नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा के प्रीलिम्स 2026 का रिजल्ट जल्द ही जारी होने वाला है। इस समय देश भर के लाखों उम्मीदवारों की धड़कनें तेज हैं और सबकी नजरें सिर्फ उस एक पीडीएफ (PDF) लिस्ट पर टिकी हैं। इस माहौल में स्वाभाविक है कि दिल में एक अनजाना डर भी है कि ‘अगर इस बार नाम नहीं आया तो क्या होगा?’
लेकिन कड़े संघर्ष के इस दौर में एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि कोई एक रिजल्ट आपकी पूरी जिंदगी और काबिलियत तय नहीं कर सकता। देश में कई ऐसे बेहद सफल और मशहूर आईएएस-आईपीएस (IAS-IPS) अफसर हैं, जिन्होंने एक-दो बार नहीं बल्कि बार-बार असफलता का कड़वा घूंट पिया, लेकिन हार नहीं मानी और आखिरकार देश के सर्वोच्च पद को हासिल करके ही दम लिया।
रिजल्ट उम्मीद के मुताबिक न आए, तो खुद को कैसे संभालें?
UPSC कोई आम स्कूल-कॉलेज का एग्जाम नहीं है। यहां सीटें बेहद सीमित होती हैं और मुकाबला देश के सबसे तेज दिमागों से होता है। ऐसे में महज कुछ अंकों के अंतर, परीक्षा के दिन के दबाव या मामूली रणनीतिक चूक की वजह से कई होनहार छात्र भी लिस्ट से बाहर हो जाते हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आपमें योग्यता की कमी है। ऐसे नाजुक समय पर दूसरों की सफलता से खुद को तौलने के बजाय अपने सफर, अपनी कमियों और उनसे मिलने वाली सीख पर ध्यान देना सबसे बड़ी समझदारी है।
असफलता के सदमे से उबरकर दोबारा ‘Re-Start’ करने के 5 अचूक मंत्र
अगर इस बार परिणाम आपके पक्ष में नहीं रहता है, तो खुद को निराशा के अंधेरे से बाहर निकालने के लिए इन 5 बातों को गांठ बांध लें:
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1. सच को स्वीकारें और थोड़ा ब्रेक लें: रिजल्ट खराब आने पर दुख होना स्वाभाविक है। ऐसे में खुद को कमरे में बंद करने या अकेला करने के बजाय परिवार से बात करें, थोड़ा आराम करें और फिर नई ऊर्जा के साथ आगे की सोचें।
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2. कमियों का ईमानदारी से विश्लेषण करें: ठंडे दिमाग से देखें कि चूक कहां हुई। क्या मॉक टेस्ट कम दिए थे, करंट अफेयर्स में कमी रह गई या एग्जाम हॉल में टाइम मैनेजमेंट नहीं हो पाया? जिस हिस्से में सुधार की जरूरत है, उसे अपनी ताकत बनाएं।
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3. सोशल मीडिया से बना लें दूरी: दूसरों के ‘सक्सेस स्टोरीज’ और रील्स देखकर खुद को कमतर आंकने की गलती न करें। कुछ दिनों के लिए डिजिटल दुनिया से कट जाएं और केवल अपने लक्ष्य पर फोकस करें।
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4. हमेशा एक ‘प्लान-बी’ (दूसरा रास्ता) तैयार रखें: यूपीएससी के साथ-साथ राज्य लोक सेवा आयोग (State PSC), अन्य सरकारी नौकरियों या अपनी पसंद की किसी नई स्किल को सीखने के बारे में भी सोचें। बैकअप प्लान होने से मानसिक दबाव बहुत कम हो जाता है।
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5. खुद पर अटूट भरोसा रखें: इतिहास गवाह है कि जो आज बड़े पदों पर बैठे हैं, वे भी कभी आपकी तरह ही असफलताओं से टूटे थे। कोशिश न छोड़ना ही सफलता की एकमात्र गारंटी है।
आखिरी अटेम्प्ट की ‘करो या मरो’ की बाजी में बाजीगर बने ये 6 ऑफिसर्स
