नई दिल्ली/सीकर/पुणे: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी 2026’ में कथित पेपर लीक मामले ने अब आजाद भारत के सबसे बड़े एजुकेशन स्कैम का रूप ले लिया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में हर दिन ऐसे खौफनाक खुलासे हो रहे हैं, जो न सिर्फ देश की पूरी परीक्षा प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, बल्कि यह भी दिखा रहे हैं कि किस तरह लाखों ईमानदार छात्रों के भविष्य को करोड़ों रुपये के खेल में दांव पर लगा दिया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह कोई साधारण या स्थानीय स्तर का पेपर लीक नहीं था। यह एक बेहद शातिर और संगठित नेशनल नेटवर्क था, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े एक्सपर्ट टीचर्स, रसूखदार बिचौलिए, मोटी रकम फेंकने वाले छात्रों के परिवार और कई राज्यों में फैले हाई-प्रोफाइल एजेंट शामिल थे।
अब तक 9 गिरफ्तार: टेलीग्राम, व्हाट्सएप और आईफोन से चलता था पूरा सिंडिकेट
सीबीआई ने इस महाघोटाले की कड़ियां जोड़ते हुए अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों से कुल 9 मुख्य आरोपियों को दबोच लिया है। इस नेटवर्क का जाल राजस्थान के जयपुर और सीकर, हरियाणा के गुरुग्राम, महाराष्ट्र के नासिक, पुणे और अहिल्यानगर (अहमदनगर) जैसे बड़े शहरों तक फैला हुआ था। जांच एजेंसी का दावा है कि इस सिंडिकेट का काम पूरी तरह कॉर्पोरेट स्टाइल में चलता था। सबसे पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अंदरूनी लोगों के जरिए प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई जाती थी। इसके बाद चुनिंदा अमीर छात्रों और उनके परिवारों से संपर्क कर 30-30 लाख रुपये की डील की जाती थी। सौदा पक्का होते ही टेलीग्राम, व्हाट्सएप और पासवर्ड प्रोटेक्टेड पीडीएफ फाइलों के जरिए लीक सवाल भेजे जाते थे।

राजस्थान से शुरू हुआ पूरा खेल: मंगीलाल बिवाल निकला पेपर का बड़ा ‘डिस्ट्रिब्यूटर’
सीबीआई की तफ्तीश में सामने आया है कि इस घिनौने खेल की स्क्रिप्ट सबसे पहले राजस्थान की धरती पर लिखी गई थी। राजस्थान के सीकर और जयपुर में बैठा एक बड़ा नेटवर्क लीक पेपर हासिल करने और उसे दूसरे राज्यों में सप्लाई करने में जुटा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, मंगीलाल बिवाल इस पूरे नेटवर्क का सबसे अहम मोहरा था। आरोप है कि मंगीलाल ने अपने बेटे और कई अन्य रसूखदार छात्रों के लिए लीक प्रश्नपत्र हासिल किए थे। सीबीआई ने जब मंगीलाल को दबोचकर उसका मोबाइल फोन खंगाला, तो उसमें नीट-यूजी 2026 से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज और चैट बरामद हुए। जांच में साफ हुआ है कि मंगीलाल ने व्हाट्सएप के जरिए लीक पेपर की डिमांड की थी और इसके लिए लाखों की एडवांस डील हुई थी।
अपने बेटे-रिश्तेदारों को बांटी कॉपियां, जानकार टीचर तक भी पहुंचाए सवाल
सीबीआई के मुताबिक, मंगीलाल ने लीक पेपर सिर्फ अपने परिवार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वह इस नेटवर्क में एक बड़े ‘डिस्ट्रिब्यूटर’ (वितरक) की भूमिका निभा रहा था। आरोप है कि पेपर हाथ लगते ही उसने अपने बेटे अमन बिवाल, रिश्तेदार ऋषि और गुंजन समेत कई उम्मीदवारों को लीक प्रश्नपत्रों की प्रिंटेड कॉपियां उपलब्ध कराईं ताकि वे उत्तर रट सकें। इतना ही नहीं, मंगीलाल ने अपने एक परिचित शिक्षक सत्यनारायण तक भी यह लीक प्रश्नपत्र पहुंचाया था। सीबीआई अब मंगीलाल से यह उगलवाने में जुटी है कि उसे परीक्षा से कितने घंटे पहले यह ओरिजिनल पेपर मिल गया था।
भाई दिनेश बिवाल ने 30 लाख में खरीदा था पेपर, एक ही परिवार के 4 सदस्य पहले से सिलेक्टेड!
