कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में चकेरी पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसके तार कई राज्यों और बड़े बैंकों से जुड़े हुए हैं। फर्जी फर्मों और संदिग्ध ट्रांजेक्शन के खेल में गिरफ्तार हुए गिरोह के सरगना महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी ने पुलिस कस्टडी में ऐसे सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।
बैंकर की मिलीभगत और APMC का खेल
पुलिस की पूछताछ में आरोपित पप्पू छुरी ने बताया कि इस पूरे काले साम्राज्य को चलाने में IDBI बैंक के एक बैंकर सत्य प्रकाश की अहम भूमिका थी। पप्पू के मुताबिक, वह बैंकर को प्रति ट्रांजेक्शन करीब डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत देता था। इसके बदले में उसे APMC (एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी) के जरिए ‘अनलिमिटेड ट्रांजेक्शन’ की विशेष सुविधा मिलती थी। यह बैंकर मोटी रकम लेकर भारी-भरकम कैश निकालने और संदिग्ध लेनदेन को छिपाने में गिरोह की मदद करता था।
3000 करोड़ का ट्रांजेक्शन और 5% का कमीशन
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि गिरोह ने कुल 68 बैंक खातों के जरिए अब तक 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेनदेन किया है। पप्पू छुरी ने स्वीकार किया कि वह स्लॉटर हाउस (बूचड़खानों) और स्क्रैप कारोबारियों के काले धन को अपने खातों में मंगवाता था। इसके बाद वह 3 से 5 प्रतिशत कमीशन काटकर रकम को सफेद (White Money) बनाकर वापस कर देता था। इस काम के लिए गिरोह ने निर्दोष लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर दर्जनों फर्जी जीएसटी फर्में बना रखी थीं।
पांच राज्यों में फैला नेटवर्क, अब ED और GST की एंट्री
कानपुर पुलिस की जांच में इस गिरोह के तार उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल तक फैले मिले हैं। पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ किया है कि यह केवल पुलिस का मामला नहीं रह गया है।
“यह मामला बेहद संवेदनशील और बड़े आर्थिक अपराध से जुड़ा है। इसकी गहराई से जांच के लिए अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और GST समेत अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों का सहयोग लिया जाएगा।” – पुलिस आयुक्त, कानपुर
फिलहाल, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने सफेदपोश लोग और बैंक अधिकारी शामिल हैं। छापेमारी का दौर जारी है और जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।
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