
काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती पहाड़ी इलाकों में हिमस्खलन के बाद आई भीषण बाढ़ और मलबे के सैलाब ने भारी तबाही मचाई है। इस जलप्रलय में अब तक 165 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल के अनुसार, लापता लोगों में करीब 300 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। तबाही के चलते हजारों परिवार बेघर हो गए हैं और बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है।
हिमस्खलन से थमा नदी का प्रवाह, फिर फूटा पानी का विकराल रूप
आपदा की शुरुआत बुधवार को उस वक्त हुई जब भारी हिमस्खलन के चलते भोटे कोशी नदी की सहायक नदी ‘लेंडे’ का प्राकृतिक बहाव अचानक अवरुद्ध हो गया। कुछ ही देर में पानी का अत्यधिक दबाव बना और जमा हुआ सैलाब विकराल रूप लेकर नेपाल के तीन सीमावर्ती जिलों में टूट पड़ा। बाढ़ का पहला प्रहार तिब्बत सीमा से सटे तिमुरे और रसुवागढ़ी के इलाकों पर हुआ, जिसके बाद तेज बहाव ने रास्ते में आने वाले रिहायशी मकानों, पक्की सड़कों, पुलों और पनबिजली परियोजनाओं को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया।
1500 से अधिक लोग लापता, मलबे में जिंदगी की तलाश जारी
विदेश मंत्री शिसिर खनाल ने बताया कि नेपाल और तिब्बत के आपदाग्रस्त क्षेत्रों से करीब 1,500 लोगों के लापता होने की आधिकारिक सूचना है, जिनमें लगभग 800 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफले ने अंदेशा जताया है कि सुदूर और मलबे से पटे क्षेत्रों में तलाशी अभियान तेज होने पर मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है। सुरक्षा बल और आपदा राहत दल हेलीकॉप्टरों की मदद से दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को एयरलिफ्ट करने और राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं।
तिब्बत के ग्यिरोंग में भी हाहाकार, 558 लोग लापता
सीमा के दूसरी ओर चीनी क्षेत्र तिब्बत में भी इस आपदा का भयानक असर देखने को मिला है। चीनी सरकारी मीडिया सीसीटीवी के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 260 विदेशी नागरिकों सहित कुल 558 लोग लापता बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आ रही तस्वीरों और वीडियो में सैलाब अपने साथ भारी भरकम चट्टानें, पेड़ और इमारतें बहा ले जाता नजर आ रहा है। दोनों देशों की सीमा पर फिलहाल बड़े पैमाने पर संयुक्त राहत और बचाव कार्य संचालित किया जा रहा है।
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