1. होटल में वेटर की नौकरी करने वाले के. जयगणेश (AIR 156)
तमिलनाडु के एक बेहद पिछड़े गांव से आने वाले के. जयगणेश उन युवाओं के लिए सबसे बड़ी मिसाल हैं जो दो-तीन प्रयासों के बाद ही हिम्मत छोड़ देते हैं। जयगणेश लगातार 6 बार यूपीएससी में फेल हुए— कभी प्रीलिम्स नहीं निकला, तो कभी इंटरव्यू के दरवाजे से बाहर होना पड़ा। पढ़ाई का खर्च और पेट पालने के लिए उन्होंने एक होटल में वेटर तक का काम किया। लेकिन जिद पक्की थी, 7वें और अपने आखिरी प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 156 हासिल कर दुनिया को चौंका दिया।
2. छोटी नौकरियां कर पढ़ाई जारी रखने वाली राम्या सीएस (AIR 46)
तमिलनाडु के कोयम्बटूर की रहने वाली राम्या सीएस ने यूपीएससी के जुनून में अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी थी। शुरुआती कई प्रयासों में असफलता हाथ लगी तो घर की आर्थिक स्थिति बदहाल हो गई। उन्होंने हार मानने के बजाय घर चलाने के लिए डेटा एंट्री जैसी छोटी-मोटी नौकरियां कीं, लेकिन पढ़ाई से नाता नहीं तोड़ा। उनकी इसी जिद ने छठे प्रयास में रंग दिखाया और वे AIR 46 के साथ सीधे आईएएस बनीं।
3. डिप्रेशन से निकलकर टॉपर बनने वाले सौरभ पांडे (AIR 66)
उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले सौरभ पांडे लगातार 5 बार असफल होने के बाद इस कदर टूट चुके थे कि उन्होंने दिल्ली छोड़कर वापस लौटने और तैयारी बंद करने का मन बना लिया था। लेकिन इस मुश्किल वक्त में उनके परिवार और दोस्तों ने उन्हें बिखरने नहीं दिया। सौरभ ने अपनी आखिरी बची ताकत झोंकी और अपने छठे व अंतिम प्रयास में शानदार AIR 66 हासिल कर सबको गौरवान्वित कर दिया।
4. ‘जब तक बनेंगे नहीं, घर लौटेंगे नहीं’ का संकल्प लेने वाले आलोक रंजन (AIR 346)
बिहार के नवादा जिले के आलोक रंजन ने कसम खाई थी कि जब तक वे आईएएस नहीं बन जाते, अपने घर वापस कदम नहीं रखेंगे। एक के बाद एक लगातार 6 बार वे असफल रहे, लेकिन उनके फौलादी हौसले में एक खरोंच तक नहीं आई। आखिरकार उनके अटूट धैर्य की जीत हुई और 7वें प्रयास में AIR 346 लाकर उन्होंने अपना सालों पुराना सपना सच कर दिखाया।
5. और 6. हार को मात देने वाली आकृति सेठी और प्रियंका गोयल
हरियाणा की आकृति सेठी एक बार महज दो नंबरों के मामूली अंतर से इंटरव्यू की रेस से बाहर हो गई थीं, लेकिन वे रुकी नहीं और अगले प्रयासों में सीधे आईएएस की कुर्सी हासिल की। वहीं दिल्ली की प्रियंका गोयल भी कई बार प्रीलिम्स और मेन्स की बाधा पार नहीं कर पाई थीं। लेकिन उन्होंने आखिरी दम तक लड़ना बेहतर समझा और अपने छठे व अंतिम प्रयास में AIR 369 हासिल कर यह साबित कर दिया कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
असली जीत मैदान छोड़ने में नहीं, गिरकर दोबारा उठने में है
याद रखिए, यूपीएससी का रिजल्ट आपके कठिन संघर्ष की किताब का महज एक पन्ना है, आपकी पूरी जिंदगी की कहानी नहीं। अगर इस बार आपका नाम लिस्ट में नहीं आता है, तो यह आपकी जिंदगी का अंत नहीं बल्कि एक नए, अधिक अनुभवी और मजबूत वर्जन की शुरुआत है। कई बार मंजिल उन्हीं को मिलती है जो सबसे ज्यादा बार गिरकर भी अपने घुटनों की धूल झाड़ते हैं और दोबारा उठ खड़े होते हैं।
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