Monday , 31 August 2026

नेपाल में प्रलयकारी बाढ़ का खौफनाक मंजर: 788 की मौत, 2500 लापता; सुरंगों में जिंदगी की जंग, त्रिशूली नदी के उफान में बहा 130 मीटर लंबा पुल

काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन को पांच दिन बीत जाने के बाद भी हालात बेहद विकराल बने हुए हैं। कुदरत के इस कहर में अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। मलबे के ढेर और उफनती नदियों के बीच हजारों परिवार अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। कई शव इतनी क्षत-विक्षत हालत में मिल रहे हैं कि उनकी शिनाख्त करना नामुमकिन हो गया है। प्रशासन पहचान से जुड़े डीएनए और अन्य सबूत सुरक्षित रखकर सामूहिक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। इसी बीच नदियों का जलस्तर दोबारा बढ़ने से राहत और बचाव कार्यों में भारी मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।

त्रिशूली नदी के उफान में बहा 130 मीटर लंबा पुल, सैकड़ों परिवार कटे राहत अभियानों के बीच मध्य नेपाल में त्रिशूली और भोटेकोशी नदियों ने एक बार फिर रौद्र रूप धारण कर लिया है। करीब तीन घंटे के प्रचंड बहाव में घ्यालचोक-चारौदी को जोड़ने वाला 130 मीटर लंबा अहम पुल पूरी तरह बह गया। यह पुल गोरखा जिले के घ्यालचोक इलाके को सीधे पृथ्वी हाईवे से जोड़ता था। इस पुल के टूटने से करीब 400 परिवारों का सड़क संपर्क देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट गया है। स्थानीय किसानों का दूध और सब्जियों का कारोबार ठप हो गया है क्योंकि उपज चारौदी की सहकारी मंडी तक नहीं पहुंच पा रही है। इससे पहले 26 अगस्त को धवादिघाट पुल भी सैलाब में समा चुका था, जिससे वैकल्पिक मार्ग भी पूरी तरह बंद हो गए हैं।

अंधेरी सुरंगों में रेस्क्यू ऑपरेशन: भारतीय टीम ने बचाईं सैकड़ों जानें सबसे चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा बचाव अभियान हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की भूमिगत सुरंगों में चल रहा है। रसुवा के ‘अपर त्रिशूली-1’ जलविद्युत परियोजना की टनल में फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना के साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें संयुक्त मोर्चा संभाले हुए हैं। भारतीय विशेषज्ञों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए सुरंग के 3 किलोमीटर भीतर तक प्रवेश किया और दो दिनों में 250 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं नुवाकोट के ‘अपर त्रिशूली-3ए’ प्रोजेक्ट में रास्ता खोलने के लिए सेना कंट्रोल्ड ब्लास्टिंग और स्निफर डॉग्स की मदद ले रही है।

ऑपरेशन जिंदगी: 394 एयर सॉर्टीज, 9400 से ज्यादा लोग सुरक्षित निकाले गए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा करते हुए बताया कि अब तक 9,435 लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया जा चुका है। बचाव कार्यों के लिए 394 हवाई उड़ानें (हेलीकॉप्टर सॉर्टीज) संचालित की गईं, जिनमें अकेले रविवार को 72 उड़ानें शामिल रहीं। हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट वाले बेहद दुर्गम इलाकों से 279 श्रमिकों को एयरलिफ्ट किया गया। जमीन पर सेना, पुलिस और सशस्त्र बलों के 20,618 जवान चौबीसों घंटे जान जोखिम में डालकर जिंदगियां बचाने में जुटे हैं। रसुवा और नुवाकोट में 26 अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां 3,450 से ज्यादा बेघर लोगों को भोजन और आश्रय दिया जा रहा है।

सच्चे मित्र की तरह खड़ा भारत: वायुसेना के C-130 विमान से पहुंची राहत सामग्री संकट की इस घड़ी में भारत लगातार नेपाल की मदद में आगे खड़ा है। भारतीय वायुसेना के विशेष विमान C-130J के जरिए 11 टन वजनी चौथी राहत खेप काठमांडू पहुंचाई गई, जिसमें आधुनिक सुरंग बचाव उपकरण, डीएनए टेस्टिंग किट और तकनीकी सामान शामिल हैं। भारत अब तक कुल 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसमें जरूरी दवाएं, पोर्टेबल जनरेटर, टेंट, रेडी-टू-ईट फूड, वाटर प्यूरीफायर टैबलेट्स, कंबल और संपर्क बहाल करने के लिए स्टील बेली ब्रिज का ढांचा शामिल है। इसके अतिरिक्त, संचार व्यवस्था बहाल करने के लिए नेपाल टेलीकॉम व एनसेल के टावरों को दुरुस्त करने के साथ-साथ आपदा प्रभावित इलाकों में 20 सैटेलाइट फोन तैनात किए गए हैं।

 

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