आज यानी 21 मई 2026, दिन गुरुवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। सनातन परंपरा में आज का दिन बेहद खास और पवित्र माना जा रहा है, क्योंकि आज की तिथि की रक्षक स्वयं माता ललिता त्रिपुर सुंदरी हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार, आज का दिन सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम है। अगर आप आज कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं, वाहन, जमीन या सोना खरीदना चाहते हैं, तो आज का दिन आपके लिए भाग्यशाली साबित हो सकता है।
आज का पंचांग और ग्रह नक्षत्रों की स्थिति
आज ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति आपके जीवन पर गहरा प्रभाव डालने वाली है। विक्रम संवत 2082 के अनुसार आज का पूरा लेखा-जोखा इस प्रकार है:
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विक्रम संवत: 2082
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मास व पक्ष: ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष पंचमी
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वार: गुरुवार
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आज का योग: गंड
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आज का करण: बलव
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चंद्र राशि: कर्क
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सूर्य राशि: वृषभ
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सूर्योदय का समय: सुबह 05:26:00 AM
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सूर्यास्त का समय: शाम 07:09:00 PM
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चंद्रोदय: सुबह 09:53 AM
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चंद्रास्त: रात 11:54 PM
पुष्य नक्षत्र और गुरुवार का दुर्लभ संयोग, बरसेगी सुख-समृद्धि
आज का सबसे बड़ा आकर्षण ‘पुष्य नक्षत्र’ है, जिसे सभी 27 नक्षत्रों का राजा और सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र माना जाता है। आज चंद्रमा कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं और पुष्य नक्षत्र का विस्तार कर्क राशि में दोपहर 03:20 से शाम 04:40 तक विशेष रूप से रहेगा।
पुष्य नक्षत्र के देवता देवगुरु बृहस्पति हैं और इसके स्वामी ग्रह कर्मफल दाता शनिदेव हैं। गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का होना एक अत्यंत दुर्लभ और मंगलकारी संयोग बनाता है। शनिदेव के प्रभाव से आज आपके कार्यों में धैर्य, निरंतरता और स्थिरता आएगी, जिससे सफलता मिलने के योग शत-प्रतिशत बढ़ जाते हैं। वहीं गुरु और शनि के इस अनूठे प्रभाव से ज्ञान, बुद्धि, व्यापार में वृद्धि और आर्थिक समृद्धि के द्वार खुलेंगे।
राहुकाल का समय: भूलकर भी इस अवधि में न करें शुभ काम
शास्त्रों के अनुसार, जहां आज का दिन बेहद शुभ है, वहीं दिन के कुछ समय में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। आज दोपहर 02:00 बजे से लेकर शाम 03:43 बजे तक राहुकाल रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अत्यंत दूषित और वर्जित समय माना गया है। इस दौरान शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य विघ्न-बाधाओं से घिर सकता है। इसके अलावा आज के दिन यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम काल में भी कोई नया या मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। यदि कोई अत्यंत जरूरी काम हो, तो राहुकाल बीत जाने के बाद ही उसे अमलीजामा पहनाएं।
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