इस पूरे मामले में मंगीलाल के भाई दिनेश बिवाल की भूमिका ने सीबीआई के भी कान खड़े कर दिए हैं। दिनेश का बेटा विकास बिवाल सीकर में नीट की तैयारी कर रहा था। सीबीआई जांच में आधिकारिक तौर पर सामने आया है कि दिनेश बिवाल ने अप्रैल 2026 के आखिरी हफ्ते में करीब 30 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम देकर प्रश्नपत्र खरीदा था। एजेंसी अब उन बैंक खातों और रूट का पता लगा रही है जहां यह 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि पिछले कुछ वर्षों में बिवाल परिवार के ही चार सदस्य नीट परीक्षा पास कर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला ले चुके हैं। इसके बाद सीबीआई को शक है कि यह नेटवर्क देश में कई सालों से सक्रिय था और हर साल इसी तरह सीटें बेची जा रही थीं।
गुरुग्राम का यश यादव था बड़ा बिचौलिया: ‘और छात्र लाओ, पेपर मुफ्त में ले जाओ’ का ऑफर
पूछताछ के दौरान आरोपी छात्र विकास बिवाल ने एक और सनसनीखेज राज उगला। विकास ने बताया कि सीकर में कोचिंग के दौरान उसकी मुलाकात हरियाणा के गुरुग्राम के रहने वाले यश यादव से हुई थी। यश यादव ने सीधे दावा किया था कि उसकी सेटिंग ऊपर तक है और वह मोटी रकम के बदले नीट का लीक पेपर दिला सकता है। विकास के मुताबिक, यश ने उसके छोटे भाई अमन के लिए भी सौदा तय किया था। हद तो तब हो गई जब यश यादव ने विकास को एक ‘स्कीम’ दी कि अगर वह अपने साथ कुछ और अमीर उम्मीदवारों को जोड़कर लाएगा, तो उसे खुद का पेपर बिल्कुल मुफ्त में दे दिया जाएगा। इस लालच में आकर विकास ने कई छात्रों को इस दलदल में घसीटा और उनकी पूरी डिटेल व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिए यश यादव को भेज दी।
यश यादव ने आईफोन से डिलीट किए सबूत, नासिक के शुभम ने मांगे थे ब्लैंक चेक
गुरुग्राम का रहने वाला यश यादव इस पूरे रैकेट का सबसे बड़ा बिचौलिया बनकर उभरा है, जो सीधे सप्लायरों और छात्रों के बीच पुल का काम कर रहा था। टेलीग्राम पर पीडीएफ फाइलों के जरिए प्रश्नपत्र भेजने के बाद, जैसे ही छापेमारी शुरू हुई, यश यादव ने चालाकी दिखाते हुए अपने आईफोन से कई अहम चैट्स और डिजिटल सबूत डिलीट कर दिए। हालांकि, सीबीआई ने उसका आईफोन जब्त कर फॉरेंसिक लैब (FSL) भेज दिया है, जहां से डेटा रिकवर किया जा रहा है। इसी कड़ी में नासिक के शुभम का नाम भी सामने आया है, जो शुरुआती स्तर पर प्रश्नों की सप्लाई कर रहा था। शुभम ने यश यादव को भरोसा दिया था कि वह फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 500-600 ऐसे सवाल दे सकता है, जिन्हें रटकर छात्र सीधे टॉप कर जाएंगे। इसके बदले शुभम ने छात्रों के 10वीं-12वीं के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स, नीट रोल नंबर और सिक्योरिटी के तौर पर लाखों रुपये के ब्लैंक चेक एडवांस में अपने पास रख लिए थे। 29 अप्रैल 2026 को टेलीग्राम पर यह पीडीएफ फाइलें भेजी गई थीं, जो अब सीबीआई के कब्जे में हैं।
पुणे का प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी गिरफ्तार: घर पर ‘सीक्रेट क्लास’ चलाकर रटवाए असली सवाल
