नई दिल्ली। भारत में प्राचीन काल से ही मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था और पूजा-पाठ के केंद्र नहीं रहे हैं, बल्कि ये देश के आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याणकारी गतिविधियों और दान-पुण्य के सबसे बड़े स्रोत रहे हैं। इन दिनों अयोध्या के राम मंदिर में दान को लेकर कुछ खबरें सुर्खियों में जरूर बनी हुई हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि वास्तव में हमारे देश के किन मंदिरों को हर साल सबसे ज्यादा चढ़ावा मिलता है? किस आस्था के केंद्र के पास कितना टन सोना-चांदी और अरबों रुपयों की अचल संपत्ति मौजूद है?
विभिन्न मंदिर ट्रस्टों की आधिकारिक ऑडिट रिपोर्ट, धार्मिक पर्यटन के आंकड़ों और सरकारी बयानों के आधार पर तैयार की गई देश के 20 सबसे अमीर मंदिरों की सूची बेहद चौंकाने वाली है। सोने-चांदी के चढ़ावे, विशाल संपत्तियों और श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के दम पर नवनिर्मित राम मंदिर भी अब देश के सबसे ज्यादा दान पाने वाले शीर्ष मंदिरों की सूची में अपनी जगह बना चुका है। आइए जानते हैं देश के इन 20 महा-मंदिरों की सालाना आय, उनके खजाने और संपत्तियों का पूरा लेखा-जोखा।

1. तिरुमला तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर (आंध्र प्रदेश)
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अनुमानित सालाना आय: ₹1,450 करोड़ से ₹1,650 करोड़ लगभग
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खासियत: देश में सबसे ज्यादा दान पाने वाले भगवान वेंकटेश्वर के इस मंदिर के पास विभिन्न सरकारी और राष्ट्रीयकृत बैंकों में 11 टन से अधिक का शुद्ध सोना गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत जमा है। यहां की हुंडी (दानपात्र) में रोजाना औसतन 2 से 3 करोड़ रुपये का नकद चढ़ावा आता है।
2. पद्मनाभस्वामी मंदिर (केरल)
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अनुमानित सालाना आय: ₹650 करोड़ से ₹800 करोड़ रुपये (चढ़ावे और नियमित आय के आधार पर)
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खासियत: हालांकि इसकी नियमित सालाना आय तिरुपति से कम है, लेकिन अपने प्राचीन भूमिगत गुप्त खजाने के आधार पर इसे दुनिया का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में खुले इसके भूमिगत तहखानों (Vaults) में रखे सदियों पुराने सोने, हीरों, कीमती पत्थरों और मुगलों-अंग्रेजों के समय के सिक्कों की कुल नेटवर्थ 1.2 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक आंकी गई है।
3. श्री राम जन्मभूमि मंदिर (अयोध्या, उत्तर प्रदेश)
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अनुमानित सालाना आय: ₹700 करोड़ रुपये से अधिक
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खासियत: भव्य मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से यहाँ दान का एक नया रिकॉर्ड बना है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, केवल वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही ट्रस्ट की कुल आय 327 करोड़ रुपये से अधिक दर्ज की गई थी, जिसमें बैंकों से मिलने वाला भारी ब्याज और देश-विदेश से मिला नया दान शामिल है।
4. स्वर्ण मंदिर – श्री हरिमंदिर साहिब (अमृतसर, पंजाब)
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अनुमानित सालाना आय: ₹500 करोड़ से ₹1,000 करोड़ रुपये से अधिक
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खासियत: सिखों के इस सर्वोच्च और पवित्रतम धार्मिक स्थल के मुख्य गुंबद और दीवारों पर सैकड़ों किलो शुद्ध सोना मढ़ा हुआ है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के तहत आने वाले इस गुरुद्वारे में दुनिया की सबसे बड़ी मुफ्त रसोई (लंगर) चलती है, जहां जाति-धर्म के भेदभाव के बिना रोज़ाना 1 लाख से अधिक लोगों को बेहद सम्मान के साथ भोजन कराया जाता है।
5. माता वैष्णो देवी मंदिर (कटरा, जम्मू-कश्मीर)
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अनुमानित सालाना आय: ₹500 करोड़ रुपये के करीब
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खासियत: त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित इस पवित्र गुफा मंदिर में हर साल लगभग 1 करोड़ के करीब श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। माता के दरबार में हर साल करोड़ों का नकद और सोने-चांदी का चढ़ावा आता है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड इस पूरी राशि का निवेश श्रद्धालुओं की सुरक्षा, आधुनिक सुविधाओं और पूरे कटरा क्षेत्र के बुनियादी विकास पर करता है।
6. शिरडी साईं बाबा मंदिर (अहमदनगर, महाराष्ट्र)
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अनुमानित सालाना आय: ₹400 करोड़ से ₹480 करोड़ रुपये के बीच
