Wednesday , 17 June 2026

अहमदाबाद में RBI के खजाने से ₹8.70 करोड़ की महाचोरी: बैंककर्मी ने बक्सों में ‘कचरा’ बताकर निकाला था कैश, 90 दिन वाले ‘CCTV जाल’ में ऐसे फंसा

अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग जगत और सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। यहां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के करेंसी चेस्ट (मुख्य खजाने) से ₹8.70 करोड़ की भारी-भरकम रकम चोरी होने का करीब 4 महीने बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस महाचोरी को किसी बाहरी डकैत ने नहीं, बल्कि बैंक के ही एक वफादार और पुराने कर्मचारी ने अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपी कर्मचारी को गिरफ्तार कर उसकी कार की डिक्की से ₹2.20 करोड़ कैश बरामद कर लिया है।

CCTV फुटेज में आरोपी ट्रॉली पर बक्सों को उठाकर ले जाता दिखा।
CCTV फुटेज में आरोपी ट्रॉली पर बक्सों को उठाकर ले जाता दिखा।

15 साल की नौकरी के बाद जागा ‘आरामदेह जिंदगी’ का लालच

कालूपुर थाना पुलिस के मुताबिक, इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड हर्षिद्द कडियार है, जो बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) की गांधी रोड शाखा में जूनियर जॉइंट कस्टोडियन के पद पर तैनात था। इसी शाखा में आरबीआई का मुख्य करेंसी चेस्ट भी मौजूद है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कडियार के पास ही थी। करीब 15 साल से बैंक में ईमानदारी से काम कर रहे हर्षिद्द के मन में अचानक ‘लक्जरी लाइफ’ जीने का लालच जागा और उसने इस खौफनाक वारदात का ब्लू प्रिंट तैयार कर डाला।

‘बक्सों में कचरा है, फेंकने जा रहा हूं’… और पार कर दिए ₹8.70 करोड़

एनआईए और पुलिस जांच में सामने आए सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से इस चोरी का लाइव सीन देखकर हर कोई दंग है। 13 जनवरी की रात ठीक 9:12 बजे आरोपी हर्षिद्द कडियार ने बैंक के ही दो कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों को भरोसे में लिया। उसने भारी-भरकम लोहे के बक्सों में करोड़ों रुपए कैश ठूंस-ठूंस कर भरे और उन्हें एक ट्रॉली पर लाद दिया। जब बैंक के अन्य सुरक्षाकर्मियों और स्टाफ ने टोकना चाहा, तो उसने बेहद शातिर अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा— “बक्सों में रद्दी और कचरा भरा है, इसे बाहर फिंकवाने जा रहा हूं।” कोई कस्टोडियन पर शक नहीं कर सकता था, इसलिए वह आसानी से खजाना लेकर बाहर निकल गया।

90 दिनों का ‘डिलीट फॉर्मूला’ पड़ गया उल्टा

आरोपी कर्मचारी कोई नौसिखिया नहीं था, वह बैंक के टेक्निकल सिस्टम को अच्छी तरह समझता था। चोरी को अंजाम देने के बाद भी वह डरा नहीं, बल्कि बेहद शातिर चाल चलते हुए 20 अप्रैल तक लगातार 3 महीने (90 दिन) बिना किसी छुट्टी के रोज ड्यूटी पर आता रहा। दरअसल, उसे अच्छी तरह मालूम था कि बैंक के सीसीटीवी कैमरों का बैकअप डेटा ठीक 90 दिनों के बाद ऑटो-डिलीट (अपने आप साफ) हो जाता है। उसे लगा कि एक बार फुटेज डिलीट हो गई, तो उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं बचेगा। 90 दिन बीतने के बाद वह लंबी मेडिकल लीव (बीमारी की छुट्टी) लेकर गायब हो गया।

नए प्रभारी के ‘सरप्राइज ऑडिट’ ने बिगाड़ा खेल, मनाली में मना रहा था जश्न

आरोपी का ‘परफेक्ट मर्डर’ जैसा प्लान तब पूरी तरह फेल हो गया, जब आरबीआई के बड़े निरीक्षण से पहले करेंसी चेस्ट में एक नए प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति हुई। नए कस्टोडियन ने चार्ज संभालते ही जब नोटों की गिनती और नियमित जांच (सरप्राइज ऑडिट) की, तो खजाने में ₹8.70 करोड़ कम पाए गए। इसके बाद बैंक में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में 15 मई को कालूपुर पुलिस स्टेशन में आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई। जब बैकअप खंगाला गया, तो सिस्टम से डिलीट होने से ठीक पहले 13 जनवरी की वह फुटेज पुलिस के हाथ लग गई।

कार की डिक्की से उगले ₹2.2 करोड़, चांदखेड़ा में खरीदा बंगला और क्रिप्टो में निवेश

चोरी का भंडाफोड़ होते ही जब पुलिस ने आरोपी हर्षिद्द के घर पर छापा मारा, तो वह परिवार समेत हिमाचल प्रदेश के मनाली में छुट्टियां मना रहा था। पुलिस ने उसके घर के नीचे खड़ी उसकी कार की डिक्की की तलाशी ली, तो उसमें से ₹2.20 करोड़ की नगदी बरामद हुई। 22 मई को पुलिस ने सोला इलाके से घेराबंदी कर आरोपी को दबोच लिया, जिसे कोर्ट ने 27 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पूछताछ में आरोपी ने कुबूल किया कि वह करीब ₹4 करोड़ खर्च कर चुका है, जिससे उसने चांदखेड़ा में एक आलीशान बंगला, अहमदाबाद में एक दुकान और एक कॉमर्शियल गाड़ी खरीदी है।

महिला मित्र को दिए ₹28 लाख, पत्नी भी जांच के घेरे में

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अपनी एक महिला सहकर्मी (महिला बैंककर्मी) को मकान खरीदने के लिए ₹23 लाख का ऑनलाइन ट्रांसफर और ₹5 लाख नगद (कुल ₹28 लाख) दिए थे। इसके अलावा, उसने ब्लैक मनी को व्हाइट करने और रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में चोरी की रकम का एक बड़ा हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency Market) में भी इनवेस्ट कर दिया था। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी की पत्नी रेलवे पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात है। पुलिस अब इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि क्या इस महाचोरी और पैसों को ठिकाने लगाने में उसकी पुलिसकर्मी पत्नी की भी कोई मिलीभगत थी या नहीं। मामले में पुलिस ने कैश ट्रांसफर में मदद करने वाले सुल्तान और जुल्फिकार नाम के दो अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है।

पुलिस हिरासत में बैंककर्मी आरोपी हर्षिद्द कडियार।

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