नई दिल्ली । पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी गहरे भू-राजनीतिक तनाव और संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार (2 जुलाई 2026) को एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश की तेल शोधन क्षमता को लेकर बड़ा रोडमैप सामने रखा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार घरेलू रिफाइनरियों के व्यापक विस्तार को तेजी से बढ़ावा दे रही है। अगले 6 से 12 महीनों के भीतर देश की तेल रिफाइनिंग क्षमता लगभग 270 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) से बढ़कर सीधे 300 MTPA तक पहुंच जाएगी, जो भारत को वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब बना देगा।
अगले 6 से 12 महीनों में शुरू होंगी कई हाईटेक परियोजनाएं
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जानकारी दी, “मैंने कल ही मंत्रालय और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल इकाइयों (PSUs) के पूंजीगत व्यय की विस्तृत समीक्षा की है। हमारी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं इस वक्त बेहद उन्नत चरण में हैं, जिनमें कई बड़ी रिफाइनरियां भी शामिल हैं। इन्हें अगले 6 से 12 महीनों के भीतर पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।”
उन्होंने इस क्षमता विस्तार को बेहद उल्लेखनीय और ऐतिहासिक आंकड़ा बताया। इस मेगा विस्तार योजना के तहत 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाली एक बिल्कुल नई परियोजना भी शामिल की गई है, जिसमें 2.4 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की पेट्रोकेमिकल क्षमता होगी।
10 साल बाद देश को मिलेगी पहली ‘ग्रीनफील्ड रिफाइनरी’
केंद्रीय मंत्री ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर की एक और बड़ी उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा, “लगभग दस साल के लंबे अंतराल के बाद हम भारत में पहली बार एक नई ‘ग्रीनफील्ड रिफाइनरी’ स्थापित करने जा रहे हैं। इससे पहले साल 2016 में देश की आखिरी ग्रीनफील्ड रिफाइनरी ‘पारादीप रिफाइनरी’ चालू की गई थी।”
उन्होंने दावा किया कि वैश्विक मानकों के लिहाज से यह नई रिफाइनरी अत्याधुनिक तकनीक और उच्च दक्षता (हाई एफिशिएंसी) वाले उत्पादन से लैस होगी, जो भारत की तेल आत्मनिर्भरता में मील का पत्थर साबित होगी।
आम जनता को राहत देने के लिए सरकारी कंपनियों ने झेला 74,781 करोड़ का नुकसान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने वैश्विक संकट के बीच देश में तेल की कीमतों और सरकारी कंपनियों पर पड़े असर का भी पूरा ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण इनपुट लागत बहुत बढ़ गई थी। इसके बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को महंगे तेल की मार से बचाने के लिए सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) को लागत से कम कीमत पर बेचना जारी रखा।
नतीजतन, अप्रैल-जून 2026 की अवधि में 30 जून तक इन सरकारी तेल कंपनियों को कुल 74,781 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि जनता पर महंगाई का बोझ कम करने के लिए सरकार ने बीच में उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में भी कटौती करने का बड़ा फैसला किया।
अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होने में लगेगा समय, वैश्विक बाजारों पर नजर
जब केंद्रीय मंत्री से आम जनता को तेल की कीमतों में और राहत मिलने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही व्यावहारिक जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि अभी तेल की कीमतें कम होने में थोड़ा समय लग सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में जैसे-जैसे इंटरनेशनल मार्केट की स्थितियां बदलेंगी, यह साफ हो जाएगा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में क्या अंतर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आने के बाद ही भारत में भी तेल की कीमतें कम होने की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो पाएगी। तब तक सरकार हर स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।
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