Tuesday , 26 May 2026

कानपुर में चिकन पॉक्स का कहर:  सावधानी हटी तो फेफड़ों और दिमाग तक पहुंचेगा इंफेक्शन…. डॉक्टर ने दी बड़ी चेतावनी !

कानपुर। शहर में पारा चढ़ते ही संक्रामक बीमारियों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। इस भीषण गर्मी के बीच ‘चिकन पॉक्स’ यानी छोटी माता का वायरस तेजी से सक्रिय हो गया है। हैलट अस्पताल की ओपीडी में हर दिन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भीड़ उमड़ रही है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लोग आज भी इसे डॉक्टरी बीमारी के बजाय ‘दैवीय प्रकोप’ मानकर अंधविश्वास का सहारा ले रहे हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

सावधानी हटी तो फेफड़ों और दिमाग तक पहुंचेगा इंफेक्शन

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. डी.पी. शिवहरे ने इस बीमारी को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने बताया कि चिकन पॉक्स को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। अगर सही समय पर इलाज न मिले तो यह वायरस शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर हमला कर देता है।

डॉ. शिवहरे के मुताबिक, “यह केवल त्वचा के दानों तक सीमित नहीं रहता। संक्रमण बढ़ने पर यह सेप्टीसीमिया (खून में जहर फैलना), वायरल निमोनिया और फेफड़ों में गंभीर इंफेक्शन पैदा कर सकता है। इतना ही नहीं, यह वायरस ब्रेन (दिमाग), लीवर और हार्ट तक को प्रभावित करता है। सबसे डरावना पहलू यह है कि अगर संक्रमण आंखों तक पहुंच जाए, तो आंखों की रोशनी भी हमेशा के लिए जा सकती है।”

कमजोर इम्यूनिटी वालों पर वायरस का ‘डेथ वारंट’

विशेषज्ञों का कहना है कि चिकन पॉक्स मुख्य रूप से कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) वाले लोगों को अपना शिकार बनाता है। पहले यह बीमारी ज्यादातर बच्चों में देखी जाती थी, लेकिन अब बड़ी उम्र के लोग और बुजुर्ग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। शरीर पर लाल दाने निकलना इसका शुरुआती लक्षण है, जो बाद में मवाद भरी पपड़ी में बदल जाते हैं। अगर इस अवस्था में लापरवाही बरती गई, तो मरीज को सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगती है।

झाड़-फूंक नहीं, डॉक्टरी सलाह ही बचाएगी जान

डॉ. शिवहरे ने साफ किया कि चिकन पॉक्स का इलाज अब पूरी तरह संभव है और मरीज 8 से 10 दिनों में पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि:

  • अंधविश्वास से बचें: ‘माता’ का प्रकोप समझकर घरेलू नुस्खों या झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें।

  • मरीज को अलग रखें: यह एक संक्रामक वायरस है, इसलिए मरीज के कपड़े, तौलिया, कंबल और तकिया परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रखें।

  • हाइजीन का रखें ख्याल: संक्रमण वाले दानों को छुएं नहीं, इससे दाग गहरे हो सकते हैं और संक्रमण फैल सकता है।

डॉक्टरों का सीधा संदेश है—गर्मी में निकलने वाले इन दानों को नजरअंदाज न करें। समय पर ली गई डॉक्टरी सलाह ही आपको और आपके परिवार को इस खतरनाक वायरस से सुरक्षित रख सकती है।

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