Thursday , 18 June 2026

Ayodhya Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT का बड़ा एक्शन, इन 6 संदिग्धों पर कसा शिकंजा, सामने आई करोड़ों के हेर-फेर की इनसाइड स्टोरी

अयोध्या। उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी अयोध्या में भव्य राम मंदिर के चढ़ावे और दान के पैसों में हुई कथित हेराफेरी के मामले ने इस समय पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। राम मंदिर के पवित्र चढ़ावे से करीब 7 करोड़ रुपये चोरी होने के सनसनीखेज आरोपों के बाद अयोध्या के स्थानीय पुलिस थाने में अब तक कुल 3 अलग-अलग एफआईआर (शिकायतें) दर्ज की जा चुकी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने युद्धस्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसमें जिले के जिलाधिकारी (DM), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और विशेष रूप से गठित की गई एसआईटी (SIT) की टीम चौबीसों घंटे जांच में जुटी हुई है।

राम मंदिर ट्रस्ट के कई संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। इस पूरे घोटाले के केंद्र में 6 मुख्य किरदार निकलकर सामने आए हैं, जिन पर जांच एजेंसियों का शिकंजा सबसे ज्यादा कस गया है। इस बीच, सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस हाई-प्रोफाइल मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए साफ लफ्जों में कहा है कि, “SIT इस पूरे मामले की तह तक जाएगी और प्रभु श्री राम के दरबार में चोरी करने वाले किसी भी दोषी या आरोपी को कतई बख्शा नहीं जाएगा।” आइए विस्तार से जानते हैं इन 6 संदिग्ध किरदारों की पूरी कहानी और उन पर लगे संगीन आरोपों का पूरा कच्चा चिट्ठा।

1. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू: चंपत राय के पूर्व ड्राइवर से 50 करोड़ के साम्राज्य तक

इस पूरे मामले में जो नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है, वह है रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का। टिन्नू पहले राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर के रूप में काम करते थे और बाद में उनके खास सहयोगी बन गए। राम मंदिर परिसर से महज 1.5 किलोमीटर दूर इनका पुश्तैनी मकान है। जांच एजेंसियों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान इनके घर से भारी मात्रा में सोना बरामद हुआ है।

दावा किया जा रहा है कि अयोध्या और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में इनके नाम पर करीब 50 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति मौजूद है। आरोप है कि पिछले कुछ ही सालों में उन्होंने तेजी से कई कीमती जमीनें (प्लॉट्स) खरीदीं और लखनऊ-अयोध्या मार्ग पर 5 से 6 महंगे होटलों व रेस्टोरेंट्स में मोटी हिस्सेदारी हासिल की। हालांकि, इन आरोपों पर सफाई देते हुए टिन्नू ने कहा कि उनका मंदिर के चंदे या चढ़ावे के पैसे से कोई लेना-देना नहीं है। वे बहुत पहले से विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े हुए हैं और 50 करोड़ की संपत्ति का दावा पूरी तरह झूठा है; उनके पास केवल एक गेस्ट हाउस है। उन्होंने साफ कहा कि वे हर तरह की जांच का सामना करने को तैयार हैं।

2. मनीष यादव: टिन्नू का भतीजा जो नोटों की गिनती में था शामिल

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का सगा भतीजा मनीष यादव भी इस समय एसआईटी की रडार पर है। मनीष यादव राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर दान पेटियों से निकलने वाले नोटों की गिनती (Cash Counting) करने वाली कोर टीम का हिस्सा था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि मनीष ने नोटों की गिनती के दौरान ही बड़ी चालाकी से दान की राशि में गबन और चोरी को अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस हिरासत में हुई पूछताछ के बाद मनीष की निशानदेही पर करीब 36 लाख रुपये की नकदी बरामद की जा चुकी है। एसआईटी अब मनीष को रिमांड पर लेकर इस रैकेट के अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

3. गोपाल राव: व्यवस्थापक और दान पेटियों के मुख्य प्रभारी

इस मामले में एक और बेहद रसूखदार नाम गोपाल राव का सामने आया है। गोपाल राव राम मंदिर के मुख्य व्यवस्थापकों में से एक होने के साथ-साथ ट्रस्ट के खास आमंत्रित सदस्य भी हैं। मंदिर के दैनिक रखरखाव, सुरक्षा, साफ-सफाई और सबसे महत्वपूर्ण- सभी दान पेटियों (हुंडी) से मिलने वाले चढ़ावे को सुरक्षित रखने और उसे बैंक तक पहुंचाने की मुख्य जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर थी।

