Monday , 31 August 2026

भारत-उज्बेकिस्तान के रिश्तों में नया मोड़: 2030 तक 5 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य, रक्षा से लेकर आयुर्वेद तक महाप्लान तैयार

 

नई दिल्ली। भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने कूटनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देते हुए संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (कंप्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) के स्तर तक ले जाने का बड़ा फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों की विकासात्मक आकांक्षाएं एक जैसी हैं और अब व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में साझेदारी का दायरा तेजी से बढ़ेगा।

रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष: मध्य एशिया का केंद्र बना उज्बेकिस्तान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेखांकित किया कि वर्ष 2026 में भारत और उज्बेकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी के 15 गौरवशाली वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक पड़ाव पर दोनों देश अपने संबंधों को अधिक महत्वाकांक्षी ढांचा देने पर सहमत हुए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि उज्बेकिस्तान मध्य एशिया के केंद्र में स्थित है और इस पूरे क्षेत्र के साथ भारत के जुड़ाव का मुख्य आधार है। ‘यंग उज्बेकिस्तान’ और ‘डेवलप्ड इंडिया 2047’ के विजन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि युवा, नवाचार, समावेशी विकास और आधुनिक तकनीक दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं में शामिल हैं। वर्तमान में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 1 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, जिसे अगले कुछ वर्षों में 5 गुना बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है।

रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन और आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस सुरक्षा और सामरिक क्षेत्र में दोनों देशों ने आपसी विश्वास को और मजबूत करने का संकल्प लिया। पीएम मोदी ने घोषणा की कि भविष्य में दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित किया जाएगा, जिसके तहत सह-उत्पादन (Co-production) और सह-विकास (Co-development) पर विशेष जोर रहेगा। इसके साथ ही आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों देशों ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। पीएम ने स्पष्ट किया कि ये चुनौतियां पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा हैं और इनसे मिलकर निपटा जाएगा।

कृषि, स्वास्थ्य और आयुर्वेद का बनेगा मजबूत गठबंधन आर्थिक और तकनीकी सहयोग के अलावा दोनों देशों ने कृषि, स्वास्थ्य सेवा और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में साझेदारी को नई दिशा दी है। उज्बेकिस्तान के बागवानी (हॉर्टिकल्चर) के समृद्ध अनुभव और भारत की आधुनिक कृषि पद्धतियों के समन्वय से दोनों देशों की खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में उज्बेकिस्तान की औषधीय जड़ी-बूटियों और भारत की आयुर्वेद विशेषज्ञता को मिलाकर वेलनेस और पारंपरिक चिकित्सा में नए वैश्विक अवसर तलाशे जाएंगे।

 

Check Also

ईरान पर ट्रंप प्रशासन का बड़ा वित्तीय प्रहार: हर हफ्ते लगेंगे नए प्रतिबंध, बैंक निशाने पर; भारत और चीन को भी. …

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। ईरान को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए अमेरिकी …