सीबीआई जांच का सबसे बड़ा और हिलाकर रख देने वाला धमाका महाराष्ट्र के पुणे से हुआ है। एजेंसी ने यहां के नामी केमिस्ट्री लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया है। सबसे संगीन बात यह है कि प्रोफेसर कुलकर्णी खुद एनटीए की परीक्षा प्रक्रिया और पैनल से जुड़े हुए थे, जिसके कारण उनकी पहुंच सीधे ओरिजिनल प्रश्नपत्रों तक थी। आरोप है कि अप्रैल 2026 के आखिरी हफ्ते में कुलकर्णी ने पुणे स्थित अपने निजी आवास को एक सीक्रेट ठिकाने में बदला और वहां चुनिंदा छात्रों की गुप्त क्लास बुलाई। इस क्लास में प्रोफेसर खुद छात्रों को केमिस्ट्री के असली सवाल, उनके ऑप्शन और सही जवाब बोल-बोलकर डिक्टेट कराते थे और छात्र उन्हें अपनी कॉपियों में नोट करते थे। सीबीआई ने जब इन छात्रों की नोटबुक जब्त की और उसका मिलान 3 मई को हुए असली नीट-यूजी 2026 के प्रश्नपत्र से किया, तो अधिकारियों के होश उड़ गए; नोटबुक के सवाल और परीक्षा का पेपर हूबहू मैच कर रहे थे। कुलकर्णी ही इस केमिस्ट्री पेपर लीक का मुख्य सोर्स माना जा रहा है।
कूरियर बनी मनीषा वाघमारे, बॉटनी एक्सपर्ट मनीषा मंधारे निकली बायोलॉजी लीक की मास्टरमाइंड
पुणे से ही गिरफ्तार की गई मनीषा वाघमारे इस सिंडिकेट की मुख्य ‘कूरियर’ थी, जो पैसों वाली पार्टियों (छात्रों) को फांसकर प्रोफेसर कुलकर्णी की सीक्रेट क्लास तक सुरक्षित पहुंचाने का काम करती थी। इसके साथ ही, सीबीआई ने बायोलॉजी (जीव विज्ञान) सेक्शन को लीक करने वाली मुख्य मास्टरमाइंड और पुणे की सीनियर बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को भी बेनकाब कर गिरफ्तार कर लिया है। मनीषा मंधारे भी एनटीए की आधिकारिक एक्सपर्ट टीम का हिस्सा थीं, जिन्हें बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्नपत्रों की पूरी जानकारी थी। उन्होंने भी अपने घर पर छात्रों का गुप्त बैच बनाकर परीक्षा में आने वाले सवालों को कॉपियों में लिखवाया और किताबों में बाकायदा टिक मार्क लगवाए। इस ‘गारंटीड पास’ फॉर्मूले के बदले हर छात्र के परिवार से लाखों रुपये लूटे गए।
डिजिटल ट्रेल और वित्तीय लेन-देन खंगाल रही सीबीआई, पूरे देश में भारी गुस्सा
इनके अलावा महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से दबोचे गए धनंजय लोखंडा की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जो छात्रों और मुख्य सप्लायरों के बीच को-ऑर्डिनेटर का काम कर रहा था। सीबीआई अब इस पूरे रैकेट के वित्तीय साम्राज्य, हवाला नेटवर्क, डिजिटल ट्रेल और एनटीए (NTA) के शीर्ष अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की गहराई से तफ्तीश कर रही है। देश भर से जब्त किए गए दर्जनों मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और बैंक रिकॉर्ड्स की जांच के लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है। सीबीआई ने कोर्ट को बताया है कि इस महाघोटाले की अंतिम तह तक जाने और असली सरगना को बेनकाब करने के लिए इन सभी आरोपियों से कस्टडी में आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है। बहरहाल, हर साल डॉक्टर बनने का सपना लेकर दिन-रात एक करने वाले देश के लाखों ईमानदार छात्रों और उनके माता-पिता के बीच इस खुलासे के बाद भारी गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है।
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