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नेपाल-तिब्बत सीमा पर जलप्रलय से हाहाकार: अब तक 587 से अधिक मौतें, 1400 लापता; मुर्दाघरों में जगह नहीं, चितवन में बन रहा अस्थायी शव गृह

काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल-तिब्बत सीमा पर विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात बेहद भयावह हो चुके हैं। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक नेपाल में 587 और तिब्बत में 5 मौतों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1400 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। लगातार बरामद हो रहे शवों के कारण नेपाल के कई जिलों में मुर्दाघर पूरी तरह भर चुके हैं, जिसके चलते प्रशासन को भरतपुर में आपातकालीन स्तर पर अस्थायी शव गृह तैयार करना पड़ रहा है। इसी बीच सीमा क्षेत्र में एक और ग्लेशियल झील में जलस्तर बढ़ने से भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के तटीय इलाकों में दूसरी बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

अस्पतालों के मुर्दाघर फुल, चितवन में 250 शवों के लिए अस्थायी केंद्र

आपदा के बाद स्थिति इतनी विकट हो गई है कि नुवाकोट, धाडिंग, पोखरा और नवलपरासी के मुर्दाघरों में शव रखने की जगह नहीं बची है।

  • नेपाल के आठ जिलों से 538 शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें अकेले चितवन से 221, नवलपरासी पूर्व से 134, गोरखा से 46, नुवाकोट से 37, धादिंग से 33, तनहूं से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा से 12 शव शामिल हैं।

  • चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश अर्याल के अनुसार, जिले के अस्पतालों की क्षमता केवल 30 से 50 शव रखने की है।

  • दबाव को देखते हुए भरतपुर-10 स्थित ‘इंडस्ट्रियल एंटरप्राइज डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट’ की खाली इमारत को अस्थायी शव केंद्र बनाया जा रहा है, जहाँ 250 शव रखे जा सकेंगे।

  • शवों को सुरक्षित रखने के लिए कमरों में एसी और ‘ड्राई आइस’ (सूखी बर्फ) का प्रबंध स्थानीय औद्योगिक संगठनों के सहयोग से किया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर देवघाट के इलेक्ट्रिक श्मशान घाट के इस्तेमाल की भी योजना है।

तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री सुरक्षित दिल्ली पहुंचे, विदेश मंत्री ने की मुलाकात

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 21 भारतीय तीर्थयात्रियों को नेपाली सेना की मदद से सुरक्षित रेस्क्यू कर दिल्ली लाया गया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दिल्ली में इन तीर्थयात्रियों से मुलाकात कर उनकी आपबीती सुनी और राहत अभियान में सहयोग के लिए नेपाली सेना एवं नेपाल सरकार का आभार जताया।

320 भारतीय अब भी संपर्क से बाहर, 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय

आपदा प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 121 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 85 भारतीय, 16 चीनी, 9 दक्षिण कोरियाई, 2 अमेरिकी और 2 रूसी शामिल हैं। सुरक्षित बचाए गए भारतीयों में त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना के 63 कर्मचारी भी शामिल हैं। हालांकि, अभी भी करीब 320 भारतीय नागरिक लापता या संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में भी 558 लोग लापता हैं, जिनमें 260 विदेशी हैं। भारत सरकार ने स्थिति पर नजर रखने और अपने नागरिकों की खोज के लिए 24 घंटे का विशेष कंट्रोल रूम शुरू किया है।

एमपी की स्वाती बागरेचा भी लापता, मोबाइल चीन सीमा पर एक्टिव

मध्य प्रदेश के विदिशा की निवासी और वर्तमान में कनाडा के टोरंटो में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर स्वाती बागरेचा भी इस आपदा के बाद से लापता हैं। परिजनों के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह 9 बजे के बाद उनसे संपर्क टूट गया था। उनके फोन की घंटी बज रही है और लोकेशन चीन सीमा के आसपास ट्रेस हो रही है। परिजनों ने एजेंसियों से तकनीकी जांच के जरिए मदद की गुहार लगाई है।

झील फटने का नया खतरा, 13 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में 13,295 सुरक्षा बल (नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स) राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं। हवाई बचाव, मलबे की छंटाई, चिकित्सा सहायता और निचले इलाकों को खाली कराने का काम जारी है। हालांकि, सीमा पर एक और झील के ओवरफ्लो होने की आशंका से भोटेकोशी और नारायणी बेसिन में अलर्ट घोषित कर दिया गया है, जिससे बचाव दल हाई अलर्ट पर हैं।

 

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