पश्चिम एशिया से शुरू हुआ अमेरिका और ईरान का पुराना विवाद अब सुलगते हुए भारत के करीब हिंद महासागर तक पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद सनसनीखेज और गुप्त ऑपरेशन को अंजाम देते हुए हिंद महासागर में ईरान से जुड़े एक विशालकाय तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े तेवरों के बीच हुई इस बड़ी कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बीच एक ऐसा बयान भी दे दिया है जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। उन्होंने साफ कहा कि वह ईरान पर एक भीषण सैन्य हमला शुरू करने से महज “एक घंटे की दूरी” पर थे।
मलेशिया के पास दबोचा गया ईरान का ‘स्काईवेव’
अमेरिकी प्रशासन से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जिस जहाज को बीच समंदर में घेराबंदी करके रोका गया है, उसकी पहचान ‘स्काईवेव’ के रूप में हुई है। वॉशिंगटन का आरोप है कि यह टैंकर कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को धता बताकर अवैध रूप से ईरानी कच्चे तेल की तस्करी कर रहा था। इसी काली कमाई और तस्करी को रोकने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने इसी साल मार्च के महीने में इस जहाज पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे।
प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाने वाली ‘शैडो फ्लीट’ का पर्दाफाश
अमेरिकी खुफिया और सैन्य अधिकारियों के अनुसार, जब्त किया गया ‘स्काईवेव’ टैंकर असल में ईरान के कुख्यात “शैडो फ्लीट” (परछाईं बेड़ा) का हिस्सा था। दरअसल, यह उन गुप्त और बेनामी जहाजों का एक ऐसा खतरनाक नेटवर्क है, जिसका इस्तेमाल ईरान दुनिया की नजरों से बचकर और अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों को ताक पर रखकर चोरी-छिपे तेल का निर्यात करने के लिए करता है।
10 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल था मौजूद
शिप-ट्रैकिंग और समुद्री कारोबार से जुड़े ग्लोबल डेटा ‘लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस’ के आंकड़ों से पता चला है कि यह ईरानी टैंकर मंगलवार को मलेशिया के पश्चिमी हिस्से से गुजरते हुए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मलक्का स्ट्रेट को पार कर चुका था। सैटेलाइट और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महाकाय टैंकर में 10 लाख बैरल से भी अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस तेल को इसी साल फरवरी में ईरान के सबसे बड़े और मुख्य तेल निर्यात केंद्र ‘खार्ग द्वीप’ से भरा गया था।
दो महीने पहले भी अमेरिका ने बिछाया था जाल
हिंद महासागर में अमेरिकी सेना की यह दादागीरी या कार्रवाई कोई पहली बार नहीं देखी गई है। अमेरिका लंबे समय से ईरानी तेल के अवैध कारोबार पर नजर गड़ाए बैठा है। इससे पहले अप्रैल के महीने में भी अमेरिकी नौसेना ने इसी हिंद महासागर क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘मेजेस्टिक एक्स’ और ‘टिफानी’ नाम के दो और बड़े ईरानी जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया था। उन जहाजों पर भी पाबंदियों को तोड़कर तेल सप्लाई करने का गंभीर आरोप था।
आखिर ईरान के तेल के पीछे क्यों पड़ा है वॉशिंगटन?
दरअसल, अमेरिका काफी समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी आर्थिक रीढ़ यानी तेल व्यापार को पूरी तरह से तबाह करने की कोशिश में जुटा है। वॉशिंगटन का सीधा और स्पष्ट आरोप है कि ईरान इस अवैध तेल व्यापार से मिलने वाले अरबों डॉलर के फंड का इस्तेमाल खतरनाक मिसाइलें बनाने, अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने और मिडिल ईस्ट में एक्टिव अपने प्रॉक्सी व सहयोगी उग्रवादी गुटों को मजबूत करने में करता है। यही वजह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बार आर्थिक प्रतिबंधों के साथ-साथ समुद्री रास्तों पर मिलिट्री सर्विलांस को कई गुना बढ़ा दिया है।
‘सिर्फ एक घंटे दूर था सैन्य हमला’ – ट्रंप की खुली धमकी
इस समुद्री डकैती या जब्ती की कार्रवाई के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक बेहद डराने वाला बयान दिया है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस से कहा कि वह ईरान पर एक विनाशकारी सैन्य हमला शुरू करने का अंतिम आदेश देने से “सिर्फ एक घंटे दूर” थे। सब कुछ तय हो चुका था, लेकिन खाड़ी के कुछ मित्र देशों (Gulf Countries) के आखिरी वक्त पर किए गए विशेष आग्रह के बाद उन्होंने इस फैसले को फिलहाल टाल दिया। हालांकि, ट्रंप ने दोटूक लहजे में चेतावनी दी कि अगर ईरान ने परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी शर्तों को नहीं माना, तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
दुनिया भर में बढ़ सकता है कच्चे तेल का संकट
अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट्स और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर और अरब सागर में अमेरिका-ईरान की यह ताजा तनातनी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। चूंकि दुनिया के सबसे प्रमुख और व्यस्त तेल व्यापार मार्ग इसी समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरते हैं, ऐसे में इस टकराव के कारण आने वाले दिनों में ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
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