Friday , 2 October 2026

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में घमासान: जंतर-मंतर छावनी में तब्दील, AAP और छात्र संगठनों के प्रदर्शन को पुलिस की ना. ..

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नई दिल्ली में सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। आम आदमी पार्टी (आप), वामपंथी छात्र संगठनों और विपक्षी नेताओं द्वारा 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर किए जाने वाले बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले ही पूरी लुटियंस दिल्ली को सुरक्षा के कड़े घेरे में ले लिया गया है। दिल्ली पुलिस ने इस प्रस्तावित प्रदर्शन को आधिकारिक अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जंतर-मंतर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों को पूरी तरह सील कर बैरिकेडिंग लगा दी है।

जंतर-मंतर पर आवाजाही पूरी तरह ठप, जनपथ मार्ग बंद

प्रशासन ने बृहस्पतिवार से ही सुरक्षा का सख्त पहरा बैठा दिया है। किसी भी आम नागरिक को जंतर-मंतर परिसर के भीतर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। जनपथ की तरफ से आने वाले मुख्य मार्ग समेत तमाम संपर्क सड़कों पर बहुस्तरीय बैरिकेड्स खड़े कर दिए गए हैं। पैदल आने-जाने वाले लोगों को भी पुलिस आगे बढ़ने से रोक रही है। दिल्ली पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की अतिरिक्त टुकड़ियों को चप्पे-चप्पे पर तैनात किया गया है, ताकि बिना इजाजत किसी भी प्रकार के जमावड़े या अनधिकृत मार्च को तत्काल रोका जा सके।

बिना अनुमति मार्च निकालने पर अड़े वामपंथी छात्र संगठन

दूसरी तरफ, छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) ने पुलिस की पाबंदी के बावजूद शुक्रवार को नई दिल्ली में विरोध मार्च निकालने का एलान किया है। छात्र नेताओं का कहना है कि अनुमति न मिलने के बाद भी वे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए बड़ी तादाद में जंतर-मंतर की ओर कूच करेंगे। इस विरोध मार्च में करीब 1,500 छात्रों और युवाओं के शामिल होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

एसआईआर और मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप, महाभियोग की मांग

इस व्यापक विरोध प्रदर्शन का आह्वान अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसए), राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज झा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मिलकर किया है। बुधवार को संयुक्त प्रेस वार्ता में एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, प्रशांत भूषण और मनोज झा ने चुनाव आयोग की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। आयोजकों ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में भारी अनियमितताएं की जा रही हैं, जिससे नागरिकों के मौलिक मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के साथ ही उन पर महाभियोग चलाने की मांग उठाई है।

जंतर-मंतर पर जुटने के लिए AAP नेताओं ने झोंकी ताकत

आम आदमी पार्टी ने भी इस प्रदर्शन को अपना खुला समर्थन देते हुए जनता और युवाओं से 2 अक्टूबर को सुबह 10 बजे बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है। पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निष्पक्ष न रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि वोट का अधिकार लोकतंत्र की आत्मा है और इसे बचाने के लिए नागरिकों को सड़कों पर उतरना होगा।

राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर चुनिंदा और व्यापक स्तर पर मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा रहे हैं। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के बिना सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही खत्म हो जाती है, जबकि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि मताधिकार ही जनता का सबसे बड़ा हथियार है और इसे किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तमाम अपीलों के चलते 3,000 से 4,000 लोगों के जुटने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

दिल्ली के बाद मुंबई में भी विरोध, सीजेपी ने दी आंदोलन की चेतावनी

चुनाव आयोग के खिलाफ यह असंतोष सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से त्यागपत्र नहीं देते हैं, तो यह आंदोलन देशभर में फैलाया जाएगा। इसी क्रम में सीजेपी ने 2 अक्टूबर को मुंबई के दादर स्थित ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करने की घोषणा की है, साथ ही मांग पूरी न होने पर अक्टूबर के अंत से जंतर-मंतर पर अनिर्दिष्टकालीन आंदोलन शुरू करने का अल्टीमेटम दिया है।

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