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खासियत: शिरडी के साईं बाबा संस्थान के बैंक खातों में करीब 1,800 करोड़ रुपये से ज्यादा की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जमा है। इसके अलावा मंदिर के पास लगभग 380 किलोग्राम से ज्यादा का शुद्ध सोना और भारी मात्रा में चांदी सुरक्षित है। इस दान राशि से संस्थान द्वारा बेहद आधुनिक और बड़े-बड़े चैरिटेबल अस्पताल और स्कूल मुफ्त संचालित किए जाते हैं।
7. सबरीमाला अयप्पा मंदिर (केरल)
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अनुमानित सालाना आय: ₹230 करोड़ से ₹300 करोड़ रुपये से अधिक
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खासियत: इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरे साल नहीं खुलता। यह केवल नवंबर से जनवरी के बीच ‘मंडल-मकरविलक्कू’ के दो महीने की मुख्य तीर्थयात्रा के दौरान ही खुलता है। इसी संक्षिप्त अवधि में इसकी मुख्य आय ‘अरवणा प्रसादम’ (एक विशेष स्वादिष्ट हलवा) की रिकॉर्ड बिक्री और श्रद्धालुओं द्वारा हुंडी में डाले गए चढ़ावे से होती है।
8. गुरुवायुर श्री कृष्ण मंदिर (केरल)
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अनुमानित सालाना आय: ₹250 करोड़ से ₹400 करोड़ रुपये के बीच
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खासियत: भगवान कृष्ण (गुरुवायुरप्पन) को समर्पित केरल के इस ऐतिहासिक मंदिर के पास बैंकों में 1,700 करोड़ रुपये से ज्यादा का कैश डिपॉजिट सुरक्षित है। इसके अलावा, मंदिर ट्रस्ट के पास दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भारी मात्रा में भूमि संपत्तियां (Real Estate) मौजूद हैं।
9. श्री जगन्नाथ मंदिर (पुरी, ओडिशा)
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अनुमानित सालाना आय: ₹230 करोड़ से ₹250 करोड़ रुपये के बीच
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खासियत: महाप्रभु जगन्नाथ के इस भव्य और प्राचीन मंदिर के नाम पर ओडिशा और देश के अन्य राज्यों में करीब 60 हजार एकड़ से अधिक की कीमती जमीन रजिस्टर्ड है। मंदिर का प्रसिद्ध ‘रत्न भंडार’ सदियों पुराने, राजा-महाराजाओं द्वारा चढ़ाए गए बेशकीमती स्वर्ण आभूषणों और हीरों से भरा हुआ है।
10. कुक्के सुब्रह्मण्य मंदिर (दक्षिण कन्नड़, कर्नाटक)
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अनुमानित सालाना आय: ₹160 करोड़ से ₹168 करोड़ रुपये के बीच
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खासियत: कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में स्थित यह मंदिर राज्य सरकार के मुजराई (धार्मिक बंदोबस्ती) विभाग के तहत सबसे ज्यादा कमाई करने वाला धार्मिक स्थल है। यह पूरे देश में सबसे प्रसिद्ध और मान्यता प्राप्त ‘सर्प दोष निवारण’ और ‘आश्लेषा बलि’ पूजा का मुख्य केंद्र है।
11. श्री सिद्धिविनायक मंदिर (मुंबई, महाराष्ट्र)
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अनुमानित सालाना आय: ₹100 करोड़ से ₹150 करोड़ रुपये के बीच
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खासियत: मुंबई के इस सबसे आलीशान गणेश मंदिर में बॉलीवुड सितारों, बड़े राजनेताओं और देश के दिग्गज उद्योगपतियों (जैसे अंबानी और टाटा) का चौबीसों घंटे तांता लगा रहता है। मंदिर का मुख्य गुंबद सोने से मढ़ा है। इसका ट्रस्ट महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में मुफ्त डायलिसिस सेंटर चलाने और कैंसर मरीजों के महंगे इलाज के लिए भारी वित्तीय सहायता देता है।
12. मलाई महादेश्वर मंदिर (कोलेगल, कर्नाटक)
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अनुमानित सालाना आय: ₹115 करोड़ से ₹123 करोड़ रुपये के बीच
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खासियत: कर्नाटक के चामराजनगर जिले की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह कर्नाटक राज्य में सरकार के नियंत्रण वाले विभागों में दूसरा सबसे ज्यादा चढ़ावा और राजस्व पाने वाला प्रमुख धार्मिक स्थल है।
13. काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
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अनुमानित सालाना आय: ₹80 करोड़ से ₹100 करोड़ रुपये के करीब
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खासियत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘काशी विश्वनाथ कॉरिडोर’ के निर्माण और सुंदरीकरण के बाद से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कई सौ गुना की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप मंदिर का सालाना कलेक्शन और गर्भगृह के शिखरों के लिए मिलने वाला सोने का भंडार पिछले 3-4 सालों में 3 से 4 गुना तक बढ़ गया है।
14. सांवरिया सेठ मंदिर (चित्तौड़गढ़, राजस्थान)
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अनुमानित सालाना आय: ₹60 करोड़ से ₹80 करोड़ रुपये के बीच
