
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में मिठास बनाए रखने और कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। भारत ने देश में आपूर्ति बढ़ाने के उद्देश्य से 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त (ड्यूटी फ्री) आयात को हरी झंडी दी है, लेकिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से चीनी खरीदने से दो टूक इनकार कर दिया है। मोदी सरकार के इस कड़े रुख से पाकिस्तानी कारोबारियों के मंसूबों पर पानी फिर गया है, जो भारी मुनाफे की उम्मीद में भारतीय बाजार पर नजरें गड़ाए बैठे थे।
मई 2019 से लागू व्यापारिक पाबंदियां रहेंगी जारी केंद्र सरकार ने दो टूक स्पष्ट किया है कि मई 2019 से पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय व्यापार पर जो सख्त पाबंदियां लागू की गई थीं, वे बदस्तूर जारी रहेंगी। नियमों में किसी भी तरह की कोई ढील नहीं दी जाएगी। घरेलू बाजार में चीनी की किल्लत न हो और दरें नियंत्रण में रहें, इसके लिए आयात का रास्ता तो खोला गया है, लेकिन इसमें पाकिस्तान की कोई हिस्सेदारी नहीं होगी।
पाकिस्तानी कारोबारियों की उम्मीदों पर फिरा पानी भारत द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात के ऐलान के बाद पाकिस्तान के चीनी उद्योग में भारी हलचल देखी जा रही थी। वहां के चीनी मिल मालिकों और निर्यातकों ने अपनी सरकार पर दबाव बनाया था कि वे भारत को चीनी बेचने के रास्ते तलाशें। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान ने हाल ही में 1.05 लाख टन चीनी निर्यात के लिए एक वैश्विक टेंडर भी निकाला था और उन्हें उम्मीद थी कि भारत एक बड़ा और नजदीकी खरीदार बन सकता है।
विदेश मंत्रालय ने साफ की भारत की नीति इस मामले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति एकदम साफ है और इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। भारत को चीनी की आवश्यकता जरूर है, लेकिन इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्राजील समेत कई अन्य बड़े विकल्प मौजूद हैं। भारत अन्य मित्र देशों से चीनी की खरीद करेगा, लेकिन पाकिस्तान से किसी भी तरह का आयात नहीं किया जाएगा। सरकार के इस सख्त फैसले से पाकिस्तानी निर्यातकों को तगड़ा आर्थिक झटका लगा है।
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