Thursday , 28 May 2026

यूपी पंचायत चुनाव में बड़ा बदलाव: फर्जी वोटरों की खैर नहीं…इस हाईटेक सिस्टम से पकड़े जाएंगे फर्जीवाड़ा करने वाले

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब फर्जी वोटिंग के जरिए चुनाव जीतने का सपना देखने वालों के लिए बुरी खबर है। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब अगर कोई वोटर एक पोलिंग स्टेशन पर वोट डालने के बाद दोबारा कहीं और वोट डालने की कोशिश करेगा, तो उसे पलक झपकते ही पकड़ लिया जाएगा। इसके लिए आयोग ने ‘फेशियल रिकग्निशन सिस्टम’ (FRS) का सफल परीक्षण कर लिया है।

पायलट प्रोजेक्ट सफल: शाहजहांपुर और कुशीनगर में दिखा दम

राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने बताया कि इस अत्याधुनिक प्रणाली का पहला प्रयोग मंगलवार को शाहजहांपुर के कटरा और कुशीनगर के फाजिलनगर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के उपचुनाव में किया गया। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुल 50,257 मतदाताओं के चेहरे और आंखों की पुतलियों का मिलान किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। देश के चुनावी इतिहास में इस तरह का प्रयोग पहली बार उत्तर प्रदेश में किया गया है। इस सफलता के बाद अब इसे आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों और नगर निकाय चुनावों में भी लागू करने की तैयारी है।

कैसे काम करेगा FRS एप: मोबाइल ही बनेगा पहरेदार

इस नई व्यवस्था के तहत हर पोलिंग बूथ पर तैनात पीठासीन अधिकारियों के मोबाइल में FRS एप अपलोड किया जाएगा। वोटिंग के दौरान यह एप मोबाइल की अन्य सभी सुविधाओं (जैसे कॉलिंग और मैसेजिंग) को ब्लॉक कर देगा ताकि सुरक्षा बनी रहे।

  • वोटर आईडी का मिलान: जैसे ही कोई मतदाता बूथ पर पहुंचेगा, उसके फोटो आईडी कार्ड और मतदाता सूची का मिलान होगा।

  • रियल-टाइम फोटो: अधिकारी एप के जरिए वोटर की लाइव फोटो खींचेगा।

  • डेटा लॉक: फोटो खींचते ही उस वोटर का ‘स्टेट वोटर नंबर’ (SVN) और मतदान का समय ऑनलाइन डैशबोर्ड पर लॉक हो जाएगा।

  • फर्जीवाड़ा पकड़ना: यदि वही व्यक्ति दोबारा किसी दूसरे बूथ पर जाएगा, तो फोटो खींचते ही एप तुरंत पुराने मतदान की पूरी डिटेल अधिकारी के सामने पेश कर देगा।

ऑनलाइन मॉनिटरिंग और हाईटेक इंतजाम

राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्यालय से इस पूरे सिस्टम की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। सिर्फ यही नहीं, चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मियों के मोबाइल की बैटरी कितनी है, इसकी भी ऑनलाइन निगरानी होगी ताकि तकनीकी खराबी के कारण काम न रुके। यदि किसी मोबाइल की बैटरी कम होती है, तो तत्काल बैकअप उपलब्ध कराया जाएगा। इस विशेष कार्य के लिए मतदान कर्मियों को 200 रुपये मोबाइल डेटा खर्च के रूप में अलग से दिए जाएंगे।

इस तकनीक के आने से ‘टेंडर वोटिंग’ और ‘फर्जी वोटिंग’ जैसी समस्याओं पर पूरी तरह लगाम लगने की उम्मीद है। अब अपराधी प्रवृत्ति के लोग या एक से अधिक पहचान पत्र रखने वाले वोटर कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएंगे।

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