नई दिल्ली। झुलसाने वाली इस भीषण गर्मी के मौसम में कार चलाते समय एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल लगभग हर ड्राइवर करता है। कार के भीतर बैठते ही हम तुरंत AC को फुल स्पीड पर सेट कर देते हैं, ताकि केबिन जल्दी से ठंडा हो जाए। हालांकि, बहुत कम लोग यह बात जानते हैं कि उनकी कार के डैशबोर्ड पर ही एक ऐसा छोटा और बेहद काम का बटन मौजूद है, जो कार की कूलिंग को पलक झपकते ही तेज करने के साथ-साथ फ्यूल (पेट्रोल-डीजल) की भारी खपत को भी कम कर सकता है। यह बटन डैशबोर्ड पर बनी एक कार के निशान और उसके अंदर घूमते हुए मुड़े हुए तीर (U-Turn Arrow) के चिन्ह के रूप में दिखाई देता है। ऑटोमोबाइल की भाषा में इसे एयर रीसर्कुलेशन बटन (Air Recirculation Button) कहा जाता है। इस बटन का सही और समझदारी से किया गया इस्तेमाल न केवल कार के केबिन को फ्रिज जैसा ठंडा कर देता है, बल्कि कार के AC सिस्टम पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को भी काफी हद तक कम कर देता है। इससे इंजन पर बेवजह का लोड घटता है और लंबे सफर में फ्यूल एफिशिएंसी काफी बेहतर हो जाती है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह बटन कैसे काम करता है और आपको इसका इस्तेमाल कब और कैसे करना चाहिए।
आखिर कैसे काम करता है कार का एयर रीसर्कुलेशन मोड?
जब आप डैशबोर्ड पर मौजूद इस एयर रीसर्कुलेशन बटन को ऑन (सक्रिय) करते हैं, तो कार का वेंटिलेशन सिस्टम बाहर की हवा को केबिन के अंदर लेना पूरी तरह बंद कर देता है। इसके बजाय, यह मोड कार के केबिन के भीतर पहले से मौजूद हवा को ही दोबारा सोखता है और उसे AC सिस्टम (इवेपोरेटर) के जरिए बार-बार ठंडा करके कार के अंदर ही सर्कुलेट (घुमाता) करता रहता है। इसके विपरीत, जब कार सामान्य ‘फ्रेश एयर मोड’ (Fresh Air Mode) पर चलती है, तो AC सिस्टम को लगातार बाहर की भीषण गर्म और उमस भरी हवा को अंदर खींचकर उसे ठंडा करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि बाहर का तापमान 35°C या उससे अधिक है, तो फ्रेश एयर मोड में AC हर बार उतनी ही गर्म हवा को शून्य से ठंडा करने में अपनी पूरी ऊर्जा खर्च करेगा, जिससे कार को ठंडा होने में बहुत लंबा समय लग जाता है। वहीं, रीसर्कुलेशन मोड में एक बार जब केबिन का तापमान थोड़ा भी कम होता है, तो AC उसी पहले से ठंडी हो चुकी हवा को बार-बार और ठंडा करता रहता है, जिससे केबिन बहुत तेजी से बेहद आरामदायक और चिलिंग तापमान तक पहुंच जाता है।
पहले से ठंडी हवा मिलने से कूलिंग क्यों हो जाती है सुपरफास्ट?
ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और मैकेनिकल इंजीनियर्स बताते हैं कि कार का AC वास्तव में कोई नई ठंडी हवा पैदा नहीं करता, बल्कि वह केबिन की हवा के भीतर मौजूद गर्मी (Heat) और नमी (Humidity) को खींचकर उसे बाहर फेंकता है। ऐसे में, जब रीसर्कुलेशन मोड ऑन होने के कारण AC सिस्टम को अंदर की पहले से ठंडी हवा मिलती है, तो उसे हवा से गर्मी निकालने के लिए बहुत कम मेहनत करनी पड़ती है। इसे एक आसान उदाहरण से समझें; यदि बाहर का पारा 35 डिग्री है और कार के अंदर का तापमान AC चलने के कुछ मिनट बाद 25 डिग्री तक आ चुका है, तो रीसर्कुलेशन मोड में सिस्टम अब 35 डिग्री की गर्म हवा के बजाय इसी 25 डिग्री वाली हवा को दोबारा खींचेगा और उसे और ज्यादा ठंडा (जैसे 20 या 18 डिग्री) करके केबिन में छोड़ेगा। अगली बार वही हवा और ठंडी होकर सिस्टम में पहुंचेगी। इस चक्र (Loop) के कारण कार के अंदर शिमला जैसी कूलिंग बेहद कम समय में हो जाती है।
पेट्रोल-डीजल की खपत पर कैसे पड़ता है इसका सीधा असर?