चढ़ावे में गायब हुई रकम को लेकर उन पर गंभीर आर्थिक गड़बड़ी और चोरी के आरोप लग रहे हैं। इस मामले पर गोपाल राव ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे पूरी तरह निर्दोष हैं और किसी भी एजेंसी की जांच के लिए तैयार हैं। राव का दावा है कि उन्होंने खुद ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ मिलकर इस पूरे मामले की निष्पक्ष एसआईटी जांच कराने की लिखित मांग की थी।

4. लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा: जीजा-साले की जोड़ी की तेजी से बदली माली हालत

लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा आपस में जीजा-साले हैं। ये दोनों भी राम मंदिर के गर्भगृह और परिसर में रखी दान पेटियों के पैसों को गिनने और उनका हिसाब रखने वाली टीम में तैनात थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले कुछ ही वर्षों के भीतर इन दोनों की आर्थिक स्थिति में रॉकेट की तरह उछाल आया।

आरोप है कि अनुकल्प मिश्रा ने हाल ही में अपने पैतृक गांव में एक आलीशान फार्म हाउस बनवाया और अयोध्या शहर के भीतर करीब 65 लाख रुपये का एक नया मकान खरीदा है। वहीं, लवकुश मिश्रा फैजाबाद (अयोध्या) में एक बड़े बंगले का निर्माण करवा रहा था, जिसके पास से जांच टीम को करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद होने की खबर है। हालांकि, इन दोनों के परिजनों का कहना है कि वे सीधे-साधे हैं और उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। फिलहाल एसआईटी दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

5. केडी तिवारी: सोने-चांदी के जेवरों के प्रभारी, संपत्ति को लेकर घिरे

केडी तिवारी के पास राम मंदिर में देश-विदेशी श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने, चांदी, हीरों और अन्य बहुमूल्य आभूषणों को सुरक्षित लॉकर में रखने और उनका स्टॉक रजिस्टर संभालने का जिम्मा था। उन पर आरोप है कि आभूषणों की हेराफेरी के जरिए उन्होंने अकूत संपत्ति बनाई और हाल ही में करीब 1.5 करोड़ रुपये की कीमती जमीन की रजिस्ट्री कराई है। वर्तमान में उनके पास 5 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने का अनुमान है, जिसे लेकर वे जांच के घेरे में हैं।

इस पर केडी तिवारी ने अपनी सफाई में कहा कि वे कई प्रतिष्ठित स्कूलों में शिक्षक (टीचर) रह चुके हैं। उनका बड़ा बेटा भारतीय वायुसेना (IAF) में देश की सेवा कर चुका है और वर्तमान में खुफिया ब्यूरो (IB) में एक बेहद उच्च पद पर कार्यरत है, जबकि उनका दूसरा बेटा भारतीय सेना से रिटायर होने के बाद यूपी पुलिस में सब-इस्पेक्टर है। तिवारी का दावा है कि उनके पास जो भी धन-दौलत है, वह उनके बेटों की मेहनत की गाढ़ी कमाई है और वे किसी भी निष्पक्ष जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

6. डॉ. अनिल मिश्रा: ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य पर भी उठे गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला नाम डॉक्टर अनिल मिश्रा का उछला है। डॉ. अनिल मिश्रा राम मंदिर का संचालन करने वाले ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के संस्थापक सदस्य हैं। राम मंदिर के संपूर्ण निर्माण कार्य, प्रबंधन और दान-पुण्य की व्यवस्था पर शीर्ष स्तर से पैनी नजर रखने की सीधी जिम्मेदारी उन्हीं की थी।

अयोध्या में जलकल विभाग के पास नगर निगम क्षेत्र में उनका मुख्य निवास स्थान है, लेकिन हाल ही में अयोध्या के अवधपुरी इलाके में उनका एक और बेहद आलीशान नया बंगला बनकर तैयार हो रहा है, जिसके बारे में चर्चा है कि उसमें आधुनिक लिफ्ट तक लगाई जा रही है। मंदिर के दान प्रबंधन में शीर्ष स्तर पर मौजूद होने के कारण एसआईटी उनसे भी इस पूरी वित्तीय गड़बड़ी और सुरक्षा चूक को लेकर लिखित और मौखिक जवाब तलब कर रही है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी अयोध्या में दर्ज कराई गई पुलिस शिकायतों (FIR), एसआईटी की शुरुआती जांच के दावों, संबंधित संदिग्धों के बयानों और विभिन्न स्थानीय व राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के संकलन पर आधारित है। मामले की आधिकारिक और अंतिम पुष्टि न्यायालयीन प्रक्रिया और एसआईटी की अंतिम चार्जशीट के बाद ही संभव होगी।

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