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खासियत: इस मंदिर की परंपरा पूरे देश में सबसे अनूठी है। देश भर के बड़े-बड़े अफीम उत्पादक, कपड़ा व्यापारी और बिजनेसमैन भगवान सांवरिया सेठ को अपने बिजनेस में ‘लीगल पार्टनर’ (साझेदार) मानते हैं। वे अपने हर महीने या सालाना मुनाफे का 10 से 20 फीसदी हिस्सा सीधा मंदिर के दानपात्र में आकर गुप्त रूप से डालते हैं। हर महीने जब यहाँ का दानपात्र खुलता है, तो नोटों की गिनती में कई दिन लग जाते हैं।
15. सोमनाथ मंदिर (वेरावल, गुजरात)
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अनुमानित सालाना आय: ₹50 करोड़ से ₹100 करोड़ रुपये के करीब
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खासियत: इतिहास के पन्नों के मुताबिक, विदेशी आक्रांताओं और लुटेरों ने इस भव्य मंदिर को धन-दौलत की लालच में 17 बार बेरहमी से लूटा और तोड़ा था। लेकिन आज भी, देश के इस पहले ज्योतिर्लिंग के पास भारी मात्रा में भूमि संपत्तियां मौजूद हैं और ट्रस्ट को डिजिटल डोनेशन के माध्यम से भारी आय प्राप्त होती है।
16. स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर (नई दिल्ली)
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अनुमानित सालाना आय: ₹60 करोड़ से ₹100 करोड़ रुपये के बीच
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खासियत: अपनी विशालकाय, बेजोड़ वास्तुकला और नक्काशी के लिए मशहूर इस भव्य परिसर में आने वाले देश-विदेश के लाखों पर्यटकों की टिकटिंग (प्रदर्शनी), सॉवेनियर शॉप्स, फूड कोर्ट और श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले स्वैच्छिक डोनेशन के जरिए बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण (BAPS) ट्रस्ट को बड़ी आय प्राप्त होती है।
17. महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन, मध्य प्रदेश)
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अनुमानित सालाना आय: ₹50 करोड़ से ₹70 करोड़ रुपये
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खासियत: भव्य ‘महाकाल लोक कॉरिडोर’ के उद्घाटन के बाद से मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन में ऐतिहासिक उछाल आया है। सावन के पवित्र महीने, महाशिवरात्रि के त्योहार और विश्व प्रसिद्ध ‘भस्म आरती’ की वीआईपी बुकिंग और रसीदों से मंदिर प्रशासन को हर साल रिकॉर्ड तोड़ आय हो रही है।
18. मीनाक्षी अम्मन मंदिर (मदुरै, तमिलनाडु)
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अनुमानित सालाना आय: ₹40 करोड़ से ₹60 करोड़ रुपये
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खासियत: अपनी प्राचीन द्रविड़ वास्तुकला, आसमान छूते 14 भव्य गोपुरम और सुनहरे विमानों के लिए विख्यात इस ऐतिहासिक मंदिर परिसर में प्रतिदिन 20,000 से अधिक स्थानीय और विदेशी सैलानी दर्शन के लिए आते हैं, जिससे मंदिर की अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत बनी हुई है।
19. महालक्ष्मी मंदिर (कोल्हापुर, महाराष्ट्र)
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अनुमानित सालाना आय: ₹30 करोड़ से ₹50 करोड़ रुपये के बीच
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खासियत: भारत के प्रमुख सिद्ध शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर में माता महालक्ष्मी के दर्शन के लिए पश्चिमी भारत के संपन्न व्यापारियों के बीच अगाध और अटूट आस्था है। मंदिर के पास शुद्ध सोने और चांदी के आभूषणों, मुकुटों और प्राचीन बर्तनों का एक बहुत बड़ा और सुरक्षित भंडार है।
20. रेणुका देवी येल्लम्मा मंदिर (सौंदत्ती, कर्नाटक)
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अनुमानित सालाना आय: ₹250 करोड़ से ₹40 करोड़ रुपये के बीच
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खासियत: कर्नाटक के बेलगाम (बेलगावी) क्षेत्र का यह एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र है। हाल के दिनों में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के लिए शुरू की गई मुफ्त बस परिवहन योजना (शक्ति योजना) के लागू होने के बाद से यहाँ महिला श्रद्धालुओं की आमद में ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना है, जिससे मंदिर के कुल चढ़ावे और राजस्व में भारी इजाफा दर्ज किया गया है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई विभिन्न मंदिरों की सालाना आय, सोने के भंडार और बैंक डिपॉजिट के आंकड़े संबंधित मंदिर ट्रस्टों द्वारा समय-समय पर जारी की गई वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट, आधिकारिक बयानों, पर्यटन विभाग की रिपोर्ट और सार्वजनिक कूटनीतिक/धार्मिक दस्तावेजों के संकलन पर आधारित हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव और विशेष पर्वों के आधार पर इनमें आंशिक बदलाव संभव है।
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