कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए दिन नए सियासी भूचाल देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार का विवाद सीधे अदालत के गलियारे से निकला है। कलकत्ता हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकील की ड्रेस (काला कोट और सफेद बैंड) पहनकर पेश होने पर एक नया कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने ममता बनर्जी के वकालत करने के वैध लाइसेंस पर संदेह व्यक्त किया है और इस मामले की आधिकारिक जांच के आदेश दे दिए हैं। बीसीआई चेयरमैन ने तीखा तंज कसते हुए यह तक कह दिया कि आजकल कई फर्जी लोग भी सक्रिय रहते हैं, इसलिए इस मामले की पूरी पुष्टि करना बेहद आवश्यक है।
चुनावी हिंसा की याचिका पर पैरवी करने खुद पहुंचीं ममता
इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले की शुरुआत साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) से हुई। कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल की बेंच के सामने जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो हर कोई उस वक्त हैरान रह गया जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वकील की पारंपरिक वेशभूषा में अदालत में खड़ी हो गईं। उन्होंने एक एडवोकेट के तौर पर जजों के सामने अपनी पार्टी का पक्ष पुरजोर तरीके से रखा।
सुप्रीम कोर्ट में साधारण वेशभूषा, हाईकोर्ट में काला कोट: उठे सवाल
ममता बनर्जी के इस कदम पर बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने एक विरोधाभास की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब ममता बनर्जी आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट गई थीं, तब वह वकील की वेशभूषा में नहीं थीं। लेकिन इस बार, कलकत्ता हाईकोर्ट में उन्होंने बार काउंसिल द्वारा निर्धारित ड्रेस कोड पहनकर कोर्ट में पैरवी की, जो कई कानूनी सवाल खड़े करता है।
बार काउंसिल ने बंगाल काउंसिल से दो दिन में मांगी रिपोर्ट
इस घटनाक्रम के तुरंत बाद एक्शन में आते हुए बीसीआई ने पश्चिम बंगाल राज्य बार काउंसिल को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए ममता बनर्जी के कानूनी प्रैक्टिस के दर्जे (Status) की विस्तृत रिपोर्ट महज दो दिनों के भीतर तलब की गई है। परिषद ने मुख्य रूप से तीन अहम जानकारियां मांगी हैं:
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ममता बनर्जी का बार काउंसिल एनरोलमेंट नंबर (पंजीकरण संख्या) क्या है?
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उनके पंजीकरण (Registration) की आधिकारिक तारीख क्या थी?
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वर्तमान समय में उनका वकालत का स्टेटस क्या है?
संवैधानिक पद और वकालत का लाइसेंस: क्या टूटा नियम?
इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण और कानूनी पेंच यह है कि ममता बनर्जी साल 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री जैसे बेहद महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर आसीन रहीं। बार काउंसिल के सख्त नियमों के मुताबिक, यदि कोई पंजीकृत वकील किसी भी लाभकारी या संवैधानिक पद पर जाता है, तो उसे अपनी कानूनी प्रैक्टिस निलंबित (Suspend) करने की आधिकारिक सूचना बार काउंसिल को देनी होती है। बीसीआई अब इसी बात की बारीकी से जांच कर रही है कि क्या एक दशक से अधिक समय तक सक्रिय राजनीति और मुख्यमंत्री पद पर रहने के बाद, बिना तय प्रक्रिया पूरी किए उनका सीधे वकील के रूप में कोर्ट में पेश होना वैध है या नहीं।
जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज से की है कानून की पढ़ाई
अगर शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें, तो ममता बनर्जी के पास जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून (एलएलबी) की डिग्री है। वह कानून की स्नातक हैं, लेकिन डिग्री होने और सक्रिय प्रैक्टिस करने के नियमों में बड़ा अंतर होता है। अब हर किसी की नजरें पश्चिम बंगाल राज्य बार काउंसिल की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो दो दिनों में बीसीआई को सौंपी जानी है। इस रिपोर्ट के आने के बाद ही साफ होगा कि ममता बनर्जी का यह नया ‘अंदाज’ कानूनी रूप से सही था या फिर वे किसी नए संकट में फंसने वाली हैं।
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