फर्रुखाबाद। जनपद के थाना कादरी गेट क्षेत्र से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। आवास विकास जैसे पॉश इलाके में सोमवार को कूड़े के ढेर में एक नवजात शिशु का शव मिलने से हड़कंप मच गया। जिस मासूम को गोद में होना चाहिए था, उसे बेरहमी से एक डिब्बे में बंद कर कचरे के हवाले कर दिया गया।
सफाई कर्मचारी ने खोला डिब्बा तो उड़े होश
मिली जानकारी के मुताबिक, हर रोज की तरह नगर पालिका का सफाई कर्मचारी आवास विकास इलाके में कूड़ा उठाने पहुंचा था। इसी दौरान उसकी नजर कूड़े के ढेर में पड़े एक संदिग्ध बंद डिब्बे पर पड़ी। जिज्ञासावश जब कर्मचारी ने डिब्बा खोला, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। डिब्बे के अंदर एक नवजात शिशु का निष्प्राण शरीर रखा हुआ था। यह खौफनाक मंजर देखकर कर्मचारी चिल्ला उठा, जिसके बाद देखते ही देखते वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
मौके पर पहुंचे आला अधिकारी, सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही कादरी गेट थाना प्रभारी कपिल चौधरी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ (ACMO) रंजन गौतम भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा नवजात को ठिकाने लगाने की कोशिश है। अब पुलिस इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि उस ‘कलयुगी’ शख्स का सुराग मिल सके जो मासूम को इस हाल में छोड़ गया।
निजी नर्सिंग होम के ‘खूनी खेल’ पर गहराया शक
हैरानी की बात यह है कि आवास विकास इलाके में नवजात का शव मिलने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में कई मासूमों के शव बरामद हो चुके हैं। बार-बार एक ही इलाके में ऐसे शव मिलना अब पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सूत्रों की मानें तो पुलिस की शक की सुई अब आसपास संचालित हो रहे अवैध निजी नर्सिंग होम की तरफ घूम गई है। आशंका जताई जा रही है कि अवैध प्रसव या भ्रूण हत्या जैसे काले कारोबार में लिप्त अस्पताल संचालक सबूत मिटाने के लिए नवजात के शवों को इस तरह फेंक रहे हैं।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई: एसीएमओ
एसीएमओ रंजन गौतम ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह कृत्य जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों की पहचान होते ही उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें अब निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती हैं। फिलहाल इस घटना ने स्थानीय निवासियों को झकझोर कर रख दिया है और प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है।
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