Friday , 26 June 2026

Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई, 8 नामजद आरोपियों पर FIR के बाद ताबड़तोड़ एक्शन, कई हिरासत में

अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे में हुई चोरी के मामले में अब उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद, राम मंदिर ट्रस्ट की शिकायत पर आठ नामजद और कुछ अज्ञात आरोपियों के खिलाफ पहली FIR दर्ज कर ली गई है। FIR दर्ज होते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और अविनाश शुक्ला समेत सभी आठों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है।

SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद सीएम योगी का सख्त रुख

राम मंदिर के चढ़ावे की रकम में कथित हेरफेर और गबन की शिकायतें सामने आने के बाद सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। SIT ने लगातार छह दिनों तक मंदिर का दौरा किया, दानपात्रों के रखरखाव को देखा और करीब पांच दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की। मंगलवार को SIT के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने शासन को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट के सामने आते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया कि आस्था के केंद्र में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएम के निर्देश के बाद ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज किया।

CCTV फुटेज से खुला राज, ये हैं FIR में नामजद आरोपी

सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर परिसर के भीतर लगे कैमरों की सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर कुछ कर्मचारी चढ़ावे की राशि में से चोरी करते हुए रंगे हाथ कैद हुए थे। इसके बाद पुलिस ने इन चेहरों की पहचान की। दर्ज की गई FIR में कुल आठ लोगों को नामजद किया गया है, जिनका सीधा संबंध कैश हैंडलिंग और चढ़ावे के प्रबंधन से था। इस FIR में जो नाम शामिल हैं, वे इस प्रकार हैं:

  • रमाकांत यादव उर्फ टिन्नू यादव

  • लवकुश मिश्रा

  • अनुकल्प मिश्रा

  • अविनाश शुक्ला

  • मनीष यादव

  • रमाशंकर मिश्रा

  • सुभाष चंद्र श्रीवास्तव

  • करुणेश पांडे

इन नामजद आरोपियों के अलावा कुछ अज्ञात लोगों को भी इस साजिश में शामिल होने के लिए आरोपी बनाया गया है।

भ्रष्टाचार और साजिश की इन 6 गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

चढ़ावे की चोरी के इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की छह बेहद कड़क धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इन धाराओं में आरोपियों को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है:

  • धारा 3(5): इसके तहत जब कई लोग एक ही समान मकसद (Common Intention) के साथ मिलकर कोई अपराध करते हैं, तो हर व्यक्ति उस अपराध के लिए बराबर का जिम्मेदार माना जाता है।

  • धारा 61: यह धारा आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) रचने के खिलाफ लगाई जाती है, जब दो या दो से अधिक लोग मिलकर किसी गैर-कानूनी काम को अंजाम देने की योजना बनाते हैं।

  • धारा 306: यदि कोई क्लर्क या नौकर अपने मालिक के कब्जे वाली संपत्ति की चोरी करता है, तो इस धारा के तहत 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

  • धारा 316 (5): किसी लोक सेवक, बैंकर या एजेंट द्वारा सौंपे गए भरोसे का उल्लंघन करने (Criminal Breach of Trust) पर यह धारा लगती है, जिसमें अधिकतम आजीवन कारावास या 10 साल की सजा हो सकती है।

  • धारा 317 (4): जानबूझकर या आदत के तौर पर चोरी की संपत्ति का लेन-देन करने या उसे प्राप्त करने पर 10 साल तक की जेल या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

  • धारा 317 (5): चोरी की गई संपत्ति को छिपाने, ठिकाने लगाने या उसे हटाने में मदद करने के आरोप में 3 साल तक की जेल या जुर्माना लगाया जाता है।

राम मंदिर में बदली पूरी व्यवस्था, सुरक्षा और जांच के कड़े नियम लागू

इस बड़ी गड़बड़ी के सामने आने के बाद राम मंदिर परिसर में दान राशि के कलेक्शन और उसकी गिनती (Cash Counting) की पूरी व्यवस्था को अमूल-चूल बदल दिया गया है। जिन कर्मचारियों पर पहले इस काम की जिम्मेदारी थी, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाकर दूसरे कामों में लगा दिया गया है।

अब पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मंदिर के सबसे विश्वसनीय स्टाफ के साथ-साथ बैंक के नए अधिकारियों को कैश काउंटिंग के काम में तैनात किया गया है। पूरे काउंटिंग रूम की निगरानी के लिए एक नया और आधुनिक सीसीटीवी कैमरा सिस्टम लगाया गया है, जिसका एक अलग स्पेशल कंट्रोल रूम बनाया गया है। अब कोई भी कर्मचारी बिना पूरी तलाशी के काउंटिंग रूम में न तो प्रवेश कर सकता है और न ही बाहर जा सकता है। बाहर निकलते वक्त भी 100% फिजिकल चेकिंग अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा, अब बैंक में रोजाना कैश जमा करते समय तीन अलग-अलग अधिकारी क्रॉस-वेरिफिकेशन करेंगे और सभी के हस्ताक्षर होने के बाद ही प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी।

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