Wednesday , 17 June 2026

ट्रंप कैबिनेट को बड़ा झटका: पहली हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड का डायरेक्टर पद से इस्तीफा, जानिए अचानक क्यों लिया फैसला

वॉशिंगटन।  अमेरिकी राजनीति और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन से इस वक्त की बेहद भावुक और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी संसद की पहली हिंदू सांसद और ट्रंप कैबिनेट में सबसे ताकतवर पदों में से एक—नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर (DNI) के पद पर तैनात तुलसी गबार्ड (Tulsi Gabbard) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। तुलसी गबार्ड ने यह बड़ा और कड़ा फैसला किसी राजनीतिक मतभेद के कारण नहीं, बल्कि अपने पति अब्राहम विलियम्स की बेहद गंभीर बीमारी के चलते लिया है। इस मुश्किल घड़ी में वह अपने परिवार और पति के साथ खड़ी होना चाहती हैं।

दुर्लभ कैंसर की चपेट में आए पति अब्राहम, भावुक पत्र लिख कर दी जानकारी

फॉक्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति ट्रंप को सौंपे अपने आधिकारिक इस्तीफे में इस दर्दनाक सच का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनके पति अब्राहम को हाल ही में हड्डी का एक बेहद दुर्लभ प्रकार का कैंसर (Rare Bone Cancer) होने का पता चला है। गबार्ड ने लिखा कि इस जानलेवा बीमारी से लड़ने और इस मुश्किल वक्त में अपने जीवनसाथी का हाथ थामने के लिए उनका सरकारी सेवा से हटना बेहद जरूरी हो गया है। इसीलिए वह नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जैसे अति-महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी को छोड़ रही हैं।

ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति ट्रंप से की मुलाकात, इस तारीख को होगा आखिरी दिन

तुलसी गबार्ड ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्यक्तिगत मुलाकात की और उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया। ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (ODNI) में उनका आखिरी दिन 30 जून, 2026 होने की उम्मीद है।

अपने रेजिग्नेशन लेटर में गबार्ड ने ट्रंप का आभार जताते हुए लिखा, “आपने मुझ पर जो भरोसा दिखाया और पिछले डेढ़ साल से नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर के ऑफिस का नेतृत्व करने का जो मौका दिया, उसके लिए मैं आपकी सदैव आभारी रहूंगी। लेकिन दुर्भाग्य से मुझे अपना इस्तीफा देना पड़ रहा है, जो 30 जून 2026 से प्रभावी होगा। मेरे पति को आने वाले हफ्तों और महीनों में एक बहुत बड़ी और कठिन मेडिकल चुनौती का सामना करना है।”

‘वह हमेशा मेरी ताकत बने, अब अकेले इस लड़ाई को लड़ने नहीं दे सकती’

अपने इस्तीफे के पत्र में तुलसी ने अपनी शादीशुदा जिंदगी और पति के समर्पण का भी जिक्र किया। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में लिखा, “इस समय, मुझे सार्वजनिक सेवा (Public Service) से हटकर उनके साथ रहना होगा और इस जंग में उनका पूरी तरह से साथ देना होगा। हमारी शादी के 11 सालों में अब्राहम हमेशा मेरे लिए एक मजबूत चट्टान की तरह खड़े रहे हैं। चाहे वह पूर्वी अफ्रीका में एक जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस मिशन पर मेरी तैनाती का समय रहा हो, मेरे कई राजनीतिक अभियान हों, या फिर इस उच्च पद पर मेरी सेवा—वह हमेशा मेरे साथ मजबूती से खड़े रहे। उनकी ताकत और प्यार ने मुझे हर चुनौती में संभाला है। इसलिए, मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज को दबाकर उनसे यह नहीं कह सकती कि वह कैंसर जैसी भयानक लड़ाई का अकेले सामना करें, ताकि मैं इस बेहद व्यस्त और जिम्मेदारी वाले पद पर बनी रहूं।” उन्होंने आगे लिखा कि देश की सेवा करने का जो सम्मान उन्हें मिला, उसके लिए वह अमेरिकी जनता की हमेशा कर्जदार रहेंगी।

कार्यकाल में लिए थे बड़े फैसले: $700 मिलियन की बचत और गुप्त फाइलों का खुलासा

तुलसी गबार्ड का डेढ़ साल का यह कार्यकाल बेहद ऐतिहासिक और सुधारों से भरा रहा। DNI के तौर पर उन्होंने अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी (IC) का पूरा ढर्रा ही बदल दिया था। उनके कुछ सबसे बड़े फैसले इस प्रकार थे:

  • करदाताओं के पैसों की बचत: उन्होंने एजेंसी का आकार छोटा (Downsize) करके अमेरिकी टैक्सपेयर्स के हर साल $700 मिलियन (करीब 5800 करोड़ रुपये) से ज्यादा बचाए।

  • DEI प्रोग्राम्स का खात्मा: उन्होंने इंटेलिजेंस कम्युनिटी में चल रहे विवादित डीईआई (Diversity, Equity, and Inclusion) प्रोग्राम्स को पूरी तरह समाप्त कर दिया।

  • लाखों गुप्त दस्तावेज किए सार्वजनिक: इस महीने तक गबार्ड ने अमेरिकी सरकार के रिकॉर्ड के 5 लाख से ज्यादा खुफिया पन्नों को पब्लिक (Declassify) कर दिया। इनमें ट्रंप-रूस जांच, जेएफके (JFK) और आरएफके (RFK) की हत्याओं से जुड़े बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक रिकॉर्ड शामिल हैं।

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