कार का AC कंप्रेसर सीधे गाड़ी के इंजन से जुड़ा होता है और एक ड्राइव बेल्ट की मदद से अपनी शक्ति लेता है। जब AC को लगातार बाहर की झुलसाने वाली गर्म हवा को ठंडा करना पड़ता है, तो कंप्रेसर को बिना रुके लगातार फुल कैपेसिटी पर काम करना पड़ता है, जिससे इंजन पर बहुत ज्यादा खिंचाव पड़ता है। इंजन पर लोड बढ़ने का सीधा असर आपकी गाड़ी के माइलेज पर पड़ता है और पेट्रोल-डीजल तेजी से खत्म होने लगता है।
लेकिन जब आप रीसर्कुलेशन मोड चालू कर देते हैं, तो अंदर की ठंडी हवा के कारण AC का काम बेहद आसान हो जाता है। आजकल की आधुनिक कारों में एडवांस ‘वेरिएबल डिस्प्लेसमेंट कंप्रेसर्स’ (Variable Displacement Compressors) का इस्तेमाल किया जाता है। ये कंप्रेसर केबिन का तापमान सेट लेवल पर आते ही स्वतः ही अपनी क्षमता को कम कर लेते हैं और कम एनर्जी (ईंधन) का उपयोग करते हैं। इससे इंजन को राहत मिलती है और फ्यूल एफिशिएंसी में सुधार होता है। हालांकि, एक या दो छोटे सफर में आपको इसका बड़ा अंतर शायद महसूस न हो, लेकिन पूरे गर्मी के मौसम में अगर आप रोजाना इस मोड का सही इस्तेमाल करते हैं, तो आपकी जेब से ईंधन पर होने वाले खर्च की एक अच्छी-खासी रकम बच सकती है।
रीसर्कुलेशन बटन का इस्तेमाल कब करें और कब बिल्कुल न करें?
विशेषज्ञों और कार कंपनियों के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस बटन के इस्तेमाल को लेकर कुछ जरूरी नियम तय किए गए हैं, जिन्हें हर ड्राइवर को पता होना चाहिए:
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भीषण धूप में खड़ी कार में बैठते ही: जब कार धूप में खड़ी हो, तो केबिन भट्टी की तरह गर्म हो जाता है। ऐसे में कार में बैठते ही सबसे पहले सभी शीशे नीचे करके थोड़ी देर फ्रेश एयर मोड चलाएं ताकि अंदर की अत्यधिक गर्म हवा बाहर निकल जाए। इसके बाद तुरंत शीशे बंद करके रीसर्कुलेशन मोड ऑन कर दें।
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भारी ट्रैफिक और प्रदूषण वाले रास्तों पर: जब आप बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक में फंसे हों, किसी लंबी टनल (सुरंग) से गुजर रहे हों या धूल-मिट्टी वाले इलाके में गाड़ी चला रहे हों, तब इस मोड को जरूर ऑन रखें। इससे आगे चल रहे वाहनों का जहरीला धुआं (कार्बन मोनोऑक्साइड), बदबू और धूल के कण आपकी कार के केबिन में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
सावधान! लगातार कई घंटों तक न करें इस्तेमाल:
इस मोड का एक बड़ा नुकसान भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि कार में कई लोग सवार हैं और आप लंबे समय (कई घंटों) तक रीसर्कुलेशन मोड को लगातार चालू रखते हैं, तो बंद केबिन के अंदर ऑक्सीजन का स्तर घटने लगता है और यात्रियों द्वारा छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। इससे केबिन की हवा बासी और भारी हो जाती है, जिसके कारण ड्राइवर और सह-यात्रियों को अचानक थकान, सिरदर्द, सुस्ती या नींद आने जैसी समस्या हो सकती है, जो हाईवे पर ड्राइविंग के दौरान बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए, विशेषज्ञों की सलाह है कि हर 20 से 30 मिनट की ड्राइविंग के बाद, केवल 2 से 3 मिनट के लिए रीसर्कुलेशन मोड को बंद करके ‘फ्रेश एयर मोड’ चालू कर लें, ताकि बाहर की ताजी ऑक्सीजन केबिन के अंदर आ सके।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य ऑटोमोबाइल मैकेनिक्स और कार एसी के कामकाज के स्थापित सिद्धांतों पर आधारित है। विभिन्न कार मॉडल्स, उनकी कंडीशन और बाहरी मौसम की गंभीरता के आधार पर ईंधन की बचत और कूलिंग की टाइमिंग में थोड़ा अंतर आ सकता है।
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