
नई दिल्ली। अगर आप नया पासपोर्ट बनवाने या पुराने को रिन्यू कराने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। केंद्र सरकार ने पासपोर्ट और इससे जुड़ी अन्य सेवाओं के शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अगले महीने की पहली तारीख यानी 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाना अब दो हजार रुपये तक महंगा हो जाएगा। यह बड़ा फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब पूरे देश में पासपोर्ट को नागरिकता का वैध प्रमाण मानने या न मानने को लेकर एक तीखी बहस छिड़ी हुई है।
14 साल बाद बदली व्यवस्था, नोटिफिकेशन जारी
सरकार ने पासपोर्ट नियमों में संशोधन करते हुए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। विदेश मंत्रालय ने ‘पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026’ को लागू करने का फरमान सुना दिया है। आपको बता दें कि इससे पहले पासपोर्ट सेवाओं की फीस में आखिरी बार साल 2012 में बदलाव किया गया था। पूरे 14 साल बाद सरकार ने पासपोर्ट नियम, 1980 की पुरानी शुल्क सूची (शेड्यूल-IV) को निरस्त करते हुए यह नई रेट लिस्ट लागू की है।
जेब पर पड़ेगा सीधा असर
इस नए नियम के लागू होने के बाद आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ना तय है। चाहे नया पासपोर्ट बनवाना हो, खत्म हो चुकी वैलिडिटी को रिन्यू कराना हो या फिर खोए हुए पासपोर्ट की जगह दूसरा निकलवाना हो, 1 जुलाई 2026 से हर सेवा के लिए आवेदकों को पहले के मुकाबले काफी ज्यादा कीमत चुकानी होगी।
एक नजर में समझें: 1 जुलाई से कितना लगेगा शुल्क
पाठकों की सुविधा के लिए हमने पुराने और नए शुल्कों की पूरी सूची नीचे दी है, जिससे आप आसानी से समझ सकते हैं कि किस श्रेणी में कितनी बढ़ोतरी हुई है:
| पासपोर्ट कैटेगरी | पुरानी फीस (नॉर्मल) | नई फीस (नॉर्मल) | पुरानी फीस (तत्काल) | नई फीस (तत्काल) |
| 36 पेज का पासपोर्ट (नया/रिन्यू) | ₹1,500 | ₹2,500 | ₹3,500 | ₹5,000 |
| 60 पेज का पासपोर्ट (नया/रिन्यू) | ₹2,000 | ₹3,500 | ₹4,000 | ₹6,000 |
| 36 पेज (खोया या क्षतिग्रस्त) | ₹1,500 | ₹5,000 | ₹3,500 | ₹7,500 |
| 60 पेज (खोया या क्षतिग्रस्त) | ₹2,000 | ₹6,000 | ₹4,000 | ₹8,500 |
| 18 साल से कम (36 पेज) | ₹1,000 | ₹1,750 | ₹3,000 | ₹4,250 |
| नाबालिग (खोया या क्षतिग्रस्त) | ₹1,000 | ₹4,250 | ₹3,000 | ₹6,750 |
नागरिकता बहस के बीच अहम कदम
राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का मानना है कि यह संशोधन केवल आर्थिक नजरिए से ही नहीं, बल्कि मौजूदा परिदृश्य में भी काफी मायने रखता है। देश में इन दिनों इस बात पर लगातार विमर्श चल रहा है कि क्या पासपोर्ट को नागरिकता का ठोस आधार माना जाना चाहिए। इसी सरगर्मी के बीच विदेश मंत्रालय द्वारा उठाया गया यह कदम कई मायनों में अहम माना जा रहा है।
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