वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आर्थिक नीतियों को न्यायपालिका से एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की एक फेडरल ट्रेड कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 10% ग्लोबल टैरिफ (Global Tariff) को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के पास कांग्रेस की पूर्व अनुमति के बिना इतने व्यापक स्तर पर आयात शुल्क थोपने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।
2-1 के बहुमत से आया ऐतिहासिक फैसला
‘कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ के तीन सदस्यीय पैनल ने 2-1 के बहुमत से यह निर्णय सुनाया। जजों ने कहा कि इसी साल फरवरी में एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) के जरिए लागू किए गए ये टैरिफ 1974 के व्यापार कानून (Trade Act of 1974) की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। कोर्ट ने माना कि प्रशासन ने अपनी शक्तियों का अतिक्रमण किया है।
कोर्ट ने खारिज किए प्रशासन के तर्क
ट्रम्प प्रशासन ने इस टैरिफ को सही ठहराने के लिए ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का सहारा लिया था। सरकार की दलील थी कि अमेरिका 1.2 ट्रिलियन डॉलर के भारी-भरकम व्यापार घाटे और GDP के 4% के बराबर घाटे का सामना कर रहा है, जो एक आर्थिक आपातकाल जैसी स्थिति है।
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जजों की टिप्पणी: कोर्ट ने इस तर्क को नकारते हुए कहा कि व्यापार घाटा होना मात्र इस कानून के तहत ‘भुगतान संतुलन’ (Balance of Payments) का गंभीर संकट नहीं माना जा सकता। जजों के अनुसार, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों को दरकिनार करने की कोशिश की है।
व्यापारियों की जीत: खिलौना निर्माताओं ने जताई खुशी
इस फैसले का सबसे ज्यादा स्वागत उन छोटे और मध्यम व्यापारियों ने किया है जो वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर हैं।
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बेसिक फन (Basic Fun) कंपनी के CEO जे मय फोरमैन ने इसे ‘बड़ी जीत’ बताते हुए कहा कि इन टैरिफ की वजह से अमेरिकी कंपनियों का बाजार में टिकना मुश्किल हो रहा था। अब कंपनियों को अपनी लागत और सप्लाई चेन मैनेज करने में स्पष्टता मिलेगी।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
डोनाल्ड ट्रम्प अक्सर भारत के टैरिफ स्ट्रक्चर की आलोचना करते रहे हैं। कोर्ट के इस फैसले से भारतीय निर्यातकों (Exporters) को बड़ी राहत मिल सकती है:
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निर्यात में आसानी: ग्लोबल टैरिफ हटने से अमेरिका में भारतीय सामानों की पहुंच आसान और प्रतिस्पर्धी बनी रहेगी।
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लागत में कमी: भारतीय माल पर लगने वाली अतिरिक्त 10% ड्यूटी का खतरा टलने से लागत में अनचाही बढ़ोतरी नहीं होगी।
आगे का रास्ता: अपील की तैयारी
कानूनी जानकारों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन इस फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा। सरकार जल्द ही इसके खिलाफ ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट’ में अपील कर सकती है। यदि वहां भी फैसला बरकरार रहता है, तो यह मामला अंतिम निर्णय के लिए एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुँच सकता है।
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