
वॉशिंगटन/तेहरान। दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। समुद्री बारूदी सुरंगें (सी-माइंस) बिछाने की आशंका को देखते हुए अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक लारक द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों पर जोरदार एयरस्ट्राइक की। इस हमले के फौरन बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पलटवार करते हुए जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर घातक बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दी हैं। हमलों की इस ताजा लहर से पश्चिम एशिया में सात महीनों से जारी संघर्ष अब और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है।
लारक द्वीप पर अमेरिकी स्ट्राइक, खदान बिछाने वाले लॉन्चर तबाह अमेरिकी सेना ने रविवार को लारक द्वीप पर सटीक हमला कर ईरान के दो प्रमुख मिसाइल लॉन्चरों को ध्वस्त कर दिया। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, IRGC के जवान होर्मुज स्ट्रेट के मुख्य शिपिंग रूट पर समुद्री खदानें गिराने वाले रॉकेट लॉन्च करने की फिराक में थे। जुलाई के अंत में सैन्य अभियान रोके जाने के बाद यह ईरानी सीमा के भीतर अमेरिका का पहला बड़ा सीधा हमला है। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के सुरक्षित प्रवाह को बनाए रखने के लिए सेना इलाके में हाई अलर्ट पर है। यह कार्रवाई तब हुई जब अमेरिका ने जलडमरूमध्य से माइंस हटाने का अभियान पूरा किया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा था कि समुद्री मार्ग में खदानें बिछाने वाले किसी भी पोत या ढांचे को ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत तत्काल नष्ट किया जाएगा।
ईरान का पलटवार: जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल अटैक लारक द्वीप पर हुए हमले में ईरानी सैन्यकर्मियों और नागरिकों के हताहत होने के बाद तेहरान ने खुली जंग का ऐलान कर दिया। IRGC ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन के किंग हुसैन और अल अज्रक स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। ईरानी मीडिया और तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी एयरस्ट्राइक में ड्रोन का भी इस्तेमाल हुआ था जिससे जानमाल का भारी नुकसान पहुंचा है। IRGC के प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि इस आक्रामकता की भारी कीमत अमेरिका को सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर चुकानी पड़ेगी।
सातवें महीने में पहुंचा संघर्ष, वैश्विक तेल सप्लाई पर संकट मध्य पूर्व में जारी यह सैन्य टकराव अब सातवें महीने में प्रवेश कर गया है। वॉशिंगटन जहां सैन्य दबाव के साथ-साथ वित्तीय प्रतिबंधों का शिकंजा कस रहा है, वहीं ईरान की सीधी मिसाइल कार्रवाइयों ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल के बड़े हिस्से का ट्रांजिट पॉइंट है। यदि यह मार्ग पूरी तरह बाधित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा पैदा हो जाएगा।
voice of india