नई दिल्ली/चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (AAP) के चाणक्य कहे जाने वाले और हाल ही में भाजपा का दामन थामने वाले राज्यसभा सांसद संदीप पाठक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राघव चड्ढा के साथ ‘आप’ से बगावत कर राजनीतिक भूचाल लाने वाले पाठक के खिलाफ पंजाब में दो संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। ताजा अपडेट के मुताबिक, पंजाब पुलिस की एक टीम उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुंची है, जहां भारी बैरिकेडिंग कर दी गई है।
भ्रष्टाचार और महिला शोषण जैसे गंभीर आरोप
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संदीप पाठक के खिलाफ जो दो एफआईआर दर्ज हुई हैं, उनमें से एक मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है और दूसरा महिला शोषण के गंभीर आरोपों से संबंधित है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने इन मामलों में गैर-जमानती धाराएं लगाई हैं, जिसका मतलब है कि उनकी गिरफ्तारी की संभावना काफी प्रबल है। हालांकि, इन मामलों की आधिकारिक पुष्टि के लिए अभी विस्तृत पुलिस रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
#WATCH | Delhi: Punjab Police have reportedly filed two FIRs under sections for non-bailable offences against Rajya Sabha MP Sandeep Pathak. Both FIRs were filed in different districts of Punjab.
In a telephone conversation with ANI, he says, "I have no idea of any FIR against… pic.twitter.com/CmVSCFBbq8
— ANI (@ANI) May 2, 2026
पुलिस की दस्तक से पहले गायब हुए सांसद!
जब पंजाब पुलिस की टीम दिल्ली में उनके सरकारी आवास पर छापेमारी करने पहुंची, तो संदीप पाठक वहां मौजूद नहीं थे। खबर है कि पुलिस के पहुंचने से कुछ समय पहले ही वह घर से निकल गए। इस बीच, समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में संदीप पाठक ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, “मेरे खिलाफ किसी भी एफआईआर के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।” फिलहाल पुलिस उनकी लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है।
AAP के ‘चाणक्य’ से भाजपा के सिपाही तक का सफर
संदीप पाठक का नाम उन 7 प्रमुख सांसदों की लिस्ट में शामिल था, जिन्होंने राघव चड्ढा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी छोड़ दी थी। अप्रैल 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बने पाठक को अरविंद केजरीवाल का सबसे करीबी रणनीतिकार माना जाता था। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में ‘आप’ को मिली प्रचंड जीत का श्रेय उन्हीं के संगठनात्मक कौशल और डेटा-आधारित रणनीति को दिया जाता है। उनके भाजपा में जाने के बाद से ही पंजाब और दिल्ली की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं।
राजनीतिक बदले की कार्रवाई या कानून का शिकंजा?
संदीप पाठक के घर के बाहर इस वक्त तनाव का माहौल है। उनके समर्थकों और भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी छोड़ने के बदले में उन पर यह कार्रवाई की जा रही है। वहीं, पंजाब पुलिस के सूत्रों का कहना है कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं और कानून अपना काम कर रहा है। संदीप पाठक की संभावित गिरफ्तारी पंजाब की सियासत में एक नया मोड़ ला सकती है, क्योंकि वह पार्टी के अंदरूनी मैनेजमेंट के कई गहरे राज जानते हैं।
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