूत हाथ लगने के बाद आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होना